तेनालीराम की 3 प्रसिद्ध कहानियाँ – जब बुद्धि से सुलझाई बड़ी से बड़ी समस्या

📅 Published on June 16, 2026
🔄 Updated on June 14, 2026
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कहते हैं कि बड़ी समस्या के लिए बड़ी ताकत नहीं, बड़ी बुद्धि चाहिए होती है। तेनालीराम ने यह बात बार-बार साबित की। गाँव में आए शेर को पकड़ना हो, धोखेबाज बहेलिए का पर्दाफाश करना हो, या चोरों को बिना शोर मचाए सबक सिखाना हो – तेनालीराम के पास हर समस्या का एक अनोखा हल था। आज पढ़ें उनकी 3 ऐसी कहानियाँ जो साबित करती हैं कि बुद्धि ही असली हथियार है।

1. शेर पकड़ा गया:

एक बार राजा के दरबार में किसी उत्सव की तैयारियाँ चल रही थी। जिसके कारण तेनालीराम के ऊपर समारोह की देखभाल की अधिक जिम्मेदारियाँ थी। इसलिए, उन्हें अपने घर गए हुए कई दिन बीत चुके थे। तेनालीराम एक दिन राजा के दरबार से समारोह खत्म करके अपने घर गए। घर पहुंचकर उन्हें पता चला कि उनके गाँव में किसी जंगल से भटकता हुआ एक शेर आ गया हैं। जोकि, गाँव के कई लोगों को अपना शिकार बना चुका हैं। उसकी दहशत पूरे गाँव में फैल चुकी थी।

जिसके कारण लोगों का अपने घर से बहार निकल पाना मुश्किल हो गया था। शेर को आसानी से अपना शिकार मिल जाता था। इसलिए, वह प्रतिदिन गाँव में शिकार करके जंगल की झाड़ियों में छिप जाता था। गाँव के लोग बड़ी हिम्मत करके तेनालीराम के पास गए। उन्हें शेर की घटना के बारें में बताते हुए कहा, ‘तेनाली’ तुम ही हम लोगों को शेर के आतंक से बचा सकते हो।

तेनालीराम, गाँव वालों से कहा- इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? कुछ दिन बाद जब मैं राजा के दरबार में जाऊंगा तो शेर को पकड़ने वाले शिकारियों को भेज दूंगा। तेनालीराम की बातों को सुनकर एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने ऊँचे स्वर में कहा, “गाँव वालों तेनालीराम का दिमाग सिर्फ राजा के महल के अंदर चलता हैं। इसीलिए, तेनालीराम जब राजा के दरबार में जाएंगे तो वह हम लोगों के बचने का उपाय बताएंगे। तब तक आप लोग शेर का शिकार होने का इंतजार करो। तेनालीराम को उस बुजुर्ग व्यक्ति का व्यंग कटाक्ष अच्छा नहीं लगा।

कुछ देर शांत रहने के बाद तेनालीराम गाँव के लोगों को अपने साथ मजबूत जाल, डंडा, फावड़ा और रस्सी लेकर चलने के लिए कहा। जंगल के पास पहुंचकर तेनालीराम ने जंगल से गाँव आने वाले रास्ते पर शेर के पदचिन्ह के आधार पर बीच रास्ते में एक बड़ा गड्ढा खोदने और गड्ढे को घास-फूस से हल्का ढकने के लिए भी कहा। इसके बाद उसी गड्ढे पर जाल को बिछवा दिया।

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गड्ढे से थोड़ी दूर आगे एक बकरी को भी बँधवा दिया। सभी लोग जाल की रस्सी को अच्छे से पकड़कर छिप गए। जैसे ही बकरी मिमियाना शुरू की। शेर उस तरफ तेजी से भागते हुए आया। बकरी अपनी तरफ शेर को आते देख सहम गई और मे..मे… करने लगी। जैसे ही शेर का पैर गड्ढे में पड़ा गाँव के लोगों ने तेजी से रस्सी खींच ली। जिससे शेर गड्ढे में जाल के अंदर फँस गया।

गाँव के लोग शेर को जाल में फंसा देख खुशी से झूम उठे। अगले दिन तेनालीराम ने राजा के दरबार में पहुंचकर अपने गाँव की घटना को सुनाया। राजा ने तेनालीराम की बुद्धिमानी और बहादुरी के लिए बहुत सराहा। राजा के आदेश पर शिकारी शेर को पकड़कर दूर जंगल में छुड़वा दिए। इस तरह से तेनालीराम को एक बार फिर अपने गाँव में बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाना लगा।

कहानी से सीख:

चतुराई और बुद्धिमानी के बल पर बड़ी सी बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता हैं।

2. राजा और बहेलिया (रंगा हुआ पक्षी):

राजा कृष्णदेव राय को पशु-पक्षियों से बहुत लगाव था। एक दिन शाम का समय था राजा अपने उपवन में टहल रहे थे। अचानक राजा को एक बहेलिया उनकी तरफ आते हुए दिखाई दिया। पास आकर बहेलिए ने राजा को एक पक्षी दिखाते हुए कहा- “महाराज की जय हो! आज मैंने किसी दूसरे राज्य से आया हुआ एक सुंदर और रंगीन पक्षी पकड़ा हैं।”

