साहिल एक बहुत ही शरारती लड़का था। उसके पिता एक लेखक थे। उन्हें जीव-जन्तु और पक्षियों से बहुत अधिक लगाव होने के कारण वे उनके ऊपर पुस्तकें भी लिखा करते थे। लेकिन साहिल अपने पिता के विपरीत पक्षियों को बिना किसी कारण दुख पहुंचाता था। उसके पिता ने उसे ऐसा न करने के लिए कई बार समझाया कि जीव-जन्तु और पक्षियों को हानि नहीं पहुंचाना चाहिए।
क्योंकि, वे हमारे ऊपर आश्रित रहते हैं। लेकिन, साहिल अपने पिता की बात नहीं मानता था। प्रतिदिन वह पक्षियों को फ़साने के लिए नई-नई तरकीब खोजता रहता था। कभी वह अपने घर के आँगन में दाने डालकर जाल बिछा देता, तो कभी वह पिंजरे को खोलकर उसमें फल रखकर पक्षियों को फँसाता था। इस तरह से कैद हुए पक्षी कुछ खाते-पीते नहीं थे।
जिसके कारण कुछ पक्षी उसके पिंजरे में ही दम तोड़ देते थे। एक बार एक कबूतर का बच्चा उसके पिजरें में फँस गया। जिसे देख साहिल बहुत खुश हो रहा था। कुछ देर बाद जब कबूतर अपने बच्चे के लिए खाना लेकर आई तो देखती हैं कि घोंसले में उसका बच्चा नहीं हैं। कबूतर अपने बच्चे को आसपास खोजने निकल गई। कुछ दूर उड़ने के बाद उसने देखा कि उसका बच्चा साहिल के पिजरें में कैद हैं।
जोकि, उसके आँगन में रखा हुआ था। कबूतर पिंजरे के पास जाकर जोर-जोर से चिल्ला रही थी। उसकी आवाज सुनकर अन्य पक्षी भी उसके पास आ गए। अब सभी पक्षी मिलकर पिजरें के आसपास मँडराने लगे। कबूतर अपने बच्चे को पिजरें से निकालने के लिए भरसक प्रयास कर रही थी।

पिंजरें के पास बहुत सारे पक्षियों को देखकर साहिल एक डंडा लेकर आया। साहिल को देख सारे पक्षी वहाँ से उड़ गए। लेकिन, कबूतर नहीं गया। वह पेड़ की एक डाल पर बैठ कर अपने बच्चे को निहारता रहा। उसे देख साहिल पिजरें को अपने घर के अंदर लेकर चला गया। कुछ समय बाद साहिल भोजन कर रहा होता हैं। उसके घर पर उसका दोस्त मोहित उससे मिलने आया।
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पिंजरे में बंद पक्षी को देखकर मोहित ने कहा- “तुम कितने निर्दयी, क्रूर और अत्याचारी लड़के हो जोकि, इस बेजुबान पक्षी को कैद करके रखे हो”। साहिल ने कहा, “मैं क्रूर नहीं हूँ मैं इस पक्षी को खाने पीने के लिए भी देता हूँ। लेकिन, यह पक्षी खाना नहीं खाता, तो इसमें मेरी क्या गलती हैं।
साहिल की बातचीत से उसके दोस्त को लगने लगा कि उसको डराने धमकाने से वह पक्षी को आजाद नहीं करेगा। हमें इसकी भावनाओं के साथ प्यार से बात करनी पड़ेगी। उसके दोस्त ने उसे समझाते हुए कहा- “साहिल उस पेड़ पर देखो, इस बच्चे की माँ बैठी हैं जोकि अपने बच्चे से अलग होने की वजह से रो रही हैं”।
ठीक इसी प्रकार से भगवान न करें कि अगर आपको भी कभी कोई आपकी माँ से दूर ले जाए तो आपकी माँ पर क्या बीतेगी। क्या तुम अपनी माँ के बिना खाना खा सकते हो। आगे साहिल के दोस्त ने उसे समझाते हुए कहा- “अगर आपको पक्षियों से अधिक लगाव हैं तो आप अपने दरवाजे के सामने दाना डाल दो तथा किसी बर्तन में पानी भी रख दो।
फिर देखना पक्षियों से तुम्हारा आँगन चहक उठेगा। साहिल को अपने दोस्त की बात सुन अपनी गलतियों का ऐहसास होने लगा। उसने पिंजरे को खोलकर पक्षी को आजाद कर दिया। इसके अलावा उसने पिंजरे को भी तोड़कर फेंक दिया।
नैतिक सीख:
हमें जीवों पर दया करनी चाहिए। जोकि, बेजुबान होते हैं वे हमसे कुछ कह नहीं सकते। हमें उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहिए।
🙋♂️ FAQs – सीख देने वाली कहानी – पिंजरे में बंद पक्षी
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