पहला प्यार कभी नहीं भूलता – चाहे वो स्कूल की क्लास में किसी की एक मुस्कान हो, या कॉलेज की फ्रेशर पार्टी में किसी का पहला touch। इस पेज पर हमने 3 ऐसी college love story in hindi में शेयर की हैं जो आपको अपने पहले प्यार की यादें ताज़ा करा देंगी। रोहन-मीनू की परीक्षा के बाद की मुलाकात, पंकज-नेहा का लाइब्रेरी वाला इज़हार, और मधू-पंकज की फ्रेशर पार्टी — हर कहानी एक अलग एहसास लेकर आती है।
1. पहले प्यार की कहानी:

शिवपुर गाँव में रोहन नाम का एक लड़का रहता था। वह दसवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके पिता दूध बेचने का काम करते थे। रोहन भी समय निकाल कर अपने पापा के काम में हाथ बँटाता था। जैसे, गाय भैंस को नहलाना, चारा डालना और दूध निकालना आदि। रोहन घर के काम के साथ-साथ पढ़ाई में भी अधिक ध्यान देता था।
दसवीं बोर्ड की परीक्षा हुई, जिसमें रोहन ने अपनी कक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया। स्कूल में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। रोहन को फूल-माला का हार पहना कर उसे मेडल दिया गया। सभी बच्चों ने स्टेज के सामने बैठकर रोहन के लिए तालियां बजाकर उसका हौसला बढ़ाया। समारोह समाप्त हुआ सभी बच्चे अपने-अपने घर को चले गये।
रोहन अपना बैग लेने के लिए क्लास रूम में गया तो उसने देखा कि एक लड़की जिसका नाम मीनू हैं वह टेबल पर अपना सिर झुकाकर रो रही थी। उस रूम में कोई और नहीं था। रोहन ने मीनू के पास जाकर पूछा, “तुम क्यों रो रही हो? सभी बच्चे अपने-अपने घर जा चुके हैं। तुम भी अपने घर जाओ।
मीनू बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान लड़की थी। उसने रोहन से रोते हुए कहा- “मैंने इस बार पढ़ाई में बहुत मेहनत की थी। लेकिन, मैं स्कूल में प्रथम स्थान हासिल नहीं कर सकी। मैंने अपने माता-पिता से वादा किया था कि इस बार जरूर मैं प्रथम आऊँगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब मैं अपने माता-पिता के सामने कैसे जाऊँ।
रोहन ने कहा, “अच्छा तो ये बात हैं, तुम इसलिए रो रही हो।” मीनू को हौसला देने के लिए रोहन ने पूँछा, “क्या मैं तुम्हें दोस्त कह सकता हूँ? मीनू ने सिसकते हुए कहा, ‘जी हाँ’। रोहन ने मीनू के आँसू पोंछते हुए कहा, दोस्त! जब रेस होती हैं तो उस रेस में बहुत सारे लोग भाग लेते हैं। लेकिन, विजय किसी एक की होती हैं।” ठीक इसी प्रकार हम सभी पूरे साल मेहनत करते हैं। लेकिन, परीक्षा में किसी एक को ही प्रथम स्थान प्राप्त होता हैं।
इस बार अपनी कमियों को ध्यान में रखकर पढ़ाई करो, मुझे पूरा विश्वास हैं कि तुम प्रथम स्थान जरूर प्राप्त करोगी। रोहन की बातें सुनकर मीनू के अंदर एक नई चेतना सी जग गई। वह दोनों हाथों से रोहन को पकड़कर उसके गले लग कर तेज-तेज रोने लगी। रोहन ने भी अपने दोनों हाथों से मीनू को पकड़ कर गले से लगा लिया। इस तरह से दोनों कुछ मिनट तक एक दूसरे के गले लगे रहे।
