बीरबल की चतुराई के 4 मशहूर किस्से जो आपको हैरान कर देंगे

📅 Published on June 14, 2026
🔄 Updated on June 13, 2026
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बादशाह अकबर के नवरत्न में बीरबल अपनी बुद्दिमनी और चतुराई के लिए जाने जाते थे। इसलिए बीरबल को हाजिर-जबाब भी कहा जाता था। बीरबल किसी भी समस्या का समाधान बहुत जल्द कर देते थे। आज हम आपको बीरबल की चतुराई से भरा किस्सा सुनाने जा रहे हैं। जोकि निम्न प्रकार से हैं:

1. संसार की सबसे बड़ी चीज क्या है? – बीरबल का जवाब:

बादशाह अकबर बहुत विनोदी स्वभाव के थे। उन्हें पहेलियाँ बुझाने का बहुत शौक था। उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान मंत्री थे। लेकिन, बादशाह अकबर को सिर्फ बीरबल के द्वारा दिए गए जबाब पसंद आते थे। क्योंकि बीरबल हर पहेली का जबाब सबसे अंत में बहुत ही सोच समझकर देते थे। बादशाह अकबर का लगाव बीरबल के साथ अधिक देख उनके अन्य मंत्री बीरबल से ईर्ष्या करने लगे थे।

एक दिन दरबार में बीरबल उपस्थिति नहीं थे। सभी मंत्री मिलकर बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भरने लगे। लेकिन, बादशाह बीरबल की बुद्धिमानी और चतुराई से अच्छे से वाकिफ थे। इसलिए, वे बीरबल के खिलाफ बुरा नहीं सोचे। बादशाह ने कहा, “तुम लोग बिना वजह अपने समय बर्बाद कर रहे हो, बीरबल तुम लोगों से कही ज्यादा बुद्धिमान हैं। इसलिए उसे मैं अधिक प्यार करता हूँ।”

सभी मंत्रियों के बार-बार कहने पर बादशाह अकबर ने कहा, “देखो आज बीरबल इस सभा में उपस्थति नहीं हैं। तुम लोगों से मैं एक सवाल करता हूँ। अगर सवाल के सही जबाब नहीं दे सके तो सभी को मृत्यु दंड दिया जाएगा। बादशाह अकबर की बात सुनकर चारों मंत्री भयभीत हो गए। उन्ही मंत्रियों में एक ने कहा, “जहाँपनाह! आप प्रश्न पूछिए।”

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बादशाह अकबर ने पूछा, “संसार में सबसे बड़ी चीज क्या हैं?” प्रश्न सुनकर सभी मंत्री चुप हो गए। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि प्रश्न का उत्तर कैसे दिया जाए? सभी मंत्री कुछ देर तक आपस में विचार विमर्श करते रहे। तभी एक मंत्री ने जबाब दिया, “हुजूर! खुदा की खुदाई सबसे बड़ी चीज हैं।” दूसरे मंत्री ने जबाब दिया, “जहाँपनाह! राज्य की सल्तनत सबसे बड़ी चीज हैं।”

बादशाह अकबर को दोनों मंत्रियों का जबाब बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा, “ठीक से सोच समझकर जबाब दो, वरना मैं अपने वादे के अनुसार तुम लोगों को मृत्यु दंड दूँगा।” तीसरे मंत्री ने कहा जहाँपनाह! मुझे कुछ दिनों का समय दो, मैं आपको आपके अनुसार सटीक जबाब दूँगा। अकबर ने सभी चारों मंत्रियों को एक सप्ताह का समय दे दिया। सभा खत्म हुई सभी चारों मंत्री मुँह लटकाए हुए अपने-अपने घर को चले गए।

इस तरह से धीरे-धीरे छे दिन बीत गए। लेकिन, उन्हे कोई उत्तर नहीं सूझ सका। चारों मंत्रियों ने सलाह किया कि इस प्रश्न के जबाब तो सिर्फ बीरबल ही दे सकता हैं। सभी ने बीरबल से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंचकर दरबार में हुए सारी कहानी सुना दी। बीरबल ने कहा- “मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे दूँगा लेकिन मेरी एक शर्त हैं।”

