सुनसान जंगल, अंधेरी रात और सदियों पुरानी टूटी-फूटी हवेली — ये तीन चीज़ें मिलकर हमेशा एक डरावनी कहानी का माहौल बना देती हैं। इस पोस्ट में हम आपके लिए लाए हैं 4 ऐसी कहानियाँ, जो भटकती आत्माओं, खूनी कुओं और रहस्यमयी हवेलियों के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं। अगर आपको प्रकृति और डर का मिला-जुला अनुभव पसंद है, तो ये Darawani Jagah Ki Kahani सीरीज़ आपके लिए ही है।
1. हवेली का रहस्य – Haveli Ka Rahasya Horror Story:
मध्यप्रदेश के छोटे से गाँव में एक बहुत पुरानी हवेली थी। लोग उसे “राजा रघु प्रताप सिंह की हवेली” कहते थे। वह हवेली लगभग सौ साल पुरानी थी, जोकि अब खंडहर बन चुकी थी। हवेली की दीवारें टूटी हुई थी, उसके ऊपर काई जम हो चुकी थी। जिसके कारण उन दीवारों के ऊपर घास और कंटीले झाड़ी उग गए थे।
खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे। हवा चलने पर दरवाजे और खिड़कियाँ ऐसे चरमराते थे कि मानो उसे कोई खोल रहा हो। उस गाँव के लोग कहते थे, “जो भी व्यक्ति रात को उस हवेली की तरफ गया आज तक वापस नहीं लौट सका।” उस गाँव के लोगों को पता था इस हवेली के अंदर जरूर कोई राज़ छिपा हुआ हैं। जिसे आज तक कोई समझ नहीं सका। एक-दो लोग हिम्मत करके अंदर जा चुके हैं। लेकिन वे दुबारा वापस नहीं आ सके।
रोहन जोकि दिल्ली में रहता था। वह लोककथाओं और भूत-प्रेत की कहानियों पर रिसर्च कर रहा था। वह अनेकों ऐसे स्थान पर जा चुका था। जहाँ पर लोग जाने से डरते थे। रोहन बहुत निर्भीक और बहादुर था। एक दिन वह किसी बस स्टैंड पर एक व्यक्ति से मिला। जिससे वह काफी देर तक बातें करता रहा। बातों-बातों में उसे मध्यप्रदेश के राजा रघु प्रताप सिंह की हवेली के बारें में पता चला।
उस हवेली के बारें में जानकर रोहन रोमांचित हो उठा। वह सोचने लगा कि अगर “मैं उस हवेली का राज़ सबके सामने ला दिया तो लोग मेरी तारीफ करेंगे।” पूरे गाँव ही नहीं, पूरे शहर में मेरी चर्चाएं होगी। रोहन ने अपना मन बना लिया कि वह मध्यप्रदेश के उस हवेली में जरुर जाएगा। दो दिन बाद रोहन उस गाँव में पहुँचा। उसने अपने साथ कैमरा, टॉर्च और नोटबुक लिया हुआ था।
वह शाम होने का इंतजार करने लगा। शाम ढलते ही वह उस हवेली की तरफ चल पड़ा। रास्ते में उसे एक चाय की दुकान दिखाई दी। उस दुकान को एक बूढ़ा व्यक्ति बंद कर रहा था। उसने रोहन को हवेली की तरफ जाते हुए देख हड़बड़ा कर बोला – “अरे… भाई उधर कहाँ जा रहे हो? शाम होते ही उस तरफ कोई नहीं जाता।”
क्योंकि, आगे बहुत पुरानी हवेली हैं। उस हवेली से औरत और बच्चों के रोने और हँसने की आवाजें आती हैं। रात में आज तक जो भी उधर गया हैं, वह वापस नहीं लौट पाया। रोहन ने कहा, “अरे काका कैसी बातें करते हो? यह सब अंधविश्वास हैं।” आज के इस युग में भूत-प्रेत कहाँ होते हैं। मैं कल सुबह इस हवेली की हकीकत सबके सामने लाकर रहूँगा।
बूढ़े व्यक्ति ने कहा, “मेरी बात नहीं मान रहे हो देखना तुम जरूर पछताओगे। वह बूढ़ा व्यक्ति अपने घर को चल गया। रोहन उस हवेली की तरफ आगे बढ़ने लगा। रात हो चुकी थी, रोहन हवेली के गेट पर पहुंचा उसने टार्च जलाकर देख कि जंग लगा आधा खुला हुआ गेट था। वह जैसे ही गेट को खोलने के लिए धक्का दिया। अंदर से अजीब सी सरसराहट की आवाज़ें आना शुरू हो गई।

