पंचतंत्र की कहानियों में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाली कहानी शेर और मूर्ख ब्राम्हण की हैं। आज कहानीज़ोन के इस लेख में आपको पता चलेगा कि कैसे तीन भाई अपने विद्वता के अभिमान के कारण शेर का शिकार बन गए। जबकि उनका सबसे छोटा भाई पेड़ पर चढ़ा हुआ यह सब देखता रह गया। तो चलिए देखते हैं पंचतंत्र की लोकप्रिय कहानी – तीन मूर्ख ब्राम्हण और शेर जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं:
पंडित हरीराम और उनके बच्चे:
दशरथपुर नामक गाँव में हरीराम नाम का एक पंडित रहता था। वह बहुत विद्वान और ज्योतिषी था। उसके पास दूर-दूर से लोग अपने भविष्य को जानने के लिए आते थे। हरीराम अपने आसपास तथा दूर के गाँव तक पूजा-पाठ करवाने जाते थे। पंडित हरीराम के चार बच्चे थे, जो बहुत छोटे थे। वे अपनी शिक्षा अपने माता-पिता से ही ले रहे थे।
एक दिन पंडित हरीराम भोजन कर रहे थे। तभी उसकी पत्नी जानकी ने कहा, “स्वामी! अब तो हम लोग धीरे-धीरे बूढ़े होते जा रहे हैं और हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं। जिन्हे हम कब तक ऐसे घर पर शिक्षा देते रहेंगे”। हमें अपने बच्चों को किसी गुरुकुल में शिक्षा दिलवानी चाहिए। जिससे हमारे बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो सके।
पंडित जी ने कहा,”हाँ! जानकी आप ठीक कह रही हो।” कल मैं गुरुकुल जाकर अपने बच्चों का दाखिला करवा दूँगा। क्योंकि अब मुझे भी अपनी जजमानी मे पूजा-पाठ करवाने में कठिनाई होती हैं। अगर मैं घर पर बैठा रहा, तो हमारे घर का खर्च कैसे चलेगा। जबकि यदि हमारे बच्चे ज्योतिष विद्या सीख कर हमारे साथ पूजा-पाठ करेंगे तो हमारे घर की आय दुगुनी हो जाएगी।
अगली सुबह पंडित गंगाराम अपने चारों बच्चों को लेकर गुरुकुल गए। वहाँ पर कुछ साधारण से सवाल जवाब के बाद चारों बच्चों का दाखिला हो गया। आश्रम में भौतिक, आध्यात्मिक, व्यवहारिक, सांस्कृतिक और तांत्रिक विद्या भी प्रदान की जाती थी। चारों बच्चों ने खूब मन लगा कर ज्योतिष विद्या ग्रहण की और उनकी पढ़ाई पूरी हो गई। शिक्षा पूरी करने के बाद चारों भाई अब ब्राम्हण कहलाने लगे थे। चारों ब्राम्हण में से तीन को लगने लगा था कि मुझसे बड़ा कोई विद्वान नहीं हैं।
पंडित जी के चारों बच्चों को तंत्र तथा ज्योतिष विद्या का अथाह ज्ञान हो गया था। अब बच्चे अपने पिता की जजमानी में अपना हाथ में बटाने लगे थे। जिसके कारण उनकी ख्याति दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो गई थी। पंडित के बच्चों की प्रशंसा सुन, उस राज्य के राजा उदयभान सिंह ने अपने दरबार में पंडित के चारों बेटों को बुलाने के लिए आमंत्रण भिजवाया। पंडित के बच्चों ने राजा का आमंत्रण पाकर अपनी बुद्धि का अभिमान करने लगे।
विद्या का अभिमान:
चारों बेटे हँसते हुए कहने लगे, “चलो आज राजा की हस्त रेखा को देखने चलते हैं।” चारों भाई एक साथ जंगल के रास्ते निकल गए। बीच जंगल में पहुँच कर चारों भइयों को एक मरे हुए शेर का अस्थिर-पंजर दिखाई दिए। सबसे बड़े भाई ने कहा, “हम लोग पैदल जा रहे हैं। अगर हम इस शेर को जिंदा करके, इसके ऊपर बैठ कर राजा के महल में जाएंगे तो हमारी इज्जत और बढ़ जाएगी।”
बड़े भाई ने कहा- “मैं इस शेर को उसकी खाल और अस्थि पंजर से जोड़ सकता हूँ।” दूसरे भाई ने कहा, “मैं इसके अंदर रक्त संचार और शरीर को पहले जैसा बना सकता हूँ।” तीसरे भाई ने कहा, “मैं इसको तंत्र विद्या के माध्यम से जीवित कर सकता हूँ।” चौथे भाई ने कहा, “नहीं…नहीं हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।
हमें सीधे राजा के दरबार में चलना चाहिए। क्योंकि अगर शेर जिंदा हो गया तो वह हम चारों को मार कर खा जाएगा। उसकी बातों को सुनकर तीनों भाई उसके ऊपर जोर-जोर से हँस पड़े और बोले, “मेरे डरपोक भाई अगर हम शेर को जिंदा कर सकते हैं तो उसको अपने अनुसार चला भी सकते हैं।”
शेर वही करेगा जो हम कहेंगे। सबसे छोटे भाई की बात किसी ने नहीं मानी। वें तीनों शेर की खाल अस्थिर पंजर को एकट्ठा कर दिए। तीसरे भाई ने अपने कमंडल से जल निकाल कर शेर को जीवित करने के लिए मंत्रों का उच्चारण शुरू करने वाला ही था तो सबसे छोटे भाई ने कहा, “रुको! मैं पेड़ पर चढ़ जाता हूँ, उसके बाद शेर को जिंदा करो।”
सबसे छोटा भाई पेड़ पर चढ़ गया। तीनों भाई अपनी तंत्र विद्या से शेर को जिंदा कर दिए। शेर दहाड़ मारकर उठ खड़ा हुआ। वह अपने सामने तीनों भाइयों को देख, उन पर टूट पड़ा। तीनों को मारकर खा गया। यह सब पेड़ के ऊपर चढ़ा छोटा भाई देख रहा था। वह बहुत दुखी हुआ। शेर के जाने के बाद छोटा भाई पेड़ से नीचे आकर देखा तो सिर्फ हाँड़ मांस के लोथड़े पड़े थे।
वह तेजी से अपने घर की तरफ गया घर जा कर सारा दृष्टांत अपने माता-पिता को सुना दिया। देखते ही देखते पूरे गाँव में हाहाकार मच गया। पंडित हरीराम और उनकी पत्नी, यह सदमा बर्दाश्त न कर सके उन्हें दिल का दौरा पड़ने के कारण दोनों की मृत्यु हो गई।
नैतिक सीख:
बुद्धि का प्रयोग बहुत सोच समझकर करना चाहिए।
🙋♂️ FAQs – पंचतंत्र की कहानी – मूर्ख ब्राम्हण और शेर
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.

