जानवरों की दोस्ती पर आधारित 7 पंचतंत्र शैली की कहानियाँ नैतिक सीख के साथ

📅 Published on June 21, 2026
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पंचतंत्र की कहानियों में दोस्ती के सबसे खूबसूरत और सबसे दर्दनाक रंग मिलते हैं। एक सच्चा दोस्त वह होता है जो मुसीबत में आगे आए – और एक झूठा दोस्त वह जो अच्छे दिनों में साथ हो लेकिन बुरे वक्त में पीठ फेर ले। इस लेख में हम लाए हैं 7 ऐसी पंचतंत्र शैली की animal friendship stories in hindi जो बताती हैं कि सच्ची मित्रता क्या होती है, झूठी दोस्ती का अंत कैसा होता है, और बंदर और मगरमच्छ की अनोखी दोस्ती, कछुए को बचाने वाली लोमड़ी, अपना तालाब छोड़ पछताई तीन मछलियाँ – ये सभी कहानियाँ जीवन की सबसे जरूरी सीख देती हैं। तो पढ़ते हैं:

1. कछुआ, लोमड़ी और भेड़िया:

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किसी नदी के किनारे एक कछुआ और लोमड़ी रहते थे। दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। लोमड़ी प्रतिदिन दूर किसी जंगल से कछुए से मिलने आती थी। एक दिन कछुए ने कहा- “लोमड़ी बहन तुम प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर मुझसे मिलने आती हो, कभी अगर आपके ऊपर किसी भेड़िए की नजर पड़ गई तो अनर्थ हो जाएगा। क्यों न यहीं अपने रहने के लिए एक गुफा बना लो।

लोमड़ी को अपने दोस्त की बात बहुत पसंद आई। लोमड़ी रहने के लिए उसी नदी के किनारे एक गुफा की खोज कर ली। एक दिन नदी के किनारे लोमड़ी और कछुआ बैठे बात कर रहे थे। अचानक लोमड़ी की नजर एक भेड़िए के ऊपर पड़ी। लोमड़ी तुरंत अपनी गुफा में छिप गई। जबकि कछुआ अपनी धीमी चाल के कारण पानी में नहीं जा पाया।

भेड़िए ने कछुए को दबोच लिया। उसने उसकी खोल पर कई बार वार किए। लेकिन, कछुए की खोल मजबूत होने के कारण उसके ऊपर कोई असर नहीं पड़ा। लोमड़ी अपनी गुफा में छिपकर यह सब देख रही थी। लोमड़ी ने अपना दिमाग चलाई। वह कहती हैं- “भेड़िया भईया आप कछुए को इस तरह से पटक कर बाहर नहीं निकाल सकते।”

आप चाहो तो इसे तालाब के पानी में डाल दो। पानी में कछुए का खोल गल जाएगा, जिससे आप इसे आसानी से खा सकते हो। भेड़िए ने कछुए को पानी में डाल दिया। मौका पाते ही कछुआ पानी में तैर कर भाग गया।

नैतिक शिक्षा:

सच्चा मित्र वही होता हैं, जो मुश्किल वक्त में काम आए।

2. घनिष्ट मित्रता:

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एक तलाब के किनारे पेड़ पर एक कबूतर रहता था। उसी पेड़ के नीचे एक चींटी भी रहती थी। दोनों में घनिष्ट मित्रता थी। कबूतर दिन भर अपने खाने की तलाश में दूर-दूर घूम आता था। लेकिन चींटी उसी पेड़ पर चढ़ती और उतरती रहती थी। एक दिन कबूतर एक आम लेकर आया। वह अपने दोस्त चींटी के साथ मिल बाँटकर खाने लगा। दोनों आपस में बात करते हुए हँस रहे थे। तभी चींटी अचानक शांत हो गई।

उसे शांत देख कबूतर ने कहा, “क्या हुआ मेरे दोस्त? तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो। चींटी ने बड़े नम्र आवाज में कहा, “काश! मेरे भी पंख होते तो मैं भी तुम्हारी तरह उड़कर बाहर की दुनिया देख आती। लेकिन मेरा जीवन तो बस इन बिलों से लेकर इस पेड़ तक ही हैं। कबूतर चींटी की भावनाओं को समझ गया। उसने कहा, “चलो मैं तुम्हें दूर कही घूमा लाता हूँ।” कबूतर ने चींटी को अपने ऊपर बैठाकर दूर निकाल गया।

