Paryavaran Par Kahani in Hindi – 4 पर्यावरण और प्रकृति की शिक्षाप्रद कहानियाँ

📅 Published on June 24, 2026
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पर्यावरण की देखभाल करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। लेकिन बच्चों को यह बात सीधे समझाना मुश्किल होता है। इसीलिए कहानियाँ सबसे अच्छा जरिया हैं। इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं Paryavaran Par Kahani in Hindi – 4 ऐसी शिक्षाप्रद हिंदी कहानियाँ जो बच्चों को बताएंगी कि स्वच्छता क्यों जरूरी है, पानी बचाना क्यों इतना महत्वपूर्ण है, पेड़-पौधों को भी हमारी तरह दर्द होता है, और पुरानी किताबों-कापियों को फेंकने के बजाय दोबारा कैसे काम में लाएं। ये सभी कहानियाँ सरल भाषा में हैं और class 3 से class 6 तक के बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।

1. स्वच्छता का महत्त्व:

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एक बार की बात हैं। किसी नगर में एक राजा रहता था। राजा अपने राज्य में साफ-सफाई के लिए जाना जाता था। उसे गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं थी। एक बार वह कुछ महीनों के लिए किसी दूसरे राज्य को चला गया। जब वह वापस लौटा तो एक दिन अपना भेष बदलकर राज्य में घूमने निकल पड़ा। वह देखता हैं कि उसके राज्य में जगह-जगह गंदगी फैली हुई हैं।

वह दरबार वापस आकार अपने मंत्रियों को फटकार लगाने लगा। एक मंत्री ने राजा को सलाह देते हुए कहा- “महाराज! मेरा मानना हैं की राज्य की प्रतिदिन सफाई होती हैं। लेकिन, प्रजा के लोग फिर से गंदगी फैला देते हैं। राज्य को स्वच्छ रखने के लिए प्रजा का सहयोग बहुत जरूरी हैं।

इसलिए, महाराज! अगर आप एक बार सभा बुलाकर लोगों को सफाई के महत्त्व के बारें में बताएंगे तो उसका असर लोगों पर अधिक पड़ेगा। जिससे गंदगी की रोकथाम भी की जा सकती हैं। अगले दिन राजा ने एक सभा बुलाई और स्वच्छता के बारें में समझाते हुए कहा- स्वच्छता हमारे जीवने के लिए बहुत अनिवार्य हैं। जो हमें अनेकों बीमारियों से बचाता हैं।

इसलिए, कूड़ा कूड़ेदान में ही फेंके। राजा ने राज्य में कुछ और सफाई कर्मी की नियुक्त कर दिया। अब लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाने लगे और राज्य में कही भी गंदगी नहीं होती थी।

कहानी से सीख:

अपने आसपास की जगह को स्वच्छ रखना हमारा परम कर्तव्य हैं।

2. बच्चा और पेड़:

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एक बार नामू को उनकी माँ ने काढ़े के लिए पलास की छाल लाने के लिए जंगल भेजा। जंगल में बहुत खोजने के बाद पलास का पेड़ मिला। वह कुल्हाड़ी से पेड़ की छाल उतार लाया। घर आते समय उसके मन में कई तरह के सवाल चल रहे थे। घर पहुंचकर नामू अपने माँ को छाल को देकर घर के सामने लगे नीम के पेड़ के नीचे खाट पर बैठकर कुछ सोचने लगा।

कुछ समय बाद उसकी माँ उसे खाने के लिए बुलाती हैं। अचानक नामू के पैर पर खून बहता देखकर उसकी माँ आश्चर्य से बोली- “यह तुम्हारे पैर पर खून कैसा? उसका पैजमा ऊपर उठाते हुए देखा की उसके पैर का मांस छिला हुआ था। वह कहती हैं- यह सब कैसे हुआ? “उसने अपनी माँ से कहा- “मैंने अपने पैर की चमड़ी कुल्हाड़ी से छील दी।”

नामू! तू बड़ा मूर्ख हैं। कोई अपने पैर पर कुल्हाड़ी चलाता हैं? तुम्हें पता हैं इस तरह के घाव से तुम्हारे पैर में सड़न पैदा हो सकती हैं। जिसके कारण तुम्हारा पैर कटवाना भी पड़ सकता हैं। जिससे तुम लंगड़े हो जाओगे। नामू ने अपनी माँ से कहा – “आपके कहने पर मैंने पेड़ की छाल उतरकर लाया। फिर तो उन्हें भी दर्द हुआ होगा।” क्या पता मेरे छाल उतारने की वजह से वह पेड़ सूख जाए और उसे काटना पड़े।

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“पेड़ों में और जीव-जन्तुओ में भी मनुष्य जैसा जीव होता हैं। जिसे चोट लगने पर दर्द होता हैं।” नामू की बातों को सुनकर उसकी माँ रो पड़ी। उसने कहा- ऐसा लग रहा है, तू आगे चलकर महान साधु बनेगा। बड़ा होने पर यही नामू “प्रसिद्ध भक्त नामदेव” के नाम से जाना गया।

कहानी से सीख:

मनुष्य की तरह ही पेड़-पौधे, और जीव जन्तुओं को क्षति पहुँचाने पर दर्द होता हैं।

3. जल ही जीवन हैं:

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रोहित पढ़ाई में बहुत जितना होनहार बच्चा था, उतना ही वह लापरवाह भी था। सबसे ज्यादा वह पानी के प्रयोग में लापरवाही बरतता था। वह पानी को अंधाधुंध बर्बाद करता था। उसे ऐसा करने में मजा आता था। वह अक्सर अपने घर के नल को खुला छोड़ देता था। अपनी साइकिल की धुलाई वह घंटों तक करता रहता था।