रोहन ने फिर से उसकी आँखों से आँसू पोंछते हुए कहा- ‘चले! अब घर?’ मीनू ने हल्की सी मुस्कान और इशारे से हाँ! कहा। रोहन उसके चेहरे को देख, उसके अंदर मीनू के लिए प्यार उमड़ पड़ा। रोहन मीनू को उसके घर पर छोड़कर अपने घर को चला गया। घर जाकर रोहन और मीनू पूरी रात सो नहीं सके। दोनों के सामने एक दूसरे के चेहरे ही दिख रहे थे।
इस तरह से अब दोनों के बीच बेपनाह प्यार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। दोनों एक साथ रहने लगे थे। रोहन मीनू की पढ़ाई में मदद भी करता था। अब दोनों की स्कूल की पढ़ाई पूरी हो गई। मीनू अमीर घर से थी। मीनू के पिता ने उसकी आगे की पढ़ाई के लिए शहर के महंगे कालेज में दाखिला दिलवा दिया। लेकिन, उस कालेज की फीस अधिक होने के कारण रोहन उस कालेज में दाखिला नहीं ले सका।
उसने किसी और कालेज में दाखिला ले लिया, अब दोनों मिल नहीं पाते थे। समय बदला रोहन के पिता की मृत्यु हो गई। अब रोहन का घर चलाना मुश्किल हो गया। रोहन अपने घर को चलाने के लिए अपने पिता की तरह घर-घर जाकर दूध बेचने लगा। एक दिन रोहन, सक्सेना साहब के घर पर दूध लेकर गया। सक्सेना एक बडे अधिकारी थे। रोहन ने दरवाजे की घंटी बजाई। अंदर से आवाज आई, कौन? रोहन ने कहा, ‘दूधवाला’।
सक्सेना साहब की लड़की एक बर्तन लिए घर से बाहर आई। उसने रोहन को ऊपर से नीचे तक देखा। रोहन उस लड़की को दूध देकर चला गया। अगले दिन फिर रोहन दूध लेकर आया उस दिन सक्सेना साहब के घर पर कोई नहीं था। रोहन ने दरवाजे की घंटी बजाई, जैसे ही रोहन ने कहा, दूधवाला! कमरे में से आवाज आई, अंदर आ जाओ।
रोहन डरते हुए दूध लेकर अंदर जाकर देखा कि सक्सेना साहब की लड़की एक बर्तन लेकर खड़ी थी। उसने रोहन को सोफ़े पर बैठने के लिए कहा। रोहन ने मना किया। लेकिन, फिर भी वह रोहन को सोफ़े पर बैठाकर बहुत सारी बातें करने लगी। रोहन को धीरे-धीरे समझ में आने लगा कि सक्सेना साहब की लड़की को कही मुझसे प्यार तो नहीं हो गया? वह मुझसे ज्यादा बाते क्यों कर रही हैं।
यहाँ देखें: 3 प्यार भरी कहानियाँ
रोहन जब भी सक्सेना साहब के घर दूध देने जाता वह लड़की उसे पैसे भी अधिक देने लगी। और उसे अच्छी-अच्छी चीजे भी खाने को देती थी। लेकिन, रोहन का लगाव उस लड़की के प्रति बिल्कुल नहीं था। एक दिन उस लड़की ने रोहन को अपना नाम ‘मधू’ बताते हुए अपने प्यार का इजहार कर दिया। उसने रोहन को अपने गले लगाते हुए बोली “मैं आप से बहुत प्यार करती हूँ” मैं आप से शादी करना चाहती हूँ।
रोहन ने कहा, ‘लेकिन, मैं बहुत गरीब इंसान हूँ। मेरे पास कुछ नहीं हैं, मैं आप से शादी करने के लायक नहीं हूँ।’ आप किसी अमीर घर के लड़के के साथ शादी कर लो। उसकी बाते सुनकर उसने रोहन के मुँह पर अपना हाथ रखकर चुप कराते हुए बोली, “तुम्हारे मुँह से ऐसी बातें अच्छी नहीं लगती। अब दुबारा ऐसी बातें कभी मत कहना।”
रोहन ने अपने पहले प्यार के बारें में बताना चाहा। लेकिन, मधू ने दुबारा से यह कहते हुए उसका मुँह बंदकर दिया कि मुझे अब आपसे कुछ नहीं सुनना। मैं आप से शादी करूंगी। रोहन अपने घर आकर सोचने लगा कि मधू से पीछा कैसे छुड़ाए। अब रोहन को उसे अपने पहले प्यार मीनू की याद आने लगी।
