Easy Small Story in Hindi for Kids – बच्चों के लिए आसान छोटी कहानी

📅 Published on June 19, 2025
🔄 Updated on March 29, 2026
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बच्चों को छोटी और आसान कहानियाँ बहुत पसंद आती हैं। इसलिए यहाँ हम आपके लिए Easy Small Story in Hindi for Kids लेकर आए हैं। इन मजेदार छोटी कहानियों से बच्चों को अच्छी सीख भी मिलेगी। क्योंकि मैं अक्सर अपने बच्चे को ऐसी ही कहानियाँ सुनाती हूँ। जिन्हें वह खूब पसंद करता हैं। तो चलिए देखते हैं आज की कहानियों को।

1. गिर कर उठना:

दीपू स्कूल से वापस घर आकर अपने दादा से कहा, “दादाजी, आज के बाद मैं स्कूल नहीं जाऊँगा।” दादाजी ने पूछा, “क्या हुआ बेटा! आज तुम इतने गुस्से में क्यों हो? तुम्हें आज के बाद स्कूल क्यों नहीं जाना। दीपू सिसकते हुए बोला, आज मेरे स्कूल में फुटबॉल मैच था। मेरे सारे दोस्तों ने कई गोल किए। लेकिन मैं एक भी गोल नहीं कर पाया।

मैच के बाद मेरे सभी दोस्त मुझ पर हँस रहे थे। जबकि, मेरे कोच ने मुझे कुछ मैच अपने से छोटे बच्चों के साथ खेलने के लिए कहा हैं। दादाजी ने दीपू को समझाते हुए कहा, “बेटा दीपू! बस इतनी सी बात के लिए तुम स्कूल जाना बंद कर दोगे।”

क्या आपने कभी किसी को तीर चलाते हुए देखा हैं? तीर को आगे छोड़ने से पहले पीछे खींचना पड़ता हैं। ठीक उसी प्रकार से अच्छे दिन के लिए हमें बुरे दिन से लड़ना पड़ता हैं। उठो! कुछ कर दिखाओ। क्योंकि गिरकर उठना और उठकर चलना ही जिंदगी का नाम हैं।

बच्चों के लिए संदेश:

जिसके अंदर आगे बढ़ने का जज्बा और हौसला हैं। वह इंसान डूबती हुई किस्ती को भी किनारे लगा देगा।

2. समय का महत्व:

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सुधीर पेट में दर्द होने का बहाना करके स्कूल नहीं गया। थोड़ी देर बाद वह गली के बच्चों के साथ खेलने निकल गया। शाम होने को आ चुकी थी। लेकिन अभी तक सुधीर घर वापस नहीं आया था। रात होने वाली थी तभी सुधीर घर आया और अपनी माँ से कहा, “मम्मी मुझे बहुत जोरों की भूख लगी हैं। मैं हाथ पैर धुलकर आता हूँ, आप खाना लगा दो।

सुधीर डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खा रहा था। तभी सुधीर की दादी उसके पास आई और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली, आ गया मेरा पोता! सुबह तो तुम बोल रहे थे, मेरे पेट में दर्द हैं, मैं स्कूल नहीं जाऊँगा। उसके बाद तुम खेलने निकल गए। अब तुम्हारे पेट में दर्द नहीं हो रहा क्या? सुधीर बिना कुछ बोले खाना खाए जा रहा था। दादी उसके बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई।

दादी ने कहा, “बेटा सुधीर! तुमने आज जो समय बर्बाद कर दिया। यह समय तुम्हारे लाख चाहने पर भी जीवन में कभी दुबारा वापस लौटकर नहीं आएगा। बेटा! समय बहुत बलवान होता हैं। जो समय आज तुमने बर्बाद किया, उसी समय का तुम्हारे दोस्त स्कूल में सदुपयोग कर रहे थे। बेटा, यदि समय को अपने अनुसार बना लिया तो ठीक, नहीं तो तुम्हें समय के अनुसार बनना पड़ेगा। जोकि दुखदाई होगा।

बच्चों के लिए संदेश:

समय की कीमत कोई चुका नहीं सकता। एक बार हाथ से निकल गया तो सिर्फ पछतावा ही पछतावा मिलेगा।

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3. जगह की कीमत:

किसी गाँव में शंकर नाम का छोटा सुनार रहता था। लोग उसके पास ज्वेलरी लेने आते थे तो सबसे पहले यही पूछते थे कि क्या यह असली हैं? इतना सुनते ही वह गुस्से से लाल-पीला हो जाता था। लेकिन वह भी मजबूर था। क्योंकि उसे अपने आभूषणों को बेचना था। इसलिए वह असली और नकली में फ़र्क लोगों को बताता था। यही वह कारण था कि वह बहुत कम लोगों को आभूषण बेच पाता था।