जब वह अपने दोस्तों के साथ कही जा रहा होता था तो उसे कोई नल दिखता तो उससे निकलने वाले पानी से खूब खेलता। लेकिन, वह घर जाते समय नल नहीं बंद करता था। उसकी इस आदत के लिए उसके माता-पिता उसे कई बार समझा चुके थे कि पानी बहुत अमूल्य हैं। जिसे हमें बर्बाद नहीं करना चाहिए।

लेकिन, उसे माता-पिता की बातों का कोई असर नहीं पड़ता था। वह फिर भी पानी को बर्बाद किया करता था। एक बार वह अपने पापा के साथ किसी दूसरे शहर को जा रहा था। अचानक बीच रास्ते में लंबा जाम लग गया। उसके पापा ने गाड़ी को दूसरी तरफ मोड लिया, जोकि एक घनी बस्ती के बीच से होकर जाता था।

उस बस्ती में गंदगी देखकर रोहित ने अपना मुँह सिकोड़ लिया। तभी उसका ध्यान वहाँ लगी भीड़ पर गई। उसने देखा की एक नल पर लोग लाइन लगाकर बाल्टियाँ, मटकों और डिब्बों में पानी भर-भर कर अपने-अपने घरों को ले जा रहे थे। रोहित के पापा को उसे समझाने का सुअवसर मिल गया।

उन्होंने रोहित को समझाते हुए कहा- “बेटा देख रहे हो लोग पानी के लिए कितनी लंबी लाइन लगाए खड़े हुए हैं।” नल से पानी समय -समय पर आता हैं। समय हो जाने पर इन लोगों में से कितने लोग तो खाली मटके लिए वापस अपने-अपने घरों को लौट जाएंगे। अगलें दिन फिर पानी आने का बेसब्री से इंतजार करेंगे। अपने पिता की बात सुनकर रोहित चुप सा हो गया। वह वहाँ की दयनीय स्थिति देखकर अब वह पानी की बचत करने लगा।

कहानी से सीख:

जल हैं तो कल हैं!, इसलिए हमें इस प्राकृतिक संसाधन का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

4. कापी-किताब का दुबारा उपयोग:

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किसी शहर में राहुल पाँचवी कक्षा में पढ़ता था। गर्मियों की छुट्टियाँ हुई। राहुल गाँव में अपने मामा के घर गया। वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि, खुले-खुले खेत खलिहान, बागों में पेड़ों पर पके हुए आम लटक रहे हैं। यह सब देख राहुल खुशी से झूम उठा। उसे कोयल की मीठी-मीठी कू-कू की आवाज भी सुनाई दे रही थी। शाम की हवा भी ठंडी-ठंडी चल रही थी।

यह सब देख राहुल से रहा नहीं गया। और उसने अपने साथ लाई कापियों के पेज को फाड़कर जहाज बनाकर उड़ाना शुरू कर दिया। हवा तेज चल रही थी, जिससे राहुल को पेपर का जहाज उड़ाने में बहुत मजा आ रहा था। देखते-देखते राहुल ने अपनी कापी के सभी पेज फाड़कर जहाज बना दिया।

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तभी राहुल के मामा आफिस से घर आए। राहुल को पेज फाड़ते देख बोले- “राहुल तुम पेज क्यों फाड़ रहे हो?” मामा जी मैं पेज के जहाज बना रहा हूँ।” राहुल ने जबाब दिया। उसके मामा ने उसे समझाते हुए कहा- “देखो बेटा, तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, तुमने कितने पेज फाड़ दिए।” तुम्हें पता हैं, इस दुनिया में कितने बच्चे ऐसे हैं जो कापी, पेंसिल न मिल पाने की वजह से स्कूल नहीं जाते।

राहुल को उसके मामा और समझाते हुए कहा- ”बेटा तुम ये जो हरे-भरे पेड़ पौधे देख रहे हो, इन्ही को काटकर उनसे ही कापियाँ बनाई जाती हैं।” जरा सोचो तुम्हारी तरह ही अगर सभी बच्चे नए-नए पेजों को फाड़कर उसकी नाव और जहाज बनाकर बर्बाद करेंगे तो कितना नुकसान होगा। राहुल अपने मामा से पूछता हैं- “फिर हम पुरानी कापियों को फाड़कर जहाज बना सकते हैं न?”

मामा राहुल को समझते हुए कहा- “हम लोग पुरानी कापियों को रफ के लिए उपयोग करते थे। उसके बाद उसे रद्दी वाले को बेच देते थे। जिससे हमें कुछ पैसे भी मिल जाते थे और वह कापी फिर से रीसाइक्लिंग होकर उसके अखबार बन जाते हैं। इस तरह पेड़ों की कटाई कुछ हद तक कम हो जाती हैं।

क्योंकि पेड़ से ही हमें ऑक्सीजन मिलते हैं। यही वह कारण है कि हमें स्कूल में अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाता हैं। राहुल अपने मामा से वादा किया कि अब वह किसी तरह के पेज को बर्बाद नहीं करेगा। उसने अपने मामा को वचन दिया कि मैं अपने स्कूल में ऐसा करने वाले बच्चों को भी रोकेगा।

नैतिक सीख:

हमें कापी किताब को बर्बाद नहीं करना चाहिए। बल्कि उसको रीसाइक्लिंग करना चाहिए।

🙋‍♂️ FAQs – पर्यावरण और प्रकृति की शिक्षाप्रद कहानियाँ

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