लकड़हारे की कहानियों से हमें कई तरह की सीख मिलती हैं। इस तरह की कहानियों में सबसे प्रचलित कहानी लकड़हारा और कुल्हाड़ी की हैं। जोकि अक्सर बच्चे सुनते हैं। क्योंकि यह कहानी लकड़हारे की ईमानदारी से प्रेरित हैं। तो चलिए आज के इस लेख में लकड़हारे की कहानियां पढ़ते हैं, जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं।
जलदेवी और कुल्हाड़ी:

साबरमती नदी के किनारे बस एक गाँव जिसका नाम मीरपुर था। उसी गाँव में हरिया नाम का एक लकड़हारा रहता था। उसका काम जंगल से लकड़ियाँ काटना और बेचना था। इसी के सहारे उसके परिवार का गुजर-बसर होता था। लकड़हारा बहुत नेक और ईमानदार इंसान था। वह कभी हरे-भरे पेड़ों को नहीं काटता था। वह सूखे पेड़ की तलाश में दूर जंगल में निकल जाता था।
एक दिन हरिया सूखे पेड़ की तलाश में दूर जंगल में नदी के किनारे पहुँच गया। उसे नदी के किनारे एक पेड़ में कुछ सूखी टहनी दिखाई दी। हरिया उस पेड़ पर चढ़कर सूखी टहनियों को काटना शुरू कर दिया। अचानक से उसकी कुल्हाड़ी टूटकर नदी में गिर गई। हरिया बहुत उदास हुआ। वह उसी पेड़ पर बैठकर अपनी किस्मत को कोसने लगा।
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उसने आसमान की तरफ देखते हुए तेज आवाज में कहा, “हे भगवान! मुझसे किस जन्म का बदला ले रहे हो।” बहुत मुश्किल से एक सूखा पेड़ दिखाई दिया। लेकिन उसकी लड़की काट नहीं सका। अब हमारे पास कुल्हाड़ी खरीदने के लिए पैसा भी हैं। इतना कहकर वह पेड़ पर बैठे-बैठे रोने लगा। तभी अचानक उसी नदी से एक जलदेवी निकली वह अपने हाथ में एक सोने की कुल्हाड़ी ली हुई थी।
जलदेवी ने आवाज लगाई, “हरिया उठ, ले अपनी कुल्हाड़ी” उसने देखा की उसके सामने जलदेवी सोने की कुल्हाड़ी लिए हुए खड़ी थी। हरिया ने कहा, “यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं हैं।” मैं इसको नहीं ले सकता। जलदेवी ने उसकी बातों को सुनते ही नीचे पानी में चली गई। वह चांदी की एक कुल्हाड़ी लेकर आई। उसने उस कुल्हाड़ी को लकड़हारा के सामने बढ़ाया। लेकिन इस बार भी यह कहते हुए उसने मना कर दिया कि यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं हैं।
हरिया की ईमानदारी देख जलदेवी बहुत प्रसन्न हुई। उसने हरिया को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी देते हुए कहा, “हरिया मैं तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ।” जिसके लिए मैं तुम्हें यह सोने और चांदी की भी कुल्हाड़ी दे रही हूँ। हरिया जलदेवी को बातों को सुनते ही भावुक हो गया। जलदेवी फिर से नदी में समा गई। हरिया सोने और चांदी की कुल्हाड़ी को बाजार में बेचकर अपने घर की परिस्थितियों को बदल दिया।
नैतिक सीख:
ईमानदारी हमेशा पुरस्कार देती हैं।
2. लकड़हारा और चोर:

किसी गाँव में सुरेश नाम का एक लकड़हारा रहता था। सुरेश बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। गाँव वाले उसे बहुत ही नेक इंसान मानते थे। सुरेश अपने परिवार का पालन-पोषण लकड़ियों को बेचकर करता था। एक दिन सुरेश जंगल से लकड़ियाँ काटने गया हुआ था। उसे घर आने मे शाम हो चुकी थी। वह लकड़ियों के गट्ठर अपने सिर पर लिए हुए सुनसान रास्ते से चला आ रहा था।
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बीच रास्ते में अचानक उसे कुछ फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी। उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। लेकिन आवाज धीरे-धीरे आ रही थी। सुरेश ने लकडी के गट्ठर को अपने सिर से नीचे उतारकर रख दिया। वह उस आवाज के तरफ जाने लगा। उसने देखा की कुछ लोग झाड़ी के पीछे छिपकर उसके गाँव में चोरी करने की योजना बना रहे थे।
उनके हाथों में खतरनाक अवजार थे। वह भागते हुए अपने गाँव की तरफ चला गया। उसने अपने गाँव के मुखिया से मिलकर जंगल की सारी घटना को बता दिया। गाँव के मुखिया ने अपने गाँव वालों को सचेत कर दिया। उस रात सभी गाँव वाले जल्दी सो गए। किसी के घर में लाइट नहीं जल रही थी। चोरों का ग्रुप गाँव में घुसा ही था की गाँव वाले अपने बनाए प्लान के अनुसार चोरों को पकड़ लिया।
चोरों को पेड़ से बांध दिए। सुबह-सुबह मुखिया जी ने पंचायत में चोरों सजा सुनाई। जबकि, लकड़हारा सुरेश को उसकी ईमानदारी और चतुराई के लिए पुरस्कृत किया गया।
नैतिक सीख:
साहस और बहादुरी के बल पर कामयाबी हासिल की जा सकती हैं।
3. लकड़हारा और बच्चे:

किसी गाँव में भानू नाम का एक लकड़हारा रहता था। वह बहुत लालची और मतलबी था। वह ज्यादा पैसों के चक्कर में हरे-हरे पेड़ों को काटकर बाजार में बेचने लगा था। जिसके कारण उस गाँव से सटे बाग खत्म होते जा रहे थे। एक दिन उस गाँव के बच्चे उसी बाग में खेल रहे थे। बच्चों ने देखा कि भानू एक हरे पेड़ को काट रहा हैं। बच्चों ने भानू को समझाने का प्रयास किया। लेकिन उसने हरे पेड़ को काटना बंद नहीं किया।
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भानू जब दोपहर का खाना खाने घर चला गया तो बच्चों ने एक योजना बनाई। वे पेड़ के आस-पास खून जैसा लाल रंग भर दिए। सभी बच्चे उसी पेड़ के बगल एक झाड़ी में छिप गए। कुछ समय बाद लकड़हारा वापस उसी बाग में आया। उसने जैसे पेड़ को काटना शुरू किया उसके जड़ से खून निकलने लगा। बच्चे तरह-तरह की रोने आवाज भी निकलना शुरू कर दिए।
यह सब देखकर लकड़हारा भयभीत हो गया वह डर गया। उसे लगा की इस पेड़ में भूत हैं। वह अपनी कुल्हाड़ी वही छोड़कर तेजी से अपने घर की तरफ भाग गया। बच्चे उसे भागते देख झाड़ी से बाहर आ गए। बच्चों ने कहा अब अकल आई ठिकाने।
कहानी से सीख:
हमें पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि पेड़ हमें स्वच्छ हवा और बहुत कुछ प्रदान करते हैं।
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.
