कभी-कभी सबसे बड़ी सीख सबसे छोटी कहानी में छुपी होती है। यहां पढ़िए laghu kathayen with moral in Hindi का यह संग्रह — 9 ऐसी छोटी-छोटी लघु कथाएं जो जानवरों और पेड़-पौधों के किरदारों के जरिए इंसानी स्वभाव पर गहरी चोट करती हैं। घमंड, लालच, दिखावा, और भरोसे जैसे विषयों पर आधारित ये कहानियां सिर्फ कुछ पंक्तियों में खत्म हो जाती हैं, लेकिन इनकी सीख जिंदगी भर काम आती है।
1. मेंढ़क और बैल:
किसी तालाब में एक बातूनी मेंढ़क रहता था। वह मेंढ़क हर बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बोलता था। एक दिन उस तालाब में एक भैंस नहाने के लिए आई। भैंस के पानी में बैठने के कारण उसके पैर से कई सारे मेंढ़क दबकर मर गए। बातूनी मेंढ़क भैंस को तालाब में बैठते हुए देखा था। अगले दिन सभी मेंढ़क इकट्ठा हुए।
बातूनी मेंढ़क ने भरी सभा में सभी को बता रहा था कि कल एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में आया जिससे दबकर हमारे कई दोस्त मर गए। मेंढ़को के सरदार ने पूछा- “वह जानवर कितना बड़ा था। बातूनी मेंढ़क ने अपने पेट फूलते हुए कहा इतना बड़ा था। मुखिया जी ने कहा बस इतना बड़ा था।
बातूनी मेंढक ने कहा नहीं… नहीं उसने अपना पेट और बड़ा फुलाया। मुखिया जी फिर से पूछा से बस इतना बड़ा था। बातूनी मेंढक ने कहा नहीं… नहीं… उसने अपनी क्षमता से ज्यादा पेट फुला दिया जिससे उसका पेट फट गया।
कहानी से सीख:
असंभव को करने का प्रयास न करें।
2. भेड़िया और सारस:
एक बार एक भेड़िया बहुत भूखा था। वह खाने कि खोज में इधर-उधर भटक रहा था। उसे जंगल में एक मरा हुआ जानवर दिखाई दिया। उसने बिना कुछ सोचे समझे उस जानवर को जल्दी-जल्दी खाने लगा। अचानक से एक हड्डी उसके गले में फँस गई। उसने हड्डी को निकालने की बहुत कोशिश की लेकिन निकाल नहीं सका। वह गले के दर्द से कराह रहा था। तभी उसके दिमाग में ख्याल आया कि इस हड्डी को सारस अपनी लंबी चोंच से निकाल सकती हैं।
भेड़िया भागते हुए सारस के पास गया। उसने कहा- “सारस बहन मेरे गले में हड्डी फँस गई हो। कृपया अपनी लंबी चोंच मेरे मुंह में डालकर हड्डी निकाल दो मैं आपका ऐहसान कभी नहीं भूलूँगा। सारस ने कहा, “भेड़िया भाई, मेरी गर्दन अपने मुहँ में देख दबोच लिए तो।” भेड़िया ने कहा- “नहीं सारस बहन मेरी तो हालत वैसे ही खराब हुई हैं। मैं ऐसा नहीं करूंगा।
सारस को भेड़िया की हालत देख दया आ गई। उसने अपनी चोंच भेड़िए के गले में डालकर हड्डी निकाल दिया। अपने मुंह में सारस कि गर्दन देख भेड़िए को लालच आ गया। उसने दुबारा से कहा- “बहन एक छोटी हड्डी और मेरे गले में फंसी लग रही हैं। कृपया एक बार दुबारा से देख लो। मौका पाते हैं भेड़िए ने सारस का गर्दन अपने जबड़े में दबा लिया और उसने सारस को मार डाला।
कहानी से सीख:
अपने दुश्मन पर अंखे बंद करके विश्वास करना खतरनाक साबित हो सकता हैं।
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3. बारिश और पेड़:
जतिन बहुत होशियार बच्चा था। क्योंकि वह हमेशा अपने मम्मी-पापा और दादा-दादी कि बातों को मानता था। वह अक्सर अपने दादा के साथ अपना समय बीतता था। उसके दादा उसे अनेकों तरह की जानकारियाँ देते थे। एक दिन जतिन और कई सारे बच्चे स्कूल से वापस अपने घर को आ रहे थे।