रोहन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? एक दिन रोहन मीनू के कॉलेज में गया। दोपहर की छुट्टी हुई थी, स्कूल के मैदान में एक पेड़ की छाया में मीनू और उसकी दोस्त बैठकर हँसी-मजाक कर रही थी। तभी मीनू की निगाह उसकी तरफ आते रोहन पर पड़ी मीनू तेजी से दौड़कर रोहन के गले से लग गई।
मीनू और रोहन दोनों स्कूल के सामने एक रेस्टोरेंट में बैठकर बातचीत करने लगे। रोहन ने मीनू से पूँछा क्या तुम आज भी अकेली हो या फिर कोई …दोस्त बना ली। मीनू, रोहन को गुस्से से भरी आँखों से घूरते हुए बोली हाँ! बनाया हैं, वह मेरे सामने बैठा हैं। दोनों एक दूसरे को देखकर जोर-जोर से हँसने लगे।
उसी दिन दोनों ने यह निश्चय किया कि दोनों एक दूसरे से शादी करेंगे। कुछ दिन बाद दोनों ने अपने पहले प्यार के साथ शादी कर ली और दोनों खुशी-खुशी जीवन बीताने लगे।
2. College Love Story in Hindi – पंकज और नेहा की लव स्टोरी:
पंकज अपनी क्लास का मेधावी छात्र था। उसे शांत रहना पसंद था। वह ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखता था। वह अपना खाली समय अधिकतर लाइब्रेरी में बीताता था। उसी क्लास में नेहा भी पढ़ती थी। पंकज की तरह नेहा भी ज्यादा किसी से लगाव नहीं रखती थी। कॉलेज में फ्रेशर पार्टी होने वाली थी। टीचर ने सभी बच्चों को पार्टीसीपेट करने के लिए कहा।
पंकज और नेहा एक ग्रुप में थे। उन्हें एक नाटक प्रस्तुत करना था। जिसमें पंकज नेहा का हसबैंड बना था। नाटक बहुत अच्छे से बीता। बच्चों और टीचर को पंकज और नेहा का किरदार खूब पसंद आया। अगले दिन क्लासरूम में पंकज और नेहा एक दूसरे को देखकर हल्की सी स्माइल पास किए। नेहा कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी। जबकि, पंकज कॉलेज की बस से आता था।
एक दिन मौसम खराब होने के कारण कुछ टीचर कॉलेज नहीं आ सके। जिसके कारण लंच के बाद बच्चों को लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के लिए कहा गया। पंकज लाइब्रेरी के एक कोने में बैठकर पढ़ाई कर रहा था। तभी नेहा बुक लेकर पंकज के सामने खाली पड़ी कुर्सी पर आकर बैठ गई। दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये।
नेहा ने कहा, “उस दिन पार्टी में आपका रोल कॉलेज के सभी लोगों को खूब पसंद आया। पंकज ने कहा, आपका भी! नेहा बोली, “तुम्हें मैं अक्सर अकेले देखती हूँ। तुम्हारी अन्य बच्चों के साथ दोस्ती क्यों नहीं हैं? पंकज ने कहा, “आज तक मुझे मेरी सोच का दोस्त ही नहीं मिला।” नेहा ने कहा, “अच्छा तो ये बात हैं! पंकज ने कहा हाँ।”
दोनों तेजी से हँस पड़े, नेहा कॉपी में कुछ लिखने लगी। पंकज भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। कुछ समय बाद नेहा ने बहुत हिम्मत करके अपनी कॉपी पंकज की तरफ बढ़ाते हुए पूछा, इस प्रश्न का जबाब क्या होगा? पंकज ने पेज पलट कर देखा, कॉपी में लिखा था, “क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे”? पंकज को नेहा उसी दिन पसंद आ गई थी, जब दोनों ने नाटक में भाग लिए थे।
