प्रेत आत्मा की 5 रहस्यमयी कहानियाँ – Pret Aatma Ki Kahani

📅 Published on July 2, 2026
🔄 Updated on June 30, 2026
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हिंदू मान्यताओं में कहा जाता है कि जब किसी इंसान की मृत्यु असमय, अन्याय से या किसी की लापरवाही के कारण होती है, तो उसकी आत्मा शांति से अगली यात्रा पर नहीं जा पाती। ऐसी आत्मा “प्रेत” बन जाती है और तब तक भटकती रहती है, जब तक उसे अपने साथ हुए अन्याय का जवाब न मिल जाए। इस आर्टिकल में हम लाए हैं 5 ऐसी रहस्यमयी Pret Aatma Ki Kahani, जहाँ हॉस्टल के एक कमरे से लेकर हॉस्पिटल के वार्ड, चलती ट्रेन और घर की दीवारों तक — हर जगह किसी न किसी प्रेत ने अपने अधूरे हिसाब को पूरा किया। ये कहानियाँ सिर्फ डराती नहीं, बल्कि यह भी सिखाती हैं कि लापरवाही और अन्याय की कीमत कभी-कभी इस जीवन के बाद भी चुकानी पड़ती है।

1. मुंबई के हॉस्टल – रूम नंबर 101 की लड़की:

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मुंबई के एक पुराने गर्ल्स हॉस्टल में रूम नंबर 101 में तरह-तरह की आवाजें आती थी। उस रूम में कोई नहीं रहता था। लेकिन वर्ष 2014 में ज्यादा एडमिशन होने की वजह से गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन नेहा को रूम नंबर 101 की चाबी देते हुए कहा, “नेहा अभी हॉस्टल में कुछ और रूम तैयार हो रहे हैं।” कुछ दिन के लिए इस रूम में रह लो फिर मैं तुम्हें किसी दूसरे रूम में शिफ्ट कर दूँगी।

वार्डन मुस्कुराते हुए नेहा से कहा, “अभी तुम हॉस्टल में नई-नई आई हो थोड़ा सावधान रहना।” अपने रूम की खिड़की और दरवाजों को बंद रखना। स्टडी टेबल पुरानी होने की वजह से कुछ आवाजें आती हैं। कोई दिक्कत हो तो तुम मुझे फोन कर लेना। हॉस्टल में नेहा का पहला दिन था। उसने अपने बैग को अलमीरा में रख दिया। पहली रात मेस में खाना खाकर अपने रूम में सोने के लिए आ गई।

रात को लगभग 1:30 AM पर सररररर… सररररर… कॉपी के पन्ने पलटने जैसी आवाज़ आई। आवाज सुनकर उसे लगा शायद खिड़की खुली होगी। लेकिन उसके कमरे की खिड़की बंद थी। नेहा थोड़ा डर गई, पर उसने खुद को समझाया। “पहाड़ी हवा है… आदत हो जाएगी।” अगले दिन नेहा की मुलाकात उसकी सीनियर मीनाक्षी से हुई। उसने बातों-बातों में पूछ लिया, “नेहा तुम किस रूम में रहती हो।”

नेहा ने कहा, ” रूम नंबर 101 में।” मीनाक्षी ने कहा, “थोड़ा सावधान रहना हो सके तो जल्द से जल्द अपना रूम चेंज करवा लेना।” क्योंकि, उस रूम में मेरे एक सीनियर ने 2012 में फेल होने के डर से सुसाइड कर लिया था। तभी से उस रूम में रात में किताबों के पन्ने पलटने तथा किसी के पढ़ने की आवाज़ें आती हैं। लेकिन नेहा ने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने कहा, “मीनाक्षी मैम आज के इस युग भूत-प्रेत नहीं होते, ओके?”

