कभी-कभी हम दूसरों की तरह बनने की कोशिश में अपनी पहचान और खुशियां खो बैठते हैं। “कौवा चला हंस की चाल” पंचतंत्र की ऐसी ही प्रसिद्ध कहानी है, जो हमें सिखाती है कि हमें अपनी खूबियों को पहचानना चाहिए और स्वयं को उसी रूप में स्वीकार करना चाहिए जैसा प्रकृति ने बनाया है। आइए पढ़ते हैं यह रोचक और प्रेरणादायक पंचतंत्र कहानी।
कौवा चला हंस की चाल:

किसी तालाब में एक बगुला रहता था। उसी तालाब के किनारे जामुन के पेड़ पर एक कौवा भी रहता था। दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। लेकिन, कौवा जब कभी बगुले को देखता था तो मन ही मन बहुत दुखी होता था। वह अपने काले रंग के कारण अपने आपको बहुत कोसता था। वह चाहता था कि मैं भी बगुले जैसा सफेद शरीर वाला बन जाऊँ।
एक दिन कौवे ने बगुले से कहा – “मैं भी तुम्हारे जैसा सफेद शरीर वाला बनना चाहता हूँ, तुम अपने सफेद रंग का राज मुझे बता दो।” बगुला कौवे के ऊपर हँसते हुए कहता हैं – “कौवे भाई, भगवान ने हमें जिस रूप में बनाया हैं, उसी तरह हमें अपने आप को स्वीकार करना चाहिए।” कौवे ने अपने बदले हुए सुर में बगुले से कहा- “रहने दो, मत बताओ, तुम नहीं चाहते तुम्हारे जैसा कोई और पक्षी दिखे।”
लेकिन, आज मैं तुम्हें एक बात बता रहा हूँ, तुम देखना एक दिन मैं तुमसे ज्यादा हंस की तरह सफेद शरीर वाला बनकर दिखाऊँगा” और वह कांव कांव करते हुए वहाँ से उड़ गया। आकाश में उड़ते-उड़ते वह बहुत दूर निकल आया और नीचे देखा कि बहुत सारें कौवे कुछ खा रहे होते हैं। नीचे से एक बूढ़े कौवे ने आवाज दी- “नीचे आ जा भाई, तुम भी कुछ खा लो।”
उस कौवे ने ऊपर से ही कहा कि “तुम्हारा और हमारा कोई मेल नहीं है, एक दिन देखना तुम काले-कलूटे कौवोंं से अच्छा बगुला और हंस जैसा बनकर दिखाऊँगा।” कौवा उड़ते-उड़ते किसी घर के आँगन में नीम के पेड़ पर जाकर बैठा। नीचे देखता है कि एक औरत अपने बच्चे को नहला धुलाकर तेल पाउडर लगा रही होती हैं। जिसके कारण बच्चे का रंग सुंदर हो गया।
कौवे ने सोचा क्यों ने एक बार पाउडर लगा के देखा जाए। वह चुपके से पाउडर के डिब्बे को लेकर उड़ गया। जंगल में पहुँचकर पाउडर को लगाने लगा। पाउडर लगाकर जब वह उड़ने के लिए पंख को फड़फड़ाया तो सारा पाउडर नीचे गिर गया। लेकिन कौवे ने अभी भी हिम्मत नहीं हारी। उसने फिर से अपनी उड़ान भरी उड़ते-उड़ते एक घर के पास आ पहुंचा। उस घर की सफेदी हो रही थी। जिससे घर का रंग सफेद हो रहा था। कौवा बिना सोचे समझे भिगोए गए चुने की बाल्टी में डुबकी लगा दी।
बाल्टी से बाहर निकलते ही उसके आँखों में जलन तथा शरीर में खुजली शुरू हो गई। किसी तरह वह उड़ते हुए एक झील में डुबकी लगा दी। कुछ घंटों बाद उसको थोड़ी-बहुत राहत मिली। कौवे ने झील में देखा कि सुंदर-सुंदर दूध जैसे कई हंस पानी में तैर रहे थे। उसी झील में उसकी मुलाकात एक बूढ़े हंस से हुई। कौवा बड़े मीठे स्वर में कहा- “हंस भैया मैं आपके जैसा सफेद शरीर वाला बनना चाहता हूँ, मुझे काले रंग से नफरत हैं। कोई तरकीब मुझे बताओ”।

हंस ने मुस्कुराते हुए कहा- मेरे जैसा सफेद शरीर वाला बनना चाहते हो? “हमें कुदरत ने जैसा रंग रूप और जो भी आकार दिया हैं। उसी में हमें संतुष्ट रहना चाहिए। हमें किसी की नकल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कौवे ने हंस से कहा-“ठीक हैं अपने जैसा बनने का रहस्य मत बताओ। लेकिन मेरी एक बात ध्यान से सुन लो, एक दिन मैं सफेद शरीर वाला बनकर जरूर दिखाऊँगा”।
एक दिन वह उसी झील के किनारे पेड़ पर बैठा था। वह पेड़ पर बैठे-बैठे पूरे दिन उस हंस को देखता रहा। आखिर में कौवे को समझ आया कि हंस पूरे दिन पानी में तैरता रहता हैं तथा पानी के अंदर के कीड़े-मकोड़े तथा घास को खाता हैं। इसलिए इसके पंख बर्फ की तरह सफेद और सुंदर हैं। कौवे ने सोचा ‘क्यों न मैं भी अपनी दिनचर्या हंस की तरह कर लूँ, जिससे मैं भी हंस के समान सुंदर दिखने लगूँगा।’
कौवा एक बार फिर बिना सोचे समझे पूरे दिन झील के पानी में तैरने की कोशिश करता रहा। वह अपने आप को पूरी तरह से पानी में डुबोए रखना चाहता था। जिससे उसके शरीर और पंखों का रंग बदलकर सफेद हो जाए। इस तरह झील में उसे सुबह से शाम हो गई। अब उसे ठंड लगनी शुरू हो चुकी थी। लेकिन कौवा फिर भी अपने आप को पानी में डुबोए जा रहा था।
अंततः उसे अधिक ठंड लगने लगी। जिसे वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। वह थक-हार कर पानी से बाहर आ गया। उसने देखा कि उसके शरीर का रंग नहीं बदला। जबकि उसके कुछ पंख पानी में ही निकल चुके थे। जिसके कारण बाहर उसे अब और ठंड लगने लगी थी। पूरे दिन पानी में भीगने की वजह से धीरे-धीरे उसकी तबीयत खराब हो गई। अब उसके दिमाग से सफेद शरीर बनाने का भूत निकल गया। अब वह जैसा हैं वैसे ही अपने आप को स्वीकार करने लगा।
नैतिक शिक्षा:
हम जैसे भी हैं, जिस परिस्थितियों में हैं, उसी में अपने आप को स्वीकार करना चाहिए।
🙋♂️ FAQs – पंचतंत्र की हिन्दी कहानी
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.