पंकज ने पेज में बड़ी लंबी चौड़ी बात लिखी, “नेहा! तुम मुझे फ्रेशर पार्टी में ही पसंद आ गई थी। मगर, मैं तुमसे अभी तक अपनी दिल की बात नहीं कह सका। लेकिन, क्या तुम सच में मुझसे प्यार करती हो? लिखकर कापी को नेहा की तरफ बढ़ा दिया। नेहा, ने जबाब में लिखा, पंकज! मुझे भी उसी दिन से लगने लगा था कि तुम मेरे दोस्त बन चुके हो। मैं, सच में तुमसे दोस्ती करना चाहती हूँ।
पंकज ने फिर लिखा, तो कैंटीन चले, नेहा ने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया। दोनों ने कैंटीन में एक दूसरे को चॉकलेट देकर अपने प्यार का इजहार कर दिया। नेहा पंकज के पास बैठी थी। मौका देखकर पंकज ने नेहा को हल्की सी झप्पी दी। नेहा ने भी पंकज को कसकर हग कर लिया। दोनों उस दिन से एक साथ रहने लगे।
रोमांटिक कहानी – अभय और मालती का बेपनाह प्यार
दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। क्लास के और कुछ दोस्तों को भी पता चल गया कि पंकज और नेहा बहुत अच्छे दोस्त है। पंकज अब नेहा के बारे में सोचता रहता था। उसने पढ़ाई की तरफ ध्यान देना कम कर दिया। आखिरी सेमेस्टर की परीक्षा होने वाली थी। नेहा ने कहा, “हम दोनों एक ही कंपनी में जॉब जॉइन करेंगे और एक साथ ही रहेंगे।” पंकज भी इस बात से सहमत था। दोनों का सिलेक्सन भी एक अच्छी कंपनी में हो गया था।

परीक्षा होने के बाद दोनों को कंपनी जॉइन करनी थी। लेकिन, पंकज अपने आखिरी सेमेस्टर की परीक्षा को पास नहीं कर सका। अब दोनों के बनाए सभी प्लान टूट चूके थे। कंपनी सफल बच्चों को ही ले रही थी। पंकज ने नेहा से कहा, “तुम कंपनी जॉइन कर लो, मैं छः महीने बाद जॉइन कर लूँगा।
पंकज अपनी पढ़ाई में लग गया। नेहा जॉब करने लगी। कुछ महीनों बाद जब पंकज ने नेहा से बात करने के लिए फोन किया तो नेहा ने यह कहकर बात करने से मना कर दिया, कि इस बार भी तुम फेल न हो जाओ, ज्यादा बात मत करो।
नेहा और पंकज की फोन पर बात लगभग बंद हो चुकी थी। पंकज की दुबारा परीक्षा हुई। वह इस बार परीक्षा में सफल हो गया। उस दिन वह बहुत खुश था। यह बात बताने के लिए उसने नेहा को फोन किया। लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था। पंकज ने सोचा कोई बात नहीं, क्या पता नेहा कंपनी में हो या फिर उसके फोन की बैटरी खत्म हो चुकी हो।
शाम को फिर से पंकज ने नेहा को फोन किया। लेकिन उसका फोन अभी भी स्विच ऑफ था। उसने कई बार फोन किया लेकिन उसकी नेहा से बात नहीं हो सकी। पंकज को अगले दिन उसी कंपनी में जॉब जॉइन करना था। जिसमें पहले उसे और नेहा को ऑफर लेटर मिले थे। कंपनी में पहले दिन सभी कागजी कारवाही करते हुए पंकज को दोपहर हो चुकी थी।
कंपनी के मैनेजर ने कहा, “पंकज! कैंटीन में जाकर लंच कर लो।” लंच के बाद फिर यही मिलते हैं। फिर तुम्हें ट्रेनिंग देता हूँ। पंकज कैंटीन में पहुंचा और जो देखा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। नेहा उसकी कॉलेज फ्रेंड किसी हैंडसम लड़के के साथ हँसते हुए एक थाली में खाना खा रही थी। दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे।