रोहन हाथ में टार्च, कैमरा लिए हुए हवेली के अंदर घुसते चला जा रहा था। अचानक उसे लगा की कोई उसके पीछे-पीछे चल रहा हैं। उसने पलटकर देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। रोहन हवेली के अंदर आँगन में पहुँच चुका था। उसने देखा एक लालटेन जल रहा था। वह समझ गया, यहाँ जरूर कोई हैं।
उसने आवाज दी कोई हैं यहाँ पर…. लेकिन आगे से कोई आवाज नहीं आई। उसने कैमरे में बोलना शुरू कर दिया। “आज मैं राजा रघु प्रताप सिंह के महल के अंदर से लोगों को सच्चाई दिखाने जा रहा हूँ। आप लोग हमारे साथ बने रहो। आज एक बहुत बड़े रहस्य से पर्दा उठने वाला हैं।”
जैसे ही उसने बोलना शुरू किया था कि आँगन से ऊपर जाने वाली सीढ़ी से किसी के आने की ठक-ठक-ठक और पायल की छन-छन की आवाज़ आने लगी। वह चौक गया, सीढ़ी की तरफ उसने टॉर्च की रोशनी डाली, मगर कुछ नहीं दिखा। उसे सीढ़ी के ऊपर किसी औरत की खड़ी होने की परछाई दिखाई दी। उसने फिर से आवाज दिया कौन हैं वहाँ पर सामने आओ।
रोहन हवेली के आँगन से एक कमरे में घुसा उसे एक टेबल पर रखी एक डायरी दिखाई दी। उसने डायरी खोलकर देखा जिस पर लिखा था, “मेरे पति राजा रघु प्रताप सिंह मुझे इस हवेली में कैद कर दिया हैं। उन्होंने दूसरी शादी कर ली है, और मुझे मरने के लिए छोड़ दिए। मैं यहाँ चीखती रही, लेकिन किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला। मेरी आत्मा इसी कोठी में भटक रही है।” डायरी का आखिरी पन्ना खून से सना हुआ था। जिसमें लिखा था, “राजकुमारी सावित्री”
रोहन को हावली की हकीकत पता चल गई थी। वह उस कमरे से बाहर निकलने के लिए कदम बढ़ाया ही था कि उसे अजीब-अजीब तरह की आवाजें सुनाई देने लगी। उसने हिम्मत करके आवाजों और परछाई की वीडियो बनाना शुरू कर दिया। लेकिन वह अंदर से बहुत डरा था। वह जल्दी से दरवाजे से बहार निकलना चाहता था।

अचानक उस कमरे का दरवाजा बंद हो गया। रोहन उस दरवाजे को खोलने का प्रयास करने लगा। तभी ही… ही… की आवाज करती हुई एक औरत जोकि सफेद साड़ी पहने हुए, जिसकी आँखें लाल थीं और चेहरा धुंधला था, वह हवा में उसके ऊपर वार कर देती हैं। रोहन टार्च और कैमरे के साथ नीचे गिर गया।
वह औरत मोटी आवाज में रोहन से बोली, “तुम मेरी हवेली में क्या करने आए हो?” रोहन काँपते हुए बोला – “म… मैं सच्चाई जानना चाहता था।” औरत ने भयानक चीख मारी –“सच्चाई जानने वाले कभी जिंदा नहीं रहते!” उस प्रेत आत्मा ने रोहन को कमरे के चारों दीवारों पर उठा-उठा कर फेंका, रोहन का सिर फट चुका था। उसके शरीर के चारों तरफ से खून निकल रहे थे।
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उस भूतनी औरत ने रोहन को गायब कर दिया। अगली सुबह चायवाला बूढ़ा व्यक्ति गाँव वालों को लेकर उसे हवेली के अंदर गया। गाँव वालों ने कमरे के अंदर रोहन का टार्च, कैमरा और खून की बूंदे देखी। जबकि रोहन कही दिखाई नहीं दिया। गाँव वालों ने कैमरा खोलकर देखा तो अजीब-अजीब आवाजों वाला वीडियो और औरत की साया वाली फ़ोटो थी। सभी गाँव वाले समझ चुके थे की रोहन का अंत हो चुका हैं।