जिसकी कोयल की तरह मीठी आवाज हैं, तोते के समान बोलता हैं, और मोर की तरह रंग-बिरंगा और नाचना जानता हैं। बहेलिए ने राजा को उस पक्षी के बारें में और कई खूबियाँ बढ़ा चढ़ा कर गिनवाई। दरबार में बैठे तेनालीराम भी बार-बार पक्षी के पिंजरे और बहेलिए की तरफ देखे जा रहे थे। राजा बहेलिए से पक्षी का पिंजरा लेकर उसे चारों तरफ से देखा।

रंग-बिरंगा पक्षी राजा को बहुत पसंद आया। राजा उस पक्षी के लिए बहेलिए को मुँह माँगा दाम देने के लिए तैयार हो गया। राजा बहेलिए के कहे अनुसार पक्षी के बदले में 100 सोने के सिक्के दिया। बहेलिए को आदेश दिया कि वह उस पिंजरे को हमारे विश्राम कक्ष के सामने टांग दे।

तभी तेनालीराम, राजा से क्षमा मांगते हुए कहता हैं, “महाराज जब दो लोग आपस में बात कर रहे हो तो तीसरे को नहीं बोलना चाहिए” लेकिन, आपके दरबार का मंत्री होने के नाते मैं आपसे कुछ कहना चाहता हैं। राजा कहते हैं, इजाजत हैं तेनाली! तुम अपनी बात कहो। तेनालीराम ने कहा, “महाराज! जैसा की मैंने इस बहेलिए की बात सुनी कि यह पक्षी सबसे अच्छा पक्षी हैं।

जोकि, कोयल की तरह मीठी आवाज निकालता हैं, तोते की तरह बात भी कर सकता हैं और मोर की तरह रंग-बिरंगा और बरसात में नाच भी सकता हैं। लेकिन, मुझे लग रहा हैं कि यह बहेलिया इस पक्षी का ध्यान सही से नहीं रखता था। जिसके कारण मुझे लगता हैं कि इस पक्षी को नहाए लगभग वर्षों हो गया होगा।

तेनालीराम की बातों को सुनकर बहेलिया हड़बड़ा गया। और अपनी दबी आवाज में राजा से कहा, “महाराज! मैं बहेलिया हूँ, पक्षियाँ मेरे जीवन यापन करने का मात्र एक ही साधन हैं। पक्षियों को पकड़ना और उन्हें बेचना, जिससे मुझे कुछ पैसे मिल जाते हैं। और मुझे अच्छे से पता हैं कि पक्षियों का रख-रखाव कैसे करना चाहिए। आपके मंत्री तेनालीराम इस तरह से मुझ पर इल्जाम लगाकर मुझे झूठा साबित करना चाहते हैं।

राजा बहेलिए की बातों पर विश्वास कर लिया। वह तेनालीराम से कहता हैं कि इस तरह से किसी के ऊपर इल्जाम लगाना गलत बात हैं। तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए। क्या तुम अपनी बात को सही सिद्ध कर सकते हो? तेनालीराम राजा से कहता हैं, हाँ महाराज! अगर आपकी इजाजत हो तो मैं अपनी बात को सही साबित करके दिखा सकता हूँ।

राजा तेनालीराम को इजाजत देते हैं, वह भरी दरबार में तुरंत एक लोटा पानी पिंजरे के ऊपर से उस पक्षी पर गिराता हैं। वहाँ बैठे लोग देखते हैं कि पिंजरे के बाहर से रंगीन पानी निकल रहा हैं। पानी से भीगने के कारण उस पक्षी का रंग भूरा हो गया था। वहाँ बैठे सभी लोग तेनालीराम की बुद्धिमानी देख आश्चर्यचकित हो उठे।

तेनालीराम ने राजा से कहा- “महाराज! यह कोई अनोखा पक्षी नहीं हैं। बल्कि यह एक जंगली तितर हैं।” राजा तेनालीराम से आगे पूंछता हैं कि तुमने इस पक्षी के बारे में कैसे पता लगाया की यह एक तितर हैं। तेनालीराम ने राजा से कहा, “महाराज जब यह बहेलिया आप से इस पक्षी के गुणगान गा रहा था, तभी मैं समझ गया कि यह कोई विचित्र पक्षी नहीं हैं।

मैंने बहुत ध्यान से देखा तो पक्षी के नाखूनों से समझ गया कि पक्षी का रंग और उसके नाखून का रंग समान नहीं हो सकता हैं। इसलिए, मैंने आपके बीच में बोलने की इजाजत मांगी थी। तेनालीराम की बातों को सुनकर राजा ने बहेलिए से कहा- “तुम्हें और कुछ कहना हैं? वह इधर-उधर भागने का प्रयास करने लगा। राजा ने उसे सिपाहियों से पकड़वाकर कारागार में डलवा दिया। तथा उसे दिए गए पक्षी के 100 सिक्के, चतुराई और बुद्धिमत्त्व के कारण तेनालीराम को दिलवा दिए।