उस रात नेहा सो रही थी। अचानक किताब के पन्ने पलटने की आवाज आने लगी। वह उठकर स्टडी टेबल के पास जाकर देखी तो मानो अभी-अभी उसकी किताब किसी ने खोली हो। वह थोड़ा डर गई। उसने सोचा, शायद मैंने किताब को खुला छोड़ दिया था। जोकि हवा आने की वजह से फड़फड़ा रही थी। वह किताब को बंद करके वापस जाकर सो गई।

कुछ समय बाद लगभग 2:15 बजे बाथरूम के नल से अचानक पानी टपकने लगा ‘टप-टप-टप-टप… नेहा डरते-डरते बाथरूम तक गई। लेकिन वहाँ कोई नहीं था। अचानक से पानी गिरने की आवाज आना भी बंद हो गई। तभी फिर से उसके स्टडी टेबल से किताब के पन्ने पलटने के आवाज आने लगी।

नेहा ने पीछे पलटकर देखा तो स्टडी टेबल के पास हवा में एक लड़की बैठी थी। उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। उसके पैर ज़मीन में नहीं थे। वह मोटी आवाज में बोली, “मैं पढ़ रही हूँ। इस बार मैं परीक्षा पास कर लूँगी।” तुम भी मेरे साथ आकर पढ़ाई करो। नेहा अपने वार्डन को फोन करने लगी। अचानक से वह लड़की गायब हो गई।

अगली सुबह नेहा ने वार्डन को रात्री की पूरी घटना सुना दी। वार्डन गहरी सांस लेते हुए बोली – “बेटा सविता एक बहुत ही होशियार लड़की थी। परीक्षा के एक दिन पहले उसके घर से फोन आया कि अगर परीक्षा में फेल हो गई तो घर वापस मत आना। उसी सोच में उसका पहला पेपर खराब हो गया।”

उस रात उसने हॉस्टल के रूम नंबर 101 पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अब भी पढ़ना चाहती हैं। इसलिए वह किताबों के पन्ने पलटते रहती हैं। उस दिन वार्डन ने रूम नंबर 101 को खाली करवा कर नेहा को किसी और रूम में शिफ्ट करवा दिया।

2. अनजाने में पत्नी की हत्या:

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सन् 1972 में दिल्ली के कारोल बाग में कोठी नंबर 17 में सेठ रामनाथ और उनकी पत्नी रहते थे। उसके बहू और बेटे इंग्लैंड में रहते थे। रामनाथ का व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था। कुछ समय बाद उन्हें व्यापार में बहुत बड़ा घाटा लगा। अब सेठ रामनाथ बहुत चिंतित रहने लगे। एक दिन सेठ रामनाथ उदास होकर घर पर बैठे थे। तभी उसकी पत्नी रामनाथ के पास आई।

वह सेठ रामनाथ को समझाते हुए कहने लगी, “जो हुआ सो हुआ, इस बात को लेकर इतना चिंतित नहीं होना चाहिए।” हमारे पास गुजर-बसर करने के लिए पर्याप्त पैसे हैं, सबकुछ भूल जाओ। रामनाथ ने गुस्से में आकर टेबल पर पड़ी चाय की केतली उसके सिर पर फेंक दिया। गहरी चोट लगने के कारण उसकी पत्नी के सिर से तेज खून निकलने लगा। उसे समझ नहीं आया कि यह मैंने क्या कर दिया।

सिर से खून अधिक निकलने के कारण उसकी मौत हो गई। सेठ ने सोचा इस बात के बारें में अगर लोगों को पता चलेगा तो लोग मुझे कातिल कहेंगे। उसने अपनी पत्नी की लाश को घर के आँगन में दफ़ना दिया। इस बात की खबर किसी को नहीं चली। उसने उसी रात घर छोड़कर घूमने के बहाने किसी दूसरे शहर चला गया। एक महीने बाद जब वह अकेले वापस घर लौटा तो उसने अपने आस-पास खबर फ़ैला दी कि उसकी पत्नी खो गई। जिसे वह बहुत खोजा लेकिन नहीं मिल सकी।

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अब रामनाथ अपने किए पर बहुत पछता रहा था। एक रात लगभग 2:30 बजे थे रामनाथ अपने बेडरूम में अकेले सो रहा था। अचानक से उसके बेडरूम का दरवाजा किसी ने खटखटाया। रामनाथ डर हुआ था। उसने सोचा मेन गेट खुला था क्या? जिससे कोई मेरे बेडरूम तक आ गया। उसने अपने कमरे का दरवाजा खोलकर देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। वह मेन गेट को देखने चला गया।