अब कोई भी रिसर्चर रात में उस हवेली की तरफ जाने की हिम्मत नहीं करता। अगर कोई नया पत्रकार या रिसर्चर उस कोठी का ज़िक्र करता है, तो गाँव वाले सिर्फ इतना कहते थे –“सावित्री अब अकेली नहीं है… वह कई लोगों को मारकर अपने तरह बना चुकी हैं।” इसलिए अब उस हवेली से आदमी और औरत की भी आवाजें आने लगी हैं।
2. भूतिया जंगल – Bhutiya Jungle Kahani:

तापती नदी के किनारे बसा एक गाँव जिसका नाम अमरपुर था। उस गाँव में पहुंचना आसान नहीं था। क्योंकि, तापती नदी को पार करके जंगल के रास्ते होते हुए उस गाँव में जाना पड़ता था। जबकि, अंधेरा होने से पहले नदी को पार कराने वाला मल्लाह अपने घर चला जाता था। उस गाँव के लोगों को पता था कि शाम सात बजने के बाद उस रास्ते से कोई आता-जाता नहीं था।
क्योंकि नदी के किनारे वाले जंगल में भूतों का वास होता था। वे रात में उसी जंगल में टहला करते थे। एक दिन हरिया की पत्नी यशोदा नदी उस पार गई थी। उसे वापस घर आने मे देर हो गई। रात को आठ बज चुके थे। उसने देखा कि नदी पार कराने वाला मल्लाह भी जा चुका था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह नदी कैसे पार करें। उसे भूतों का डर भी लग रहा था।
तभी वह सामने देखती हैं कि मल्लाह नाव लेकर उसकी तरफ चला आ रहा हैं। वह उसके पास पहुंचकर बोला, “मैंने तुम्हें कहा था समय से पहले आ जाना, लेकिन तुम आने में बहुत देर कर दी। मैं घर जा ही रहा था कि तुम्हें देख लिया। चलो बैठो जल्दी घर चले। हरिया की पत्नी यशोदा नाव में बैठ गई। मल्लाह जंगल की तरह अपना मुँह करके बैठ था। वह धीरे-धीरे अपना चप्पू चलाने लगा। नाव हिचकोले लेती नदी में चल रही थी।

यशोदा सोचे जा रही थी कि मल्लाह इतनी रात कभी नहीं रुकता, आज कैसे रुक हुआ हैं। जबकि मल्लाह की आवाज भी बदली-बदली आ रही थी। वह अंदर से बिल्कुल डरी हुई थी। नाव नदी के बीचों-बीच पहुँच चुकी थी। यशोदा ने मल्लाह से पूछा, “आज तुम कुछ ज्यादा देर तक क्यों रुके हो। मल्लाह ने कुछ नहीं बोला।” हरिया की पत्नी बिल्कुल सहम गई। उसे समझ में आने लगा कि वह फँस चुकी हैं।
नाव किनारे लगते ही मल्लाह अचानक से गायब हो गया। हरिया की पत्नी धीरे-धीरे जंगल के रास्ते अपने घर को जाने लगी। बीच रास्ते में उसने देखा की मल्लाह आगे-आगे गाँव की तरफ जा रहा था। हरिया की पत्नी ने मल्लाह से कहा, “रुको इतनी तेज क्यों चल रहे हो, मुझे भी साथ लेते चलो। मल्लाह एकाएक हरिया की पत्नी यशोदा की तरफ देखा उसका चेहरा भयानक तथा लाल-लाल आँखे थी।
उसे देखते ही यशोदा बेहोश होकर वही गिर पड़ी। वह भूत उसके अंदर समा गया। सरिता उठी और अपने गाँव की तरफ चली गई। उसके पति ने पूछा, तुम नदी कैसे पार करके आई। यशोदा ने कहा, “मुझे मल्लाह ने नदी पार करवाया था।” उसका पति थोड़ा डरा हुआ था। उसने सोच कि मल्लाह इतनी रात तक तो वहाँ नहीं रहता।
रात ज्यादा हो गई गाँव के सभी लोग सो गए। यशोदा अपना रूप बदलकर गाँव में घूमने के लिए निकल गई। उसका पति चुपके-चुपके उसके पीछे चल दिया। उसने देखा कि यशोदा बिना पैर के चल रही थी। वह और अधिक डर गया। अचानक उसने देखा कि वह किसी बच्चे को लेकर जंगल की तरफ भाग गई। यह सब देख उसक पति बहुत घबरा गया।
