छोटी कहानियां हिन्दी में – Story in Hindi Small

📅 Published on June 24, 2025
🔄 Updated on March 29, 2026
You are currently viewing छोटी कहानियां हिन्दी में – Story in Hindi Small
AI generated illustration

छोटी कहानियाँ कम शब्दों में बड़ी सीख देती हैं। यहाँ 7 छोटी कहानी हिंदी में दी गई हैं जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए रोचक हैं। ये कहानियाँ सरल भाषा में हैं और चित्र सहित पढ़ने में और भी अच्छी लगती हैं। इस तरह की कहानियां मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन भी करती हैं। जोकि, निम्न प्रकार से लिखित हैं:

1. आलसी व्यक्ति और सेफ्टी पिन:

idler-and-safety-pin
Image sources: leonardo.ai

एक आलसी व्यक्ति था, जिसका नाम वाल्टर था। वह कोई काम धंधा नहीं करता था। पूरे दिन किसी पार्क में बैठकर लोगों के साथ गप्पे मारता, बच्चों के साथ खेलता। शाम को थक हारकर घर आता और खाना खाकर पैर पसार कर सो जाता था। अगले दिन फिर उसका वही हाल रहता था। वह आलस के कारण किसी काम धंधे को करने की भी नहीं सोचता था।

उसका घर बड़ी मुश्किल से उसकी पत्नी चलाती थी। वह घर चलाने के लिए पेपर, सब्जियाँ और फलों को बेचती थी। घर-घर जाकर झाड़ू पोंछा भी करती थी। लेकिन, अगर कभी उसने अपने पति से कुछ पैसे मांग लिए तो वह उसके ऊपर चिल्ला उठता था। आगे से बोलता था, “तुम इतने पैसे कमाती हो उसका क्या करती हो।” उसकी बातों को सुनकर वह चुप हो जाती थी।

एक दिन सुबह-सुबह उसकी पत्नी को काम पर जाना था। उसने अपने आलसी पति से कहा, “जल्दी उठो और बाजार जाकर बटन ले आओ। मुझे काम पर जाना हैं, मेरे कपड़े की बटन टूट गई हैं।” आलसी पति ने सोचा, “इतनी सुबह-सुबह उठकर बाजार कैसे जाऊँ? उसने अपने पास पड़े दो तीन इंच के तार को मोड़कर एक आकर बना दिया। उसे अपनी पत्नी को देते हुए कहा, “लो बटन की जगह इसको लगा लो।”

उसकी पत्नी जल्दी में थी उसने उस मुड़े हुए तार को लगा लिया। वाल्टर को उस तार से एक आइडिया आया उसने तार को एक पेपर पर उतारकर एक कंपनी के पास गया। उसने अपना आइडिया कंपनी के मालिक को बताया। मालिक ने उसका फार्मूला 500 डॉलर में खरीद लिया।

उस आइडिया को थोड़ा और सुधार करके उसका नाम सेफ़्टी पिन दे दिया। कंपनी के मालिक ने पहले सप्ताह में लगभग 30,000 सेफ़्टी पिन बेचे। लेकिन जैसे-जैसे लोगों को पता चला। सेफ़्टी पिन की मांग और बढ़ने लगी। कंपनी का मालिक वाल्टर को अब 800 डॉलर की रॉयल्टी भी देने लगा। वाल्टर अब घर बैठे-बैठे अपना गुजारा करने लगा।

नैतिक शिक्षा:

आवश्यकता आविष्कार की जननी हैं।

2. वाणी का प्रभाव:

effect-of-speech
Image sources: leonardo.ai

एक बार राजा रंजीत सिंह अपने मंत्रियों और सिपाहियों के साथ जंगल में शिकार करने निकलने थे। शिकार खेलकर राजा वापस महल को जा रहे थे। राजा को जोरों की प्यास लगी। रास्ते में एक झोपड़ी दिखाई दी। झोपड़ी में एक अंधा व्यक्ति रहता था। राजा ने झोपड़ी से एक लोटा पानी लाने के लिए अपने सिपाही को भेजा।