मंत्रियों ने कहा, “एक शर्त नहीं, हम लोग आपकी दस शर्त मनाने के लिए तैयार हैं। बस आप हमें मृत्यु दंड से बचा लीजिए, चारों मंत्रियों ने कहा।” बीरबल ने कहा, “तुम चारों में से दो लोग अपने कंधे पर मेरी चारपाई उठा लीजिए, एक मेरा हुक्का उठा लो, जिसे मैं पीते हुए चलूँगा। और चौथे मंत्री से कहा, “तुम मेरा हाथ हाथ में उठाकर चलते रहो।”

अगर बीरबल उन मंत्रियों को कभी और ऐसा करने के लिए कहे होते तो शायद सभी मंत्री नहीं करते। लेकिन, उन्हे अपने प्राण की रक्षा करनी थी। इसलिए, ऐसा करने पर मजबूर थे। इस तरह बीरबल खाट पर लेटे हुए दरबार जा रहे थे। रास्ते के लोग यह दृश्य देखकर बहुत ही आश्चर्यचकित हो रहे थे। दरबार पहुंचकर चारों ने बीरबल की चारपाई दरबार के मध्य रख दिया।

बादशाह अकबर, बीरबल को चारपाई पर लेटे देख हँस पडे। बीरबल चारपाई से उतरकर कहा, “जहाँपनाह! शायद आपको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। संसार में सबसे बड़ी चीज ‘गर्ज’ हैं।” इस तरह से उन चारों मंत्रियों को एक बड़ा सबक मिल गया। उसी दिन से उन्होंने बीरबल की निंदा और बुराई करना छोड़ दिया।

2. जैसे को तैसा – तीन मुश्किल सवालों का चतुर जवाब:

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एक समय की बात हैं अकबर का बीरबल के प्रति अधिक लगाव देख अन्य सभी मंत्री बीरबल को प्रधानमंत्री पद से हटाने योजना बनाते हुए कहा- “जहाँपनाह हम सभी में अब्दुल रहीम खान-ए-खाना जोकि बीरबल से भी ज्यादा चतुर और बुद्धिमान हैं।” कृपया आप उन्हें इस दरबार का प्रधानमंत्री बनाइए। बादशाह अकबर ने कहा, “पहले आपको साबित करना पड़ेगा कि बीरबल बुद्धिमान और चतुर नहीं हैं।”

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने कहा- “महाराज, हम बीरबल से तीन सवाल करना चाहते हैं। उसके जबाब सुनकर आपको उसके बुद्धिमता की परख हो जाएगी। बादशाह अकबर ने कहा, “कल दरबार में आप अपने तीनों सवालों के जबाब बीरबल से पूँछ लेना।” अगले दिन दरबार लगा बीरबल को बुलाया गया।

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने अपने पहले प्रश्न का जबाब बीरबल से पूछते हुए कहा- “पृथ्वी की लंबाई कितनी हैं? बीरबल कहता हैं- “दो लाख किलोमीटर” अगर अब्दुल रहीम खान-ए-खाना जी को विश्वाश नहीं हैं तो वें फ़ीते से पृथ्वी की लंबाई नापकर मुझे गलत साबित कर सकते हैं।

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने अपना दूसरा सवाल पूंछते हुए कहा- “ब्रम्हांड में तारों की संख्या कितनी हैं?, बीरबल ने एक भालू मँगवाकर कहा- “इस भालू के शरीर में जीतने बाल हैं, उतने ही ब्रम्हांड में तारों की संख्या हैं। अगर खान-ए-खाना जी को विश्वाश नहीं हैं तो वें भालू के बालों को गिन सकते हैं, जिससे उन्हें तारों की संख्या का पता चाल जाएगी।

बादशाह अकबर, खान-ए-खाना को बीरबल से तीसरा सवाल पूछने का हुक्म देते हैं। खान-ए-खाना बीरबल से पूंछता हैं- “इस संसार में कितने पुरुष, महिला, बच्चे और बुजुर्ग रहते हैं? बीरबल जबाब देते हुए बादशाह अकबर से कहा- “जहाँपनाह, इस संसार में प्रतिदिन पुरुष, महिला, बच्चों की जन्म और मृत्यु होने के कारण संख्या घटती बढ़ती रहती हैं। इसलिए आप सभी को मेरे सामने लाकर खड़े कर दो मैं आपको संख्या बता दूंगा।