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कुछ दूर उड़ने के बाद उसे एक नदी दिखाई दिया। नदी के पास जंगल था। दोनों ने उस जंगल में रुकने के लिए सोचा। चींटी को नदी के किनारे उतार कर कबूतर इधर-उधर कुछ खाने की तलाश में लग गया। चींटी उस जंगल में पहुंचकर बहुत खुश थी। अचानक तूफान का झोंक आया। चींटी उस तूफान में उड़कर नदी के बीच में पहुच गई।

चींटी मदद के लिए अपने दोस्त कबूतर को आवाज लगाई। कबूतर नदी के ऊपर उड़ते हुए देखा कि उसका दोस्त मुश्किल में हैं। जोकि पानी के तेज बहाव में बहते हुए जा रही थी। उसने अपने दोस्त को बचाने के लिए एक पत्ता उठाकर लाया। उस पत्ते को चींटी के पास गिरा दिया। चींटी उस पत्ते पर चढ़ गई। धीरे-धीरे वह पत्ता नदी के एक किनारे लग गया। एक दिन वही कबूतर पेड़ पर बैठा था। तभी एक शिकारी आया उसने अपनी बंदूक का निशाना उस कबूतर के ऊपर लगा रहा था।

शिकारी को निशाना लगाते देख चींटी आई और उसके पैर में काट ली। जिससे उसका निशाना चूक गया और उसका दोस्त बच गया। इस तरह से कबूतर और चींटी ने एक दूसरे की मदद की।

नैतिक सीख:

मुश्किल परिस्थितियों में साथ देने वाला व्यक्ति ही सच्चा दोस्त कहलाता हैं।

3. बड़ों की बातों को अनदेखा न करें:

किसी जंगल में एक बकरी अपने बच्चे गोलू के साथ रहती थी। गोलू बहुत शरारती था। उसे सारा दिन बाहर खेलना अच्छा लगता था। एक दिन वह खेलते-खेलते जंगल की ओर निकल गया। बकरी ने गोलू को बाहर नहीं देखी तो वह परेशान हो गई। वह तेजी से जंगल की तरफ भागी।

उसे डर था कि गोलू कहीं घने जंगल में न चला जाए। क्योंकि, वहाँ हर वक्त जंगली जानवर शिकार की तलाश में घूमते रहते थे। तभी गोलू की नजर उसकी माँ पर पड़ी। गोलू कहता हैं- माँ, माँ आपने मुझे खोज ही लिया। जब बकरी उसके पास गई तो देखा कि गोलू एक पेड़ के पास छिपा हुआ था।

गोलू अपनी माँ को पास देखकर खुशी से उछल पड़ा। उसकी माँ उसे गुस्से से फटकार लगाते हुए बोली- “गोलू! तुम्हें कितनी बार मना किया हैं कि इस तरफ मत आया करो। लेकिन, तुम हो कि समझते नहीं हो। किसी दिन तुम खुद मुसीबत में फँसोगे और मुझे भी फंसा दोगे।

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लेकिन, शरारती गोलू को चैन कहाँ। वह अगले ही दिन अपनी माँ को सोते देख फिर से उसी घने जंगल की तरफ निकल पड़ा। गोलू ने जैसे ही जंगल में प्रवेश किया ही था कि एक भेड़िए की नजर उसके ऊपर पड़ गई। उसके लिए मानो आज का भोजन हो गया और उसके मुंह से पानी टपकने लगा।

वह गोलू को अकेला देखकर झट से उसके पास पहुँचा। गोलू ने जैसे ही भेड़िए को अपने पास आते देखा। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी माँ अपने दोस्त जंगली कुत्ते को अपने साथ लेकर उसके पास पहुँची। इतने में शिकारी कुत्ता तेजी से भेड़िए की तरफ छलांग लगाते हुए उसके पीछे पड़ गया और उसे जंगल से भगा दिया। गोलू, भेड़िए को देखकर सहम गया था। उसने अपनी माँ से वादा किया कि वह बिना बताए अकेले कही नहीं जाएगा।

नैतिक शिक्षा:

हमें अपने बड़े बुजुर्गों की बात माननी चाहिए।

4. चापलूस बंदर

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चिंटू नाम का एक बंदर था। वह जंगल के राजा शेर सिंह के पास रहता था। राजा शेर सिंह उसे अपने दरबार का मंत्री बना रखा था। वह राजा के खाने-पीने का इंतजाम करता था। उसकी चापलूसी से राजा शेर सिंह अच्छे से वाकिफ था। एक दिन राजा के खाने का भोजन नहीं था। चिंटू बंदर उछलते-कूदते जंगल को निकल गया।

उसने एक बकरी को बहला-फुसला कर राजा शेर सिंह के गुफा तक लेकर आया। राजा शेर सिंह की नजर एकाएक उस बकरी पर पड़ी उसने उसे मारकर खा गया। राजा चिंटू बंदर के ऊपर बहुत खुश हुआ। उसने और कई सारे कार्य-भार चिंटू बंदर को सौप दिया। चिंटू बंदर अपने आपको कामों में व्यस्त रहने लगा। एक दिन राजा शेर सिंह के खाने की व्यवस्था नहीं हुई।

चिंटू बंदर को पता चला कि राजा शेर सिंह के खाने के लिए कुछ नहीं हैं। वह भागते हुए जंगल मे जा पहुँचा। लेकिन इस बार उसके साथ कोई आने को तैयार नहीं हुआ। क्योंकि उसकी चापलूसी जंगल के सभी जानवरों को पता चल चुकी थी। राजा शेर सिंह की भूख बढ़ती ही जा रही थी। उधर चिंटू बंदर खाली हाथ जंगल से वापस आया। उसे देख राजा शेर सिंह क्रोधित हो उठा। वह चिंटू बंदर के ऊपर टूट पड़ा और उसे मारकर खा गया।

नैतिक सीख:

चापलूस व्यक्ति एक दिन धोखा जरूर खाता हैं।

5. बिल्ली और कुत्ते की कहानी:

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सोहन नाम का एक धोबी था। उसने एक कुत्ता और एक बिल्ली पाल रखा था। दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी। एक बार बिल्ली बिना वजह कई दिनों से म्याऊं-म्याऊं की आवाज निकाले जा रही थी। जिसके कारण धोबी सो नहीं पा रहा था। उसने पता किया कि बिल्ली को कोई दिक्कत तो नहीं हैं। लेकिन, उसे कोई कारण नहीं मिला।

एक दिन धोबी बहुत थका-हारा घर आया और जल्दी खाना खा कर सो गया। कुछ समय बाद बिल्ली फिर जोर-जोर से म्याऊं-म्याऊं की आवाज निकालने लगी। धोबी गुस्से से भरा हुआ उठा और उसने डंडे से बिल्ली को यह कहते हुए पीटने लगा कि दिन-रात म्याऊं-म्याऊं करती रहती हैं। इससे शांत बैठे नहीं जा रहा।

उसकी पिटाई को देख वहीं बैठा कुत्ता सोचने लगा शांत रहने में ही भलाई हैं। उसी रात चोर को घर में जाते देख कुत्ता नहीं भौंका। जिसके कारण धोबी के घर में चोरी हो गई। सुबह उठ कर धोबी ने कुत्ते की पिटाई करते हुए कहा- “तुम्हें किस लिए पाल रखा हैं।” हमारे घर में चोरी हो गई और तुम मौन बैठे रहे।

उस कुत्ते ने सोचा कल शोर मचाने के लिए बिल्ली की पिटाई हो गई। और आज शोर न मचाने के लिए मेरी पिटाई हो गई। अब कुत्ता बहुत चिंतित होकर सोचने लगा कि “शांत रहना अच्छा हैं, या बोलना? इसलिए, कहा जाता हैं कि बिना सोचे समझे निर्णय लेना दिशाहीन व्यक्ति की निशानी होती हैं। जिसे आए दिन पछतावा ही मिलता हैं।

नैतिक सीख:

जल्दबाजी में किसी के अनुसार निर्णय लेना खतरनाक साबित हो सकता हैं।

6. बंदर और मगरमच्छ कि दोस्ती:

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किसी नदी किनारे एक बंदर और मगरमच्छ रहते थे। दोनों में अच्छी दोस्ती थी। बंदर मगरमच्छ को मीठे-मीठे फल खिलाता था। जबकि, मगरमच्छ बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर सैर कराता था। दोनों खूब मस्ती करते थे। वे हमेशा खुश रहते थे। एक बार बारिश न होने की वजह से वह नदी सूख गई। अब मगरमच्छ का पानी के बिना रहना मुश्किल हो रहा था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें?