सीख:

बिना सोचे समझे किसी की बातों में आकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए।

3. एक तीर से दो शिकार (चोरों को सबक):

एक दिन तेनालीराम को राजा कृष्णदेव राय के दरबार से निकलने में देर हो गई। शाम हो चुकी थी सुनसान रास्ते में जाते हुए उन्हें झाड़ियों के पीछे से फुसफुसाने की आवाज आती हुई सुनाई दी। तेनालीराम किसी पेड़ के पीछे छिपकर उन लोगों की बातों को सुनने लगा। वे लोग आपस में बात कर रहे थे कि ‘तेनालीराम’ को राजा अक्सर उसकी बुद्धिमानी के कारण सोना, चांदी जैसे जवाहरात देते हैं।

जिसके कारण वह अमीर हैं। लेकिन हम लोगों के पास कुछ नहीं हैं। फिर भी हम कल उससे ज्यादा अमीर हो जाएंगे। यह कहते हुए सभी धीरे-धीरे हँसने लगे। तेनालीराम उन लोगों की बातों को सुनकर समझ गया कि वे लोग उसके घर में चोरी करने वाले हैं। वह भागते हुए अपने घर पहुंचा।

तेनालीराम ने अपने घर के दरवाजे को खटखटाया उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला। तेनालीराम चारपाई पर बैठ गया। उसकी पत्नी एक गिलास पानी देते हुए कहने लगी। अपने घर के पीछे वाले खेत में धान की फसल सूखने को आ गई हैं। अगर उसे पानी नहीं मिला तो धान सुख जाएगा। तेनालीराम अपनी पत्नी को समझाते हुए कहता हैं, “तुम्हारी बातें ठीक हैं, लेकिन मुझे कुछ जरूरी काम करना हैं”

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तेनाली एक बड़ा बाक्स लेकर उसके अंदर ईंट, पत्थर से भर दिया। उसकी पत्नी कहती हैं, ”आप क्या कर रहे हो, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं।” तेनालीराम अपनी पत्नी को समझाते हुए कहते हैं। तुम मेरी मदद करो, मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा। वें दोनों पत्थर से भरे बाक्स को धान के खेत के पास वाले कुएं में गिराने लगे। उसकी पत्नी फिर से पूंछती हैं, हम ऐसा क्यों कर रहे हैं?

तेनालीराम ने पत्नी के कान में फुसफुसाते हुए सारी घटना बता दी। फिर तेज आवाज में कहता हैं, “आज मैंने सपना देखा की हमारे घर में चोरी होने वाली हैं, इसलिए हम सोने, चांदी और हीरे, मोती के आभूषण खेत वाले कुएं में छिपा दिए हैं। जिससे चोरों को हमारे घर में कुछ नहीं मिलेगा। पेड़ के पीछे छिपे चोरों ने तेनालीराम की बातों को सुन लिया।

तेनालीराम और उसकी पत्नी जैसे ही घर के अंदर गए चोर चुपके-चुपके कुएं तक आ पहुंचे। कुएं में झाँक कर देखा तो उसमें पानी अधिक था। उन सभी को कुएं के पास रस्सी से लगी एक बाल्टी दिखाई दी। वे सभी कुएं से पानी निकाल कर बाहर गिराने लगे। पानी नाली के रास्ते खेत में जाने लगा। चोरों ने पूरी रात कुएं से पानी निकालते रहे।

सुबह जब उन्हें बाक्स दिखाई दिया तो उनमें से एक चोर ने कहा, ”मैं नीचे जाकर बाक्स को रस्सी में बांध देता हूँ और तुम लोग ऊपर खीच लेना।” बाक्स को ऊपर लाकर उसका ताला तोड़कर देखा तो उसमें सोने, चांदी के बजाय ईंट पत्थर भरे हुए थे। सभी चोरों को बात समझ में आ गई कि तेनालीराम ने उन्हें मूर्ख बना दिया।

इतने में तेनालीराम अपने साथ सिपाहियों को लेकर आ गया। उन्हें देखते ही चोर भागने की कोशिश करने लगे। लेकिन सिपाहियों ने सभी को दबोच लिया और उन्हें कारागार में डाल दिया। तभी वहाँ पर तेनालीराम की पत्नी भी पहुँच गई। उसे देख तेनालीराम ने कहा, ”भाग्यवान! कैसी रही मेरी तरकीब? देखो फसल को पानी मिल गया।

उसकी पत्नी ने कहा, “आप सचमुच एक चतुर इंसान हो। आपकी बुद्धिमानी के कारण चोरी भी नहीं हुई और धान को पानी भी मिल गया।” इस तरह से आपने एक तीर से दो शिकार भी कर डाले, दोनों जोर-जोर से हँसने लगे।

सीख:

शांत मन से सोच समझकर लिया गया फैसला कामयाबी के शिखर पर ले जाती हैं।

🙋‍♂️ FAQs – तेनालीराम की प्रसिद्ध कहानियाँ

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