अचानक तेज आंधी-तूफान और गरज के साथ बारिश शुरू हो गई। कुछ बच्चे बारिश से बचने के लिए सड़क के किनारे लगे पेड़ के नीचे खड़े हो गए। जतिन ने तेज आवाज में बच्चों से कहा, “हमें बारिश में पेड़ के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए।” क्योंकि बिजली गिरने का डर रहता हैं। बच्चे जतिन कि बात मानकर पेड़ के नीचे से दूर हट गए। तभी तेज गरज के साथ बिजली गिरी पेड़ टूटकर नीचे गिर गया। दूर खड़े सभी बच्चे यह नजारा देख रहे थे। उन्होंने जतिन का आभार व्यक्त किया।
कहानी से सीख:
हमें अपने बड़ों बुजुर्गों से बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं।
4. पेड़ और राही:
तपती गर्मी का मौसम था। दो राही कही जा रहे थे। दोनों कुछ समय के लिए विश्राम करना चाहते थे। लेकिन उन्हें दूर-दूर तक कोई पेड़ पौधे नजर नहीं आ रहे थे। थोड़ी दूर और आगे चलने पर उन्हें एक विशाल चिनार का पेड़ दिखाई दिया। राही उस पेड़ कि शीतल छाया में लेट गए। वहाँ पर उन्हें ठंडी-ठंडी हवा और छाया मिल रही थी।
उस पेड़ से कुछ पत्ते टूट-टूटकर नीचे गिर रहे थे। उनमें से एक ने कहा, “यह पेड़ कितना बेकार हैं। यह सिर्फ जमीन पर पत्ते बिखेरना जनता हैं।” इस पेड़ में कोई फल भी नहीं लगता। तभी उस पेड़ से आवाज आई- “मूर्ख इंसान मेरी शीतल छाया में लेटे हुए हो। और मेरे ही अंदर कमियाँ निकाल रहे हो। तुम्हें यह नहीं दिखाई दे रहा कि मैं किसी भी तरह से तुम्हारे काम आ रहा हूँ।
कहानी से सीख:
हमें कमियों पर नहीं अच्छियों पर ध्यान देना चाहिए।
5. उल्लू और टिड्डा:
बसंत का मौसम था। किसी जंगल में एक पेड़ पर एक उल्लू रहता था। वह पेड़ के कटोरे में सो रहा था। क्योंकि, उल्लू अपना शिकार रात में करते हैं। दिन में अपने घर में रहते हैं। जिसका मुख्य कारण दिन में उन्हें दिखाई नहीं देता। अचानक से उसी पेड़ के नीचे एक टिड्डा आकर कर्कस आवाज में गाना गाने लगा। जिसके कारण उल्लू कि नीद खुल गई। उसने कहा- “तुम मुझे सोने दो यहाँ से कही और चले जाओ।”
टिड्डा और जोर-जोर कि आवाज में गाना गाने लगा। उल्लू मजबूर था उसे दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था। जिससे कि वह टिड्डे पर हमला कर सके। उसने दिमाग लगाया। उसने कहा, “तुमने मुझे जगा ही दिया हैं तो मेरे घोंसले के पास आकार गाना सुनाओ। जिससे मैं तुम्हारे गाने का आनंद उठा सकूँ। टिड्डा उसके घोंसले के पास आकार गाना गाने लगा। उल्लू मौका पाते ही उसके ऊपर झपट पड़ा और उसे मार डाला।
कहानी से सीख:
शांत दिमाग से बड़ी सी बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता हैं।
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6. बगुला और मछली:
किसी तालाब में एक बगुला शिकार करने के लिए आया। बगुला बहुत मूर्ख था। उसे थोड़े में संतोष नहीं होता था। वह बहुत भूखा था। तभी उसे एक सुनहरी मछली दिखाई दी। बगुले को देखकर वह मछली भागने लगी। बगुले ने कहा, ” तुम मेरे लिए मामूली भोजन हो। मैं तुम्हें नहीं खा सकता। देखते-देखते बगुले के पास कई सारी मछलियाँ आ गई। लेकिन बगुला उन मछलियों को नुकसान नहीं पहुँचा रहा था।
बगुला सोच रहा था कि कुछ और मछलियाँ आ जाए तो मैं सभी को एक साथ खा जाऊंगा। इस बात कि खबर मछलियों के मुखिया को चल गई। उनसे सभी मछलियों को सचेत कर दिया। सभी मछलियाँ नीचे गहरे पानी में चली गई। बगुले को कुछ नहीं मिला। अंत में बगुले को केकड़ा खाकर संतोष करना पड़ा।
कहानी से सीख:
बूंद-बूंद से घड़ा भरता हैं। इसलिए बड़े के चक्कर में छोटी चीजों को भुलाया नहीं जा सकता।
7. बारहसिंघा और परछाई:
नदी के किनारे एक बारहसिंघा पानी पी रहा था। तभी उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी। बारहसिंघा अपनी सींगों को देखकर बहुत खुश हुआ। उसे ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो उसके सिर पर मुकुट लगे हो। तभी उसका ध्यान उसके पैरों पर गया। जिसे देख वह बहुत मायूस हुआ। उसने भगवान को कोसते हुए कहा- “भगवान, मेरे सिर पर सींग मुकुट जैसा दिए हो। लेकिन पैर मुझे बकरियों जैसा दिए हो। यह मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय हैं।
तभी उसने देखा कि एक शेर उसके पीछे आ रहा था। वह तेजी भागना शुरू कर दिया। लेकिन जंगल के एक झाड़ी में फँस गया। इतने में शेर उसे पकड़ लिया। अब उसे पछतावा होने लगा कि जिस पैर से उसे नफरत हो रही थी। वह पैर उसकी जान बचा सकती थी। लेकिन उसके मुकुट जैसे सींग ने उसे फंसा दिया।
कहानी से सीख:
हमें दिखावे कि तरफ नहीं जाना चाहिए।
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8. मुर्गा और लोमड़ी:
एक मुर्गा रास्ता भटककर किसी दूसरे जंगल में पहुँच गया। वह एक पेड़ पर बैठकर जोर से बाग लगाने लगा। उसकी आवाज सुन एक लोमड़ी उसकी तरफ भागी-भागी दौड़ी चली आई। वह पेड़ के नीचे खड़ी होकर कहने लगी। आपका हमारे इस जंगल में स्वागत हैं। क्या आपको पता हैं हमारे इस जंगल में कोई किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता।
सभी एक साथ मिलजुलकर रहते हैं। मुझे तुम किसी दूसरे जंगल के पक्षी लगते हो। इस जंगल में तुम मेरे मेहमान जैसे लग रहे हो। नीचे आओ मैं तुम्हें अपने गले से लगाना चाहती हूँ। तभी मुर्गा अपना सिर ऊपर उठाकर दूर देख रहा होता हैं। लोमड़ी ने पूछा दूर क्या देख रहे हो। मुर्गे ने कहा, “दूर तीन जंगली कुत्ते इसी तरफ चले आ रहे हैं।”
लोमड़ी बोली कोई बात नहीं वह चुपचाप वहाँ से जाने लगी। मुर्गे ने कहा, “अरे तुम कहाँ जा रही हो? अभी तो तुम कह रही थी कि इस जंगल में सब मिलजुलकर रहते हैं। लोमड़ी ने कहा शायद इस बात कि खबर को अभी कुत्तों तक नहीं पहुंची हुई हैं। इतना कहकर लोमड़ी तेजी से वहाँ से भाग निकली।
कहानी से सीख:
छल करने वाला व्यक्ति कि सच्चाई बहुत जल्द पकड़ी जाती हैं।
9. मेंढ़क और चूहा:
किसी तालाब के एक शरारती मेंढ़क रहता था। उसी तालाब के किनारे एक चूहा बिल में रहता था। कभी-कभी चूहा और मेंढक की मुलाकात तालाब के किनारे हो जाती थी। एक दिन मेंढ़क को शरारत सूझी उसने मेंढक से कहा- “चलो तुम्हें मैं इस तालाब में घूमा लाऊं।” चूहे ने कहा- “मुझे पानी से डर लगता हैं। और मुझे तैरना भी नहीं आता। मेंढक अपनी मीठी-मीठी बातों से चूहे को तालाब घुमाने के लिए राजी कर लिया।
मेंढ़क चूहे की पूँछ अपने पैर से बांध कर तालाब में कूद गया। और तैरते हुए बीच तालाब में चला गया। वह चूहे को पानी सिर्फ घसीट रहा था। चूहा बार-बार चिल्ला रहा था कि उसे बाहर निकाल दो। लेकिन मेंढ़क उसकी बातों को नहीं सुना। इस तरह से नदी में ही चूहे कि मौत हो गई।
कुछ समय बाद मेंढ़क तालाब के किनारे आया। वह चूहे को देखकर खी…खी… करके हँस रहा था। तभी आसमान में उड़ते हुए एक चील ने देखा कि नीचे एक मरा हुआ चूहा पड़ा था। वह उसे अपने पंजे में दबकर आसमान में उड़ गया। मेंढ़क के पैर मे रस्सी बंधी होने के कारण वह भी चूहे के साथ चील का शिकार बन गया।
कहानी से सीख:
जो जैसा करता हैं उसे वैसा मिलता हैं।
🙋♂️ FAQs – शिक्षाप्रद छोटी लघु कथाएं
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.