सिपाही ने झोपड़ी में पहुंचकर अंधे व्यक्ति से कहा, “ओ अंधे! एक लोटा पीने के लिए पानी देना।” अंधे ने कहा, “जा…जा तू सिपाही होगा अपने घर का, तेरे जैसे लोग को एक बूंद पानी नहीं दूँ। सिपाही खाली हाथ वापस राजा के पास लौट आया। राजा ने अपने मंत्री को पानी लेने के लिए झोपड़ी में भेजा। मंत्री झोपड़ी में पहुंचकर बोला, काना महाराज! क्या मुझे एक लोटा पानी मिलेगा?

और कहानी पढ़ें: short moral stories

अंधे ने कहा, “क्षमा करे! मंत्री जी मैं आपको पानी नहीं पीला सकता। कहीं और पानी का जतन करने की कोशिश करें। झोपड़ी से मंत्री भी खाली हाथ वापस चले आए। राजा खुद झोपड़ी में पहुँचे, उन्होंने अपने दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार करते हुए कहा, “महात्मन! क्या मुझ जैसे तुच्छ प्राणी को एक लोटा पीने का जल मिल जाएगा।” प्यास के कारण मेरे कंठ सूखे जा रहे हैं। मुझ पर आपका बहुत बड़ा ऐहसान होगा।

राजा की बातों को सुनकर अंधे व्यक्ति ने राजा से कहा, “हे राजन! आपके लिए मेरा सर्वश निछावर हैं।” उसने राजा को एक लोटा जल पिलाकर कहा, “महाराज! मेरे लिए कोई और सेवा हो तो बताए।” राजा ने कहा, आप मेरे सिपाही और मंत्री को कैसे पहचान गए? अंधे व्यक्ति ने कहा, वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति की वास्तविकता का पता चल जाता हैं।

नैतिक शिक्षा:

इंसान का परिचय उसकी भाषा करवा देती हैं।

3. विद्वत्ता का घमंड:

pride-of-scholarship
Image sources: leonardo.ai

एक बार की बात हैं चंपक वन में चीकू नाम का एक बूढ़ा खरगोश रहता था। वह बहुत पढ़ा-लिखा शास्त्री और प्रचंड विद्वान था। जिसके कारण उस जंगल के सभी पशु-पक्षी और जानवर उसका बहुत आदर और सत्कार करते थे। यहाँ तक कि जंगल के राजा शेर सिंह भी उसकी शरण में विद्या सीखने जाते थे। उसे शास्त्रों का अथाह ज्ञान होने के कारण लोग उसकी विद्वता का लोहा मानते थे।

चीकू खरगोश ने शास्त्रों के ज्ञान में जंगल के सबसे बुद्धिमान पक्षी कोयल और मैना को भी हरा दिया था। इसलिए वह जंगल के राजा शेर सिंह का सबसे प्रिय दोस्त भी बन चुका था। चीकू खरगोश को अपनी बुद्धिमता के ऊपर घमंड होने लगा था। एक दिन चीकू खरगोश तैयार होकर कहीं कथा सुनाने जा रहा था। रास्ते में उसे एक पेड़ पर काले-काले जामुन लदे हुए दिखाई दिए।

जामुन को देखकर पंडित चीकू के मुँह से पानी टपकने लगा। उसने देखा कि उसी जामुन के पेड़ पर तोतों का एक झुंड बैठा था। चीकू खरगोश ने पेड़ के पास जाकर कहा, “मेरे प्यारे बच्चों! क्या कुछ जामुन मुझे भी खाने को मिलेगा?” उन तोतों में मिट्ठू नाम का एक शैतान तोता भी था। उसने कहा, जरूर मिलेगा पंडित जी।