एक दिन वह सिर पर हाथ रखकर दुकान में बैठा था। तभी, उसका बेटा उसके पास आया और कारण जानना चाहा। शंकर ने अपने बेटे को सारी बात बता दी। अगले दिन सुनार का बेटा एक ठेला लेकर आया। उसने अपने पिता से कहा, “पिताजी दुकान के सभी जेवरात एक बॉक्स में डालकर ठेले पर रखकर मेरे साथ चलो। शंकर ने अपने बेटे के कहेनुसार ही किया।

शंकर और उसका बेटा बीच गाँव में पहुंचकर आवाज लगाने लगे, बाजार से सस्ता शुद्ध चौबीस कैरेट के सोने चांदी के आभूषण ले लो। लोगों ने उसे ऐसा करते देख, उसके ऊपर खूब हँसे। लोगों ने कहा, नकली होगा इसलिए ऐसे बेच रहा हैं। पूरे दिन उसके एक भी जेवरात नहीं बिके।

बेटे ने अपने पिता के लिए बीच शहर में एक बड़ा शोरूम खुलवा दिया। उस शोरूम में कभी भी किसी की यह पूछने की हिम्मत नहीं हुई, ‘क्या ये जवाहरात असली हैं।’ सस्ती और आसानी से मिलने वाली चीज की कीमत नहीं होती। वही चीज शोरूम में महंगी मिल रही हैं। जिसे लोग बडे शौक से खरीद लेते हैं। चाहे वह नकली ही क्यों न हो।

कहानी से सीख:

किसी भी चीज की कीमत उसके सही स्थान पर होती हैं।

4. जी तोड़ मेहनत:

आपने भी लोगों को अक्सर यह कहते हुए जरूर सुना होगा। मेहनत एक ऐसा हथियार हैं, जिससे तुम जो चाहो वह प्राप्त कर सकते हो। लेकिन, हम इसे सिर्फ अनसुना करके छोड़ देते हैं। फिर अपनी किस्मत को कोसना शुरू कर देते हैं। यहाँ तक कि हम अपनी असफलता के लिए अपने माता-पिता को दोष देने लगते हैं, जोकि, बिल्कुल गलत हैं।

क्योंकि किसी ने कहा हैं, ”हम गरीब पैदा हुए हैं, इसमें हमारा कोई दोष नहीं हैं। लेकिन, हम गरीब रहते ही मर गए तो इसमें हमारा दोष हैं। इसलिए, अगर आप राजा की तरह जीवन यापन करना चाहते हो तो उसके गुलाम की तरह मेहनत करना सीख लो तभी राजा बन पाएंगे। यह जीवन की एक कटु सत्य बात हैं।

नैतिक सीख:

मेहनत और लगन वह चाबी हैं, जिससे जीवन में हर बंद दरवाजे खुल जाते हैं।

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5. अपने आप की कीमत:

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रोहन स्कूल से वापस आते समय अपने दोस्तों के साथ एक चाय की टपरी पर चाय के साथ सिगरेट का कश लगा रहा था। उसी रास्ते से उसके पापा ऑफिस से घर जा रहे थे। रोहन को ऐसा करते हुए उसके पापा ने देख लिया। रोहन जब घर आया तो देखा उसके पापा सोफ़े पर बैठकर टीवी देख रहे थे। रोहन भी अपने कपड़े बदल कर पापा के पास बैठकर टीवी देखने लगा।

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टीवी में किसी व्यक्ति को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया। उसके नीचे लिखा था सिगरेट पीना स्वस्थ के लिए हानिकारक हैं। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती हैं। रोहन के पापा ने पूछा, “इस प्रचार से तुमने क्या सीखा? रोहन ने कहा सिगरेट नहीं पीना चाहिए।”

रोहन के पिता ने उसे समझाते हुए कहा, “जिस तरह से हम लाख दो लाख की गाड़ी में पेट्रोल की जगह केरोसीन अथव डीजल नहीं डालते। क्योंकि हमें पता हैं कि उसका इंजन खराब हो जाएगा। ठीक उसी प्रकार भगवान का दिया हुआ शरीर अमूल्य हैं जिसमें आप बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, और शराब जैसी नशीली चीजों को डाल रहे हो।

जिसके लिए आप जरा सा नहीं सोचते कि अगर शरीर का एक पार्ट लिवर, किडनी और हार्ट को बदलना पड़े तो हम करोड़ों रुपये दे कर भी पहले जैसा नहीं कर सकते। “जरा सोचो आप पूरी दुनिया के लिए एक व्यक्ति हो। लेकिन आप हमारे लिए पूरी दुनिया हो।” पापा की बातों को सुनकर रोहन का सिर शर्म से झुक गया। उस दिन से रोहन ने गलत तरीके और गलत दोस्तों का साथ छोड़ दिया।

नैतिक सीख:

अपने ऊपर काम करो, क्योंकि कहा जाता हैं स्वास्थ्य ही धन हैं।

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