पंकज नेहा के पीछे वाली टेबल पर बैठकर लंच करने लगा। नेहा की बातों को सुनकर पंकज को समझ आ गया कि हो न हो, यह उसका बॉयफ्रेंड हैं। तभी नेहा का फोन बजता हैं। उधर, से आवाज आई तुमने अपना पुराना नंबर क्यों बंदकर दिया। नेहा कहती हैं, “उस नंबर पर किसी फालतू लड़के का फोन आता था। इसलिए, मेरे दोस्त मोहित ने वह नंबर बंद करवा दिया।”
और देखें: गाँव की प्रेम कहानियाँ हिन्दी में
पीछे बैठे पंकज को नेहा की बातों को सुनकर बहुत दुख हुआ। उससे खाना नहीं खाया गया। वह उठकर अपने ट्रेनिंग रूम में चला गया। पंकज बुद्धिमान था, उसे एक महीने की ट्रेनिंग देकर टीम हेड बना दिया गया। अब नेहा और मोहित, पंकज के टीम में आ चुके थे। पहले दिन पंकज ने अपनी टीम को एक कैबिन में बुलकर मीटिंग ली। नेहा अपने सामने पंकज को देखकर कुछ बोलना चाहती थी लेकिन पंकज ने चुप करवा दिया।
पंकज का स्वभाव कॉलेज लाइफ से ही बहुत साधारण था। लेकिन वह नेहा के चक्कर में फँसकर अपना कीमती समय खराब कर दिया था। पंकज ने नेहा और मोहित को कभी बदले की भावना से नहीं देखा। वह उन्हें कभी परेशान भी नहीं करता था। नेहा ने मोहित को यह बात भी कभी नहीं बताई कि पंकज और मैं कॉलेज में एक साथ पढ़ते थे।
नेहा समझती थी कि मोहित उससे शादी करेगा। लेकिन मोहित ऐसा कभी नहीं सोचता था। उसने नेहा से टाइमपास के लिए दोस्ती की थी। कुछ दिन बाद मोहित ने इस कंपनी को छोड़कर किसी और कंपनी को जॉइन कर लिया। उसने नेहा से साफ-साफ बोल दिया कि हमारी तुम्हारी दोस्ती यहीं तक थी। मेरा रिश्ता हो चुका हैं। मैं कुछ ही दिनों शादी करने वाला हूँ।
मोहित की बात सुनकर नेहा को ऐसा लगा कि मानो वह पेड़ पर से नीचे गिर गई। अब वह कहीं की नहीं रही। एक दिन पंकज कैंटीन में लंच कर रहा था। तभी सामने से नेहा भी कैंटीन में आई। वह पंकज के सामने जाकर कुर्सी पर बैठ गई। उसने पंकज से कहा, “सर मुझे माँफ कर दो। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।” पंकज ने कहा, “मोहित ने कंपनी क्यों छोड़ दी?” नेहा ने अपने और मोहित के बीच की सारी कहानी उसे सुना दी।
पंकज ने उसे इग्नोर करते हुए कहा, अच्छा तो लंच ओवर हो चुका हैं। मैं चलता हूँ, मुझे बहुत काम हैं। अब नेहा टूट चुकी थी। एक दिन पंकज ने एक कार्ड नेहा को देते हुए कहा, “मैं शादी करने जा रहा हूँ, ये मेरी शादी का कार्ड हैं। शादी में जरूर आना। शादी का कार्ड खोलकर देखा तो उसमें ‘पंकज और नेहा’ का नाम लिखा था। नेहा पंकज के गले लगकर जोर-जोर से रोने लगी।
पंकज ने कहा, “तुमने मुझसे बात न करने के लिए अपना फोन नंबर भी बदल लिया। लेकिन, मैं प्रतिदिन तुम्हें फोन करने की कोशिश करता रहा। कंपनी के पहले दिन ही मैंने तुम्हें और मोहित को कैंटीन में साथ-साथ लंच करते हुए देख, समझ गया था। मैंने तुम्हें भुलाने की बहुत कोशिश की।
लेकिन, मेरे दिल से तुम्हारा प्यार नहीं निकल सका। नेहा रोते हुए बोली मुझे माँफ कर दो प्लीज…। पंकज ने नेहा को अपने गले से लगाते हुए कहा, “मेरे जीवनसाथी यह तुम्हारी पहली और आखिरी गलती हैं।”
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.