लेकिन, मेन गेट में ताला लगा हुआ था। वह वापस अपने रूम में आ गया। वह कमरे की लाइट बंदकर कंबल को ओढ़ने लगा। अचानक उसने देखा कि उसकी पत्नी उसके बगल में लेटी हुई हैं। वह डर गया हड़बड़ाते हुए उठा और लाइट जलाया तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। अचानक से उसके कमरे की लाइट अपने आप बंद हो गई। उसकी पत्नी सविता मोटी आवाज में बोली, “रामनाथ पैसे से इतना प्यार की तुमने अपनी पत्नी को मार डाला।”

अब वह बहुत डर चुका था। उसने रोते हुए कहा, “सविता मुझे माँफ़ कर दो, मैंने तुम्हें अनजाने मे मारा था।” आज मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि मैं बीते हुए दिनों के ख्यालों में नहीं खोया रहूँगा। सविता ने फिर से कहा, “रामनाथ यह सब यही रह गया। क्या कुछ मैं अपने साथ लेकर गई। ऐसे ही तुम भी एक दिन चले जाओगे। व्यर्थ की चिंता मत करो। अपने जीवन को खुशियों के साथ बिताओ।

अचानक से लाइट फिर से जलने लगी। रामनाथ, सविता… सविता… करके जोर-जोर से रोने लगा। उस दिन उसे ऐहसास हुआ कि मैंने गुस्से में आकार अपना कितना बड़ा नुकसान कर लिया। उसने प्रण किया कि आज से वह अपने बचे हुए हर एक पल को खुशियों के साथ बिताएगा। उसे दिन से रामनाथ अपने आप को पूरी तरह से बदल दिया।

3. मुंबई के राणा प्रताप हॉस्पिटल की नर्स:

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मुंबई में स्थित राणा प्रताप के नाम से एक बहुत बड़ी हॉस्पिटल थी। उस हॉस्पिटल में अनिता नाम की एक नर्स काम करती थी। अनीता किसी भी काम को ढंग से नहीं करती थी। वह मरीजों से बात-बात में झगड़ पड़ती थी। उसे किसी भी पेसेन्ट का देख-भाल करना अच्छा नहीं लगता था। उसकी कई बार शिकायत हो चुकी थी। लेकिन उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा था।

एक दिन सावित्री नाम की औरत की तबीयत खराब हो गई। उसके घर वाले उसे उसी अस्पताल में लेकर आए। डॉक्टरों ने उसका इलाज करना शुरू कर दिया। उसे ब्लड की जरूरत थी। डॉक्टरों ने कहा, “अगर एक घंटे के अंदर इसे ब्लड नहीं चढ़ाया गया तो इसकी मौत हो सकती हैं।” उसके घर वालों ने ब्लड की व्यवस्थ कर दी। उसे ब्लड चढ़ाने लगा। उसके घर वाले उसके बेड के पास बैठे थे।

तभी नर्स अनीता सावित्री के लिए दवाइयां लेकर आई। उसने देखा कि उसके पास कुछ लोग बैठे हैं। उसने गुस्से में उन्हें डांटते हुए। बाहर निकाल दिया। अब सावित्री के पास कोई नहीं था। तभी उसका छोटा बेटा अपनी माँ को देखने के लिए अंदर गया। उसे अंदर जाते हुए नर्स ने देख लिया। वह उसे जोर से डांटकर भगा दिया।

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सावित्री के घर वालों ने नर्स की शिकायत हास्पिटल के अधिकारियों से कर दी। इस बात की खबर उसे पता चल गई। वह गुस्से में आकर ब्लड पाइप निकल दी। जिसके कारण उस औरत की मौत हो गई। कुछ दिन बाद उस औरत की प्रेत आत्मा चुड़ैल बनकर उस अस्पताल में घूमने लगी। एक दिन अनिता की डियूटी रात में थी। वह हॉस्पिटल के पांचवें मंजिल पर पेसेन्ट को दवाएं देने गई थी।

वह लिफ्ट में अकेले नीचे आ रही थी। जैसे ही लिफ्ट बंद हुई। उसके सामने वही औरत आकार खड़ी हो गई। उसकी आँखें लाल-लाल, बाल खुले हुए, सफेद साड़ी पहने हुए थी। उसके पैर नहीं थे। उसे देख अनीता बहुत डर गई। उसने मोटी आवाज में बोली, “पहचाना मुझे, मैं वही सावित्री हूँ, जिसकी तुमने ब्लड की पाइप निकल दी थी। जिसके कारण मेरी मौत हो गई।

अनीता उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी। लेकिन उसने उसकी एक न सुनी। उस प्रेत आत्मा ने उस नर्स को मौत के घाट उतार दिया। अब वह प्रेत आत्मा उसी अस्पताल में रहने लगी। वह वहाँ के बेपरवाह कर्मचारियों को सबक सीखाने का काम करने लगी। इस तरह से उस हॉस्पिटल के सभी कर्मचारी अपनी-अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाने लगे।

4. भूतिया ट्रेन का डिब्बा:

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मीरपुर गाँव में सरिता नाम की एक लड़की रहती थी। उसके पिता हरीराम एक गरीब मजदूर थे। वे दिन भर मजदूरी करते फिर भी उनके घर का खर्च नहीं चल पाता था। हरीराम बहुत परेशान हो उठा। उसने सोचा मेहनत से कुछ नहीं होने वाला। मेरी किस्मत खराब हैं। मुझे सबसे पहले अपनी किस्मत ठीक करनी होगी।

वह साधु-संत और फकीर के पास जाने लगा। लोग उसे तरह-तरह की बातें बताते थे। जिसे वह पूरी शिद्दत से करता था। एक दिन उसे एक तांत्रिक बाबा मिला उसने कहा, “तुम्हारी किस्मत तुरंत बदल सकती हैं।” लेकिन इसके लिए तुम्हें एक बलि देनी पड़ेगी। वह बलि तुम्हें रात बारह बजे इस शमशान में आकर देनी पड़ेगी।

हरीराम ने अगली रात एक बकरी लेकर आया। वह उस बकरी की बलि देकर चला गया। लेकिन उसके जीवन में कोई बदलाव नहीं आ रहा था। एक दिन फिर वह उसी तांत्रिक के पास गया। उस तांत्रिक ने पूछा, “तुमने बलि किसी दी थी। हरीराम ने कहा- “मैंने एक बकरी की बलि दी थी।” उसकी बातों को सुनते ही तांत्रिक गुस्से से लाल-पीला हो उठा।

उसने कहा, “बलि दिए हुए माँस को मैं खाता हूँ।” मुझे इंसान का माँस ही चाहिए। तुमने मेरी साधना भंग कर दी, जिसकी सजा तुम्हें मिलेगी। उसने अपनी त्रिशूल हरीराम के पेट में घुस दी, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। तांत्रिक को मारते हुए उसकी बेटी सरिता ने देख लिया। तांत्रिक उस लड़की के पीछे पड़ गया।

सरिता भागते हुए रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन में छिप गई। कुछ देर बाद मुंबई से दिल्ली जाने वाली गरीब रथ ट्रेन का हार्न बजा। सरिता उसी ट्रेन के A1 कोच में सीट नंबर 51 पर बैठी थी। अचानक वही तांत्रिक उसके सामने आया। उसे देख सरिता बहुत डर गई। तांत्रिक ने सरिता को भी मार दिया।

उसका त्रिशूल खून से लथपथ था। उसे देखे सभी यात्री सहम गए थे। तांत्रिक चलती ट्रेन से नीचे नदी में कूद गया। वह तैरकर नदी से बाहर निकल गया। अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकी सरिता की लाश को उतरकर पोस्टमॉर्डम के लिए भेज दिया गया। कुछ दिन बाद उस ट्रेन का A1 कोच में सीट नंबर 51 पर जो भी बैठता उसकी रास्ते में दम घुटने से मौत हो जाती थी।

इस तरह गरीब रथ के उस कोच में 51 नबर सीट पर कई मौत हो चुकी थी। एक दिन उसी ट्रेन के A1 कोच में 51 नंबर सीट पर एक बच्ची बैठी थी। उसके सामने वाले सीट पर एक फकीर बाबा बैठे थे। बाबा को तंत्र विद्या का प्रचंड ज्ञान था। बीच रास्ते में उस लड़की का दम घुटने लगा। वह अपने गले को पकड़कर बैठ गई। उसे ऐसा लग रहा था कि मानो कोई उसका गला दबा रहा हो।

फकीर बाबा को बात समझने में देर नहीं लगी। उन्होंने अपने थैले में से एक चमत्कारी पत्थर निकलकर उस लड़की को दिखाने लगे। लड़की फकीर बाबा के ऊपर हमला कर दी जिससे बाबा नीचे गिर गए। बाबा तुरंत खड़े होकर अपने गले से एक माला निकलकर उस बच्ची के गले में डाल दिया।

माला डालते ही शमशान में बैठा तांत्रिक आग से जलने लगा। उसकी मायावी शक्ति छिड़ हो गई। वह उसी शमशान में जलकर रख हो गया। अब जो भी उस ट्रेन की 51 नंबर सीट पर सफर करता उसे कोई भी प्रेत-आत्मा परेशान नहीं करती थी।

5. गड़ा हुआ जींद:

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रामसूरत नाम का एक व्यापारी था। उसका कपड़ों का व्यापार था। वह कई सालों से मेहनत कर रहा था। लेकिन उसकी तरक्की नहीं हो पा रही थी। वह और अधिक मेहनत करने लगा उसके पास पैसे तो खूब आने लगे। लेकिन वह पैसा उसके पास टिकता नहीं था। कभी घर वालों के इलाज में पैसा खर्च हो जाता तो कभी व्यापार में घाटा लग जाता। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसका पैसा कहाँ जा रहा हैं।

रामसूरत ने सोचा क्यों न कोई ज्योतिषी से मिला जाए। वह एक ज्योतिष के पास गया और अपने मन की सारी बातों को बता दी। ज्योतिषी ने उसे कुछ उपाय बताया, लेकिन उसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ। व्यापारी रामसूरत और परेशान रहने लगा। उसने सोचा चलो किसी और के पास चलते हैं। जिससे अपनी समस्या का हल पूछा जाए।

रामसूरत अपनी समस्या का समाधान खोजते-खोजते एक अघोड़ी बाबा के पास पहुँचा। रामसूरत को देखते ही अघोड़ी बाबा ने कहा, आ गया तू तुम्हारे घर में बरक्कत नहीं हो रही। तुझे पाता हैं, ऐसा क्यों हो रहा? रामसूरत ने कहा- नहीं बाबा तभी तो मैं आपके दरबार में आया हूँ। अघोड़ी बाबा ने कहा, “तुम अपने दोनों हाथ इस बाल्टी के पानी में डालो” रामसूरत ने अपने दोनों हाथ पानी की बाल्टी में जैसे ही डाला पानी का रंग खून जैसा लाल हो गया।

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अघोड़ी बाबा ने कहा, “तुम्हारे घर में जींद गड़ा हुआ हैं। उसे निकलना पड़ेगा। बाबा ने पूरा विधान बताकर रामसूरत को घर भेज दिया। उसी रात बारह बजे अघोड़ी बाबा रामसूरत के घर आए। उन्होंने घर के अंदर लगभग पाँच फिट नीचे एक गड्ढा खुदवाया। बाबा ने उस गड्ढे में पाँच बाल्टी पानी डालने के लिए कहा।

अपने थैले से एक ताबीज निकालकर एक गिलास पानी में डाल दिए। बाबा ने पाँच बार उस ताबीज के पानी को गड्ढे में डाला। अचानक उस गड्ढे से एक खतरनाक जींद निकला। उसने मोटी आवाज में कहा, “अघोड़ी तुमने मुझे बाहर निकलकर अच्छा नहीं किया।” आज तुम सभी मारें जाओगे।

इतना कहते ही वह हा… हा… करके हँसने लगा। अघोड़ी अपने बैग में लिया हुआ एक डिब्बा खोला काफी मसक्कत के बाद। उसने उस जींद को पकड़कर डिब्बे में बंदकर दिया। उसी दिन से व्यापारी के घर में तरक्की होनी शुरू हो गई। अब व्यापारी बहुत खुशी भरा जीवन यापन करने लगा।

🙋‍♂️ FAQs – प्रेत आत्मा की कहानियाँ

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