ज्ञानवर्धक छोटी कहानी – अंधकार से प्रकाश की ओर

📅 Published on August 6, 2025
🔄 Updated on February 16, 2026
You are currently viewing ज्ञानवर्धक छोटी कहानी – अंधकार से प्रकाश की ओर
Image sources: bing.com

रामलाल नाम का एक नाई था। उसके घर में दो बच्चे और उसकी पत्नी रहते थे। वह अपने घर का खर्च चलाने के लिए दाढ़ी-बाल काटने का काम करता था। जिससे रामलाल को थोड़े-बहुत पैसे मिल जाते थे। रामलाल का जीवन मुश्किलों भरा बीत रहा था। क्योंकि, वह अपनी गरीबी से निकलने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति के चक्कर में फँस चुका था, जो उसे गुमराह करके पैसे खर्च करा रहा था।

रामलाल पूरी तरह से अंधविश्वास में फँस चुका था। वह दिन भर मेहनत करके कमाए पैसों को उस व्यक्ति के साथ खर्च कर देता था। दिनों-प्रतिदिन उसके घर की स्थिति खराब होने लगी। बच्चों की फीस न जमा होने के कारण स्कूल से भी निकाल दिया गया था। घर में खाने को अन्न भी खत्म हो चुके थे। लेकिन रामलाल यही सोचता था कि इस व्यक्ति के अंदर कुछ ऐसी शक्ति हैं, जो हमारी गरीबी चुटकियों में दूर कर देगा।

और भी देखें: बगुला और केकड़ा – The story of heron and crab

रामलाल की पत्नी अपने पति को कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन रामलाल पत्नी की भी बात नहीं मान रहा था। एक दिन रामलाल की पत्नी मायूस होकर घर के दरवाजे पर बैठी थी। उसके दरवाजे के रास्ते से एक महात्मा कही प्रवचन देने जा रहे थे। महात्मा जी ने रामलाल की पत्नी को उदास बैठे देख पूछा, “क्या बात हैं? तुम बहुत उदास दिख रही हो” रामलाल की पत्नी ने महात्मा जी सारी बातें बता दी।

महात्मा जी बिना कुछ बोले चले गए। रामलाल की पत्नी को आश्चर्य हुआ कि मैंने बड़ी उम्मीद से महात्मा जी को अपनी दशा बताई थी। शायद वे हमारी परेशानी का हल बता दे। लेकिन महात्मा जी बिना कुछ बताए चले गए। अगले दिन रामलाल काम पर जाने के लिए तैयार हो रहा था। तभी उसके घर पर वही महात्मा फिर से आए।

baccho-ki-gyanvardhak-kahani
Image sources: bing.com

उन्होंने राम लाल को इशारा करते हुए कहा, “इस बच्चे का बाल काटना हैं।” रामलाल ने पूछा कौन सा बच्चा? मुझे तो यह कोई बच्चा नहीं दिख रहा। महात्मा जी फिर से अपने सामने हाथ दिखाते हुए कहा, “इस बच्चे का बाल काटना हैं।” नाई बहुत आश्चर्य में पड़ गया कि मुझे कोई बच्चा नहीं दिख रहा। जबकि, महात्मा जी को दिख रहा हैं।

रामलाल महात्मा जी के सामने अपने दोनों हाथों को जोड़कर कहने लगा। “महाराज! आपके इशारों को मैं समझ नहीं पा रहा। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें। महात्मा जी ने कहा, “वह व्यक्ति ठीक इसी बच्चे की तरह से तुम्हारी गरीबी दूर कर रहा हैं।” जिसका कोई वास्तविक रूप, रंग और आकार नहीं हैं। तुम चाहकर भी इस बच्चे का बाल नहीं काट सके। जोकि तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा।

फिर तुम उस व्यक्ति पर कैसे भरोसा कर सकते हो? की वह कोई ऐसा चमत्कार करेगा कि तुम एक राजा बन जाओगे। महात्मा जी ने रामलाल से पूछा, “क्या तुम्हें किसी ऐसे इंसान के बारें में पता हैं जिसे वह व्यक्ति अपनी शक्तियों से राजा बना दिया हो। रामलाल ने कहा, नहीं!, महात्मा जी कहा, “अगर किसी की तरह बनना चाहते हो तो उस तरह के व्यक्तियों से मिलों। उनसे सीखो की वह व्यक्ति उस मुकाम पर कैसे पहुँचा।

उसके लिए उसने कितने और किस प्रकार के बलिदान दिए हैं। तुम्हारे लिए बेहतर यही होगा कि अपना एक लक्ष्य निर्धारित करके उसी दिशा में मेहनत करना शुरू कर दो। फिर देखना एक दिन तुम अपने फील्ड के सबसे अच्छे इंसानों में से एक होंगे। रामलाल को उस दिन से समझ आ गया की चमत्कार भी उसी के साथ होती हैं जो मेहनत करता हैं।

रामलाल अब अंधविश्वास के चक्कर में न पड़कर मेहनत के ऊपर विश्वास करने लगा। देखते-देखते उसके जीवन में उजाला होने लगा। एक दिन वह कड़ी मेहनत के बल पर शहर के बीचों बीच बड़ी दुकान खोल ली। उस दुकान से उसे अच्छी आमदनी भी होने लगी।

नैतिक सीख:

जीवन में उजाला तभी होगा जब सही दिशा में मेहनत और लगन के साथ काम करोगे।

Leave a Reply