लेकिन “सबसे पहले आप मुझे बताइए कि आप कौन सा जामुन खाएंगे, गर्म जामुन या फिर ठंडा जामुन?” पंडित खरगोश, मिट्ठू तोते की बात सुनकर हँसने लगा। उसने कहा- “गर्म जामुन पेड़ पर कहाँ लगते हैं? मजाक मत करो, जल्दी से जामुन खिला दो।” मुझे लोमड़ी के घर पर कथा सुनाने जाना हैं।

और कहानी देखें: सीख देने वाली छोटी नई कहानियाँ

मिट्ठू तोते ने फिर से कहा, “पंडित महाराज! आप ठहरे इतने बड़े विद्वान, फिर भी आपको पता नहीं हैं कि जामुन गर्म और ठंडे भी होते हैं।” बिना बताए, मैं आपको कौन सा जामुन खिलाऊँ! पंडित महाराज को देर हो रही थी उन्होंने कहा,”चलो देखते हैं गर्म जामुन कैसे होते हैं?” बच्चों मुझे गर्म जामुन ही खिला दो, ठंडे तो बहुत खाएं हैं।

शैतान मिट्ठू तोते ने जामुन की टहनियों को पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगा। जिससे जामुन जमीन पर गिर गए और उनमे मिट्टी लग गई। चीकू खरगोश जामुन उठा-उठाकर फूंक मारकर खाने लगा। चीकू ने हँसते हुए कहा, “बेटा तुम लोगों को विद्वान पंडित चीकू महाराज को ही मूर्ख बनाना था।

ये तो ठंडे जामुन ही हैं। मिट्ठू तोते ने कहा, “पंडित महराज, जब जामुन ठंडे हैं तो फिर आप फूंक मार-मार के क्यों खा रहे हो?” ऐसे तो कोई गर्म चीज ही खाई जाती हैं। मिट्ठू तोते की बातों को सुनकर पंडित चीकू का सिर शर्म से झुक गया। वह अपने आप से बहुत शर्मिंदा हुआ। उसकी विद्वता का घमंड चूर-चूर हो गया। वह बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया।

नैतिक सीख:

घमंड व्यक्ति को हमेशा नीचा दिखाता हैं।

4. सच्चा दोस्त:

एक रात किसी धर्मशाला में कई लोग ठहरे हुए थे। उनमें एक भला और सुलझे दिमाग का आदमी भी था। उसने अपनी रोचक बातों से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। फिर उसने एक सवाल किया, “यहाँ कोई ऐसा है जिसका कोई सच्चा दोस्त हो?” सवाल सुनकर वहाँ कुछ पल के लिए शांति छा गई।

फिर एक व्यक्ति ने कहा, “इस कलयुग में हनुमान की तरह सच्चा दोस्त कहाँ मिलता है।” आजकल के दोस्त तो मतलबी होते हैं। वहाँ बैठे सभी लोग उसके हाँ में हाँ मिला रहे थे। उसे व्यक्ति ने कहा, “फिर तो मैं खुशनसीब हूँ, छोटे बड़े मेरे कई सच्चे दोस्त हैं।” सब चौंक उठे। उनमें से एक ने कहा, “आज के जमाने में जहाँ अधिकतर आदमी स्वार्थ से घिरे होते हैं। ऐसे में आपको कई सच्चे दोस्त कैसे मिल गए?

भले आदमी ने कहा, “इसमें कोई अचरज की बात नहीं है। आज भी सच्चे दोस्तों की कमी नहीं है।” हमारे पास सच्चे दोस्त पाने का सरल तरीका भी है। “क्या तरीका हैं?” सभी उत्सुक हो उठे। उस भले आदमी ने कहा, हमें यह देखने की जरा भी जरूरत नहीं है कि जिसे हम दोस्त बनाना चाहते हैं, वह कैसा है?” हम जैसा दोस्त चाहते हैं, पहले हम स्वयं दूसरे को वैसा बनकर दिखाएं। 