बादशाह अकबर तीनों प्रश्नों के सही जबाब पाकर खुश हो गया। उसने अब्दुल रहीम खान-ए-खाना से कहा और कुछ पूछना हैं। खान-ए-खाना ने कहा- “महाराज बीरबल सभी प्रश्नों के जबाब सही नहीं दिए हैं। वें बस आपको गुमराह किए हैं। बादशाह अकबर ने कहा – “जैसा प्रश्न वैसा ही जबाब।” इसलिए, बीरबल ही इस दरबार का प्रधानमंत्री रहेगा।

3. मोम का शेर – बिना पिंजरा खोले शेर को बाहर निकाला:

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एक बार बादशाह अकबर दरबार लगाए बैठे थे। उनके पास फारस के राजा ने अपने दरबारियों के साथ एक पिजरे में कैद शेर को भेजा। दरबारी राजा के सामने सिर झुकते हुए अपना परिचय देते हुए एक खत दिया। बादशाह अकबर का दरबारी खत को पढ़ा। जिसमें लिखा था, इस पिजरें में कैद शेर को बिना पिंजरा खोले बाहर निकलना हैं। अगर नहीं निकल पाए तो तुम्हें मुझसे युद्ध करना पड़ेगा।

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राजा ने अपने मंत्रियों से शेर को बाहर निकालने के लिए सलाह मांगी। लेकिन, किसी को कुछ तरकीब नहीं सूझ रहा था। राजा ने बीरबल को बुलाकर शेर को बाहर निकलने के लिए कहा। बीरबल, पिंजरे तक गया और शेर को बहुत ही ध्यान से देखा। उसने एक लंबी और मोटी जलती हुई मोमबत्ती को शेर के मुह में डाल दिया। देखते ही देखते वह शेर मोम की तरह पिघलकर पिंजरें से बाहर आने लगा।

इस तरह से बीरबल अपनी बुद्धिमता के कारण बिना पिंजरा खोले शेर को बहार निकल दिया। बादशाह अकबर बीरबल की बुद्धिमानी के लिए उसे सम्मानित किया।

4. बीरबल और राजाई – जितनी चादर उतने पैर पसारो:

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एक बार शहंशाह अकबर अपने मंत्रियों की परीक्षा लेना चाहते थे। उन्होंने अपने से थोड़ी छोटी एक राजाई बनवाई। दरबार में सभी मंत्रियों के सामने ऐलान कर दिया कि इस राजाई से जो मुझे अच्छे से ढक देगा। वह हमारे दरबार का मुख्यमंत्री होगा। लेकिन शर्त यह हैं कि मेरे शरीर का कोई भी हिस्सा खुला नहीं होना चाहिए।

सभी मंत्री हँसने लगे की यह कौन सी परीक्षा राजा ले रहा हैं। जोकि, बहुत आसान हैं। इसमें जो पहले जाएगा वही राजा के शरीर को आसानी से ढक देगा। राजा दरबार में बीचों-बीच लेट गया। एक-एक मंत्री राजा के शरीर को ढकने की कोशिश करते हैं। लेकिन राजा का पूरा शरीर नहीं ढक सका। क्योंकि, राजाई छोटी होने की वजह से राजा का शरीर कही न कही से खुला ही रहता था।

जब बीरबल का नंबर आया तो राजाई से ढँकते हुए बीरबल ने कहा- “महाराज अपने पैर थोड़ा समेट लो। बादशाह अकबर अपने पैर समेट लेते हैं। इस प्रकार बीरबल राजा अकबर के पूरे शरीर को ढँक दिया। इसलिए कहा जाता हैं जीतनी चदार उतने पैर पसारो। बीरबल की बुद्धिमता देख राजा उसे अपने दरबार का प्रधानमंत्री चुन लिया।

इन किस्सों से क्या सीखें?

उपरोक्त सभी चारों किस्से बुद्धिमानी और समझदारी पर आधारित हैं। जबकि पहली कहानी हमें बताती हैं कि गर्ज से बड़ी संसार में कोई चीज नहीं हो सकती। दूसरी कहानी बताती हैं कि जैसे को तैसा मतलब जैसा सवाल वैसा जबाब। बीरबल की राजाई हमें बताती हैं कि जितनी बड़ी राजाई हो वैसे पैर फैलाव। जबकि मोम का शेर की कहानी हमें बताती हैं कि चतुराई और बुद्दिमानी के बल पर बड़ी सी बड़ी समस्या को हल किया जा सकता हैं।

🙋‍♂️ FAQs – बीरबल की चतुराई भरे किस्से

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