वह घर आकर देखा तो उसकी पत्नी खाट पर लेटी थी। उसे देख वह चिल्लाने लगा। हरिया की आवाज सुन आस-पास के लोग इकट्ठा हो गए। हरिया ने पूरी कहानी गाँव वालों को बता दिया। उसी गाँव में एक फकीर रहता था। सभी उसके पास गए और सारी बातों को बता दिया। फकीर ने हरिया को एक मुट्ठी भरकर सरसों का बीज दिया। उसने कहा, “इस बीज को अपनी पत्नी के सिर पर पाँच बार घूमाकर मुझे लाकर दो। लेकिन ध्यान रहे कि उसे पता नहीं चलना चाहिए।
हरिया ने चुपके से अपनी पत्नी के सिर पर एक मुट्ठी बीज को पाँच बार घूमा कर फकीर बाबा को दे दिया। उसी रात लगभग बारह बजे फकीर बाबा बडा सा अलाव जलाकर बैठे थे। जैसे ही यशोदा के ऊपर भूत सवार हुआ वह भागते-भागते फकीर के घर जा पहुँचा। उसने फकीर के ऊपर हमला कर दिया। लेकिन फकीर बाबा चैतन्य थे। उन्होंने उसे उसी अलाव में गिरा दिया। वह शैतान आत्मा जलकर राख हो गई।
3. खूनी कुआँ – Khooni Kuwa Story:

रोहित अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने एक अंजान जगह पर जा रहा था। रोहित के सभी दोस्त बस में खूब सारी मस्ती कर रहे थे। बस सुनसान इलाके में चल रही थी दूर-दूर तक कोई दिख नहीं रहा था। शाम का समय भी हो चुका था। उस रास्ते में कोई राहगीर भी दिखाई नहीं दे रहा था। आगे सड़क जंगल की तरफ जा रही थी। ड्राइवर को डर लग रहा था।
बीच जंगल में अचानक बस बंद हो गई। ड्राइवर नीचे उतरकर देखा कि बस में सब ठीक था। लेकिन बस चालू नहीं हो रही थी। उसने सोचा की हमें बस के कुलिंग इंजन में पानी डालने की आवश्यकता हैं। वह बस में रखे वाटर कूलर को लेने गया। लेकिन उस वाटर कूलर में पानी नहीं था। उसे लगा की बिना पानी डाले बस नहीं चल सकती।
वह इधर-उधर देखा तो उसे थोड़ी दूर पर एक कुआँ दिखाई दिया। उस कुएं पर रस्सी से बंधी एक बाल्टी भी रखी थी। उसने उस बाल्टी को कुएं में डालकर पानी निकालना चाहा। जब वह बाल्टी के पानी को कुएं से खींचकर बाहर निकला तो देखा की वह बाल्टी खून से भरी थी। वह बहुत डर गया। उसने कुएं में झांककर देखा तो वह कुआँ खून से भरा था। अचानक उसे लगा की उसे कोई धक्का दे दिया वह कुएं में गिर गया।

कुछ देर बाद बस में बैठे बच्चे देखते हैं कि ड्राइवर अंकल बाल्टी में पानी लेकर आ रहे हैं। रात अधिक हो चुकी थी। ड्राइवर ने बस के कुलिंग इंजन में पानी डाला बस स्टार्ट हो गई। ड्राइवर बस लेकर किसी दूसरे रास्ते सुनसान जगह पर जाने लगा। रोहित के गले में एक अनोखा जादुई पत्थर पहन रखा था। उस पत्थर की खूबी थी कि किसी भी शैतान आत्मा के संपर्क में आने पर वह पत्थर गर्म होकर फट जाएगा।
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उस पत्थर के फटने के साथ-साथ उसके सामने का शैतान भी जलकर राख हो जाएगा। ड्राइवर बना शैतान को पता चल गया कि किसी बच्चे के पास कोई ऐसा जादुई पत्थर हैं। जिससे मैं जलकर राख हो सकता हूँ। उसने बस को बीच रास्ते में रोक दी। ड्राइवर ने रोहित से कहा, “तुम बस से नीचे उतार जाओ” रोहित समझ चुका था कि ड्राइवर के अंदर शैतान आत्मा समा चुकी हैं। उसके गले का पत्थर गर्म होने लगा।