जब दूसरों का सच्चा दोस्त बनेंगे तो एक दिन हमारी अच्छाई बुरे व्यक्ति को जरूर प्रभावित करेगी और उसे सच्चा दोस्त बनने पर मजबूर कर देगी। बस थोड़े धैर्य की जरूरत है। साथ ही अपनी सच्चाई पर हमें भरोसा भी होना चाहिए। भले व्यक्ति ने आगे कहा, “याद रहे, स्वार्थी व्यक्ति को ही सच्चे और अच्छे दोस्त नहीं मिलते। वहाँ बैठे लोगों ने भले व्यक्ति के विचार से बहुत प्रभावित हुए।

नैतिक शिक्षा:

जैसा आप चाहते हैं, पहले वैसे खुद को बनाए।

छोटी नैतिक कहानी यहाँ पढ़ें

5. धोबी का आत्मविश्वास:

राघवपुर गाँव में रामलाल नाम का एक धोबी रहता था। वह अपने परिवार का गुजर-बसर लोगों के कपड़े धुलकर करता था। लेकिन, सबसे बड़ी समस्या यह थी कि रामलाल के गाँव में पीने के पानी का संकट था। यही वह कारण था कि उस गाँव से पाँच किलोमीटर दूर दूसरे गाँव के कुएं से लोगों को पानी लाना पड़ता था।

दूसरे गाँव से पानी लाना किसी को अच्छा नहीं लगता था। लेकिन कुआँ खोदने की हिम्मत किसी में नहीं थी। पानी का संकट दिनों-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। अब नदी भी सूख चुकी थी। जिससे रामलाल को कपड़े धुलने में और अधिक परेशानी होने लगी। अब रामलाल और उसके परिवार को पानी लाने के लिए दूसरे गाँव के कई चक्कर लगाने पड़ते थे।

एक दिन रामलाल और उसके परिवार के लोग घड़े लेकर दूसरे गाँव के कुएं पर पानी भरने के लिए पहुँचे। उस कुएं पर उसी गाँव के लोग पानी भर रहे थे। तभी किसी ने रामलाल से कहा, “तुम लोग इंतजार करो, पहले इस गाँव के लोग पानी भरेंगे फिर तुम लोग पानी भरना। इस बात का रामलाल ने विरोध किया तो दूसरे गाँव वालों ने कहा, “इतनी जल्दी रहती हैं तो तुम लोग अपने गाँव में कुआँ क्यों नहीं खोद लेते।”

उन लोगों की बात रामलाल के दिल से लग गई। उसी दिन रामलाल ने निश्चय किया कि चाहे जो हो जाए। वह गाँव में कुआँ खोदकर ही मानेगा। उसने अपने घर के सामने कुआँ खोदना शुरू किया। गाँव वालों ने कहा, “रामलाल तुम्हारा दिमाग तो ठीक हैं न, अपने गाँव की जमीन कंकड़ और पत्थर से भरी हुई हैं। यहाँ पर कुआँ खोदना आसान नहीं होगा।

रामलाल ने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया। उसने जिद्द करके एक जगह पर कुएं की खुदाई करना शुरू कर दिया। उसके घर वालों ने रामलाल का साथ दिया। जिससे रामलाल का काम कुछ आसान होता चला गया। धीरे-धीरे उस गाँव के नवजवान लड़को ने भी रामलाल का साथ देना शुरू कर दिया। जिससे रामलाल को साहस और बल मिलने लगा।

कई दिनों के अथक प्रयास के बाद एक दिन रामलाल और उसके गाँव वाले लोगों की मेहनत रंग लाई। जिस काम को असंभव समझ रहे थे। वह रामलाल की कोशिशों से संभव हो गया। उन्हें कुएं में पानी मिल गया। जिससे पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ पडी। अब रामलाल को पानी के लिए दूसरे गाँव जाने की जरूरत नहीं थी। इस तरह रामलाल की मेहनत और आत्मविश्वास के कारण गाँव के लोगों को मीठा पानी मिलने लगा।

नैतिक सीख:

मेहनत लगन और आत्मविश्वास सफलता की राह दिखाती हैं।

6. सच्चा देशप्रेम:

आरव, रोहित और समीर तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे। तीनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे। एक दिन