एक दिन मगरमच्छ नदी के किनारे मायूस बैठा था। तभी उसका दोस्त बंदर उछलता-कूदता हुआ उसके पास आया। उसने पूछा, “मेरे दोस्त आज तुम बहुत उदास लग रहे हो क्या बात हैं? मगरमच्छ ने अपनी उदासी का कारण बंदर से बात दिया। बंदर ने कहा, “दोस्त! उदास मत हो, मैं कुछ न कुछ जतन करता हूँ। इतना कहकर बंदर वहाँ से चला गया।

उसने पूरे दिन अपने दोस्त के लिए नदी की तलास की। आखिरकार उसे एक ऐसा नदी मिल गया जिसमें बहुत पानी था। अगले दिन वह भागते हुए अपने दोस्त मगमच्छ के पास आया। उसने कहा, “दोस्त मैंने तुम्हारी समस्या हल निकाल लिया।” मैं एक ऐसा नदी देखकर आया हूँ। जिसमें बहुत सारा पानी हैं। बंदर ने अपने दोस्त को उस नदी में ले गया। वहाँ पहुंचकर उसके खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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वह तुरंत बिना कुछ बोले नदी में चला गया। बंदर ने सोचा मैं अपने दोस्त को यहाँ पर ले आया हूँ। वह मेरी तारीफ करेगा मुझे अपनी पीठ पर बैठकर नदी का सैर करवाएगा। लेकिन वह बिना कुछ बोले नदी में चला गया। बंदर ने सोचा कोई बात नहीं मगरमच्छ के लिए यह नई जगह हैं। कल इसके ऊपर बैठकर घूम लूँगा। मगरमच्छ इतना खुश था की वह नदी के अन्य जीव जन्तुओ से दोस्ती करना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे वह अपने दोस्त बंदर को भूलता जा रहा था। बंदर कई दिनों से नदी के किनारे अपने दोस्त मगरमच्छ का इंतजार करता रहा। लेकिन मगरमच्छ उससे मिलने नहीं आया। बंदर बहुत चिंतित रहने लगा। एक दिन वह उदास होकर नदी के किनारे बैठा था। तभी उस नदी से एक मगरमच्छ बाहर आया। उसने बंदर की उदासी का कारण पूछा। बंदर ने अपने दोस्त मगरमच्छ की सारी कहानी सुना दी।

उसकी बातों को सुनकर मगरमच्छ ने बंदर से कहा, “क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे? मैं तुम्हें तुम्हारे दोस्त की तरह पूरे नदी में सैर कराऊँगा।” बंदर ने उस मगरमच्छ से दोस्ती कर ली। उसने अपनी पीठ पर बंदर को बैठाकर नदी में सैर कराने के लिए चल दिया। बीच नदी में बंदर को उसका पुराना दोस्त मिला। उसने बंदर को देख अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया।

बंदर और उसके नए दोस्त को कोई फर्क नहीं पड़ा। दोनों की दोस्ती एक मिसाल बनती जा रही थी। दोनों हमेशा एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल रहते थे। एक बार इस नदी में भी सूखा पड़ गया। बंदर ने अपने दोस्त को लेकर किसी और नदी में चला गया। अब दोनों उस नदी में आराम से रहने लगे थे। जबकि बंदर का पुराना दोस्त उसी सूखी नदी के पास रहता था।

एक दिन बंदर उसी नदी के पास से अपने दोस्त के लिए कुछ फल लेकर जा रहा था। तभी उसकी मुलाकात उसके पुराने दोस्त मगरमच्छ से हो गई। मगरमच्छ उसके सामने गिड़गिड़ाने लगा कि उसे भी पानी वाले नदी में लेकर चले। लेकिन, बंदर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि तुम जैसे दोस्त विश्वास के लायक नहीं होते जो अपना दिन बदलते देख अपने दोस्त को भूल जाते हैं।

नैतिक सीख:

मुश्किल समय में साथ देने वाले दोस्त को भूलना नहीं चाहिए।

7. अपना घर सबसे प्यारा:

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किसी तालाब में तीन मछलियाँ रहती थी। उन तीनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। वे हमेशा एक साथ खाने की खोज में जाती और उन्हें जो भी मिलता उसे मिल बाँटकर खाती थी। एक दिन दोपहर के समय तीनों मछलियाँ आराम कर रही थी। तीसरी मछली ने कहा- “मैं तालाब के किनारे-किनारे चक्कर लगाने जा रही हूँ।”

उसे तालाब के किनारे एक मेंढ़क दिखाई दिया। जोकि एक पत्थर पर बैठ कर टर्र-टर्र कर रहा था। मछली ने कहा- “आप पूरे दिन टर्र-टर्र करते रहते हो थकते नहीं क्या?” मेंढ़क गुस्से भरे स्वर में बोला- “मैं क्यों थकूँगा, मुझे तो टर्र-टर्र करना अच्छा लगता हैं। वैसे तुम एक बात बताओ तुम पूरी उम्र एक ही तालाब में रहते-रहते बोर नहीं होती?”

मुझे देखो मैं कभी एक तालाब से दूसरे तालाब में तो कभी समुद्र तक भी घूम आता हूँ। मुझसे पूँछों यह दुनिया कितनी बड़ी हैं। तुमने तो इस दुनिया में सिर्फ एक ही तालाब देखा हैं। मेंढ़क की बातों को सुनकर मछली उदास होकर और आगे चली गई। तभी वह एक जामुन के पेड़ के पास पहुँची।

उस पेड़ पर एक बंदर बैठा था। बंदर मामा क्या आप मुझे भी जामुन खिलाओगे? बंदर ने मछली को ताना मारते हुए कहा – “तुम लोगों का जीवन बेकार हैं। तुम लोग बस एक ही तालाब में इधर उधर भटकती रहती हो।” मुझे देखो, मैं दिन भर इधर उधर छलांग लगाता रहता हूँ। मैं प्रतिदिन खाने के लिए नई-नई चीजें खोजता हूँ। तुम लोग अपने लिए कोई नया घर क्यों नहीं खोज लेते।

मछली बंदर की बातों में आ गई। उसने उस तालाब को छोड़ने के लिए मन बना लिया। वह मुँह लटकाए हुए अपने दोनों दोस्तों के पास पहुँची। उसे उदास देख दोनों मछलियों ने उसकी उदासी का कारण जानना चाहा। वह मछली अपने दोनों दोस्तों से कहती हैं – “हम लोग एक तालाब में ही सीमित होकर मर जाएंगे। क्या हम लोगों को पता हैं।” इस दुनिया के बाहर भी बड़ी दुनिया हैं।

उसके दोस्त भी उस मछली के कहने पर आ गए। तीनों उस तालाब को छोड़कर एक नदी में आकर बहुत खुश हो गए। तभी, उन तीनों को एक मगरमच्छ खाने के लिए उनके पीछे पड़ गया। बड़ी मुश्किल से जान बचाते हुए तीनों एक समुद्र में जा पहुंचे। अब वे तीनों वहाँ बहुत खुश थे।

कुछ दिन बाद उन तीनों के पीछे एक बड़ी मछली पड़ गई। किसी तरह से तीनों अपनी-अपनी जान बचाकर अपने पुराने तालाब में आ गई। अब उस तालाब में तीनों आराम से रहने लगी। उन्हे पता चल गया था कि अपना घर सबसे प्यारा होता हैं।

कहानी से सीख:

किसी को देखकर या फिर किसी के कहने पर आकर लिया गया फैसला हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं।

इन कहानियों से मिलने वाली सीख:

इन 7 पंचतंत्र शैली की sachi dosti ki kahani in hindi से यह बात बिल्कुल स्पष्ट होती है – असली दोस्त वह होता है जो मुश्किल में भी बुद्धि और साहस से साथ खड़ा हो। चाहे वह कछुए की जान बचाने वाली लोमड़ी हो, नदी में डूबती चींटी को बचाने वाला कबूतर हो, या सूखे में दोस्त मगरमच्छ के लिए नई नदी खोजने वाला बंदर – सच्ची दोस्ती के ये उदाहरण हमेशा दिल में बसे रहते हैं। इसके साथ ही तीन मछलियों की कहानी याद दिलाती है – जो हमारे पास है, जो हमारा अपना है, वही सबसे सुरक्षित और सबसे कीमती है। अपने घर, अपने बड़ों और अपने सच्चे दोस्तों की कद्र करें।

🙋‍♂️ FAQs – Sachi Dosti ki Kahani in Hindi

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