ड्राइवर रोहित के संपर्क में था। उसको मानो कुछ होने लगा था। अचानक एक भयानक शैतान आत्मा ड्राइवर के अंदर ने निकला। उसने रोहित के ऊपर हमला कर दिया। रोहित नीचे गिर गया, उसके गले से पत्थर की ताबीज निकल गई। रोहित उछालकर उस पत्थर वाले धागे को उठाकर उस शैतान को दिखाने लगा।
पत्थर शैतान के सामने एकदम लाल हो गया। अचानक वह पत्थर फटा उसके फटते ही शैतानी आत्मा जलने लगी। वह चिल्लाते हुए उसी कुएं की तरफ भाग गया।
4. पहाड़ों का भूत – Pahad Ka Bhoot:

ठंड का समय था, एक स्कूल के अध्यापक बच्चों को घूमाने पहाड़ों पर ले गए। कई साल पहले उसी पहाड़ से नीचे गिरकर एक लड़के की मौत हो चुकी थी। बच्चे वहाँ पहुंचकर पहाड़ पर खूब मौज मस्ती कर रहे थे। तरह-तरह के गेम भी खेल रहे थे। उन्ही बच्चों में एक बच्चा जिसका नाम श्याम था वह अकेले एक पेड के सहारे बैठा था। अचानक उसे लगा की कोई उसके अंदर समाहित हो गया हैं।
अध्यापक ने बच्चों से कहा, “चलो पहाड़ के नीचे अपने-अपने टेंट में चलो, कल फिर आएंगे। सभी बच्चे और अध्यापक अपने-अपने टेंट में जा चुके थे। बच्चों ने डिनर खत्म कर अपने-अपने बेड पर सो गए। रात अधिक हो चुकी थी, श्याम अपने बेड से उठा और उसी पहाड़ी की तरफ चल दिया। श्याम को पहाड़ी की तरफ जाते देख उसे टेंट का मालिक एक मशाल लेकर उसके पीछे-पीछे चलने लगा।
वह उस पहाड़ी के हर क्षेत्र से अच्छे से परिचित था। श्याम पहाड़ी की चोटी पर चढ़ चुका था। जैसे ही उस शैतानी आत्मा ने श्याम को पहाड़ से नीचे खाई में गिरना चाहा। टेंट का मालिक उसका हाथ पकड़कर ऊपर खींच लिया। टेंट का मालिक अपने हाथों में मसाल लिया हुआ था। उसने श्याम से पूछा तुम कौन हो, तुम इस बच्चे को नीचे खाई में क्यों गिरना चाहते हो।
उसने कहा, मेरा नाम विशाल हैं, मैं कई साल पहले यहाँ पिकनिक मनाने आया था। मैं इस खाई में गिरकर मर गया था। अब इस पहाड़ी पर मैं किसी को नहीं आने दूंगा। यहाँ जो भी आएगा उसका यही हाल होगा। टेंट के मालिक श्याम की तरफ मसाल लिए आगे बढ़ रहा था। उसने कहा, “तुम श्याम को छोड़ दो नहीं तो मैं इसी मसाल से तुम्हें जलाकर राख कर दूंगा। जैसे ही वह श्याम के पास तक जलती मसाल लेकर आगे गया।
वह शैतान आत्मा जोर-जोर से चिल्लाने लगा, मुझे मत जलाओ, मैंने इस बच्चे को छोड़ दिया। इस तरह वह शैतान आत्मा उसे छोड़कर खाई में समा गया। टेंट का मालिक उसे लेकर नीचे आया तो सभी नीचे जागे थे। उन लोगों को टेंट का मालिक पूरी कहानी बताया तो सभी आश्चर्यचकित हो गए। स्कूल के अध्यापक ने उस मालिक को श्याम की जान बचाने के लिए और अधिक पैसे दिए।
🙋♂️ FAQs – Bhutiya Jagah ki Kahani
Alok Kumar is a passionate storyteller and professional content writer with over 9 years of experience crafting meaningful, reader-friendly content. He specializes in Hindi stories, moral stories for children, inspirational narratives, and value-driven educational writing that sparks imagination and encourages positive thinking, making stories enjoyable for readers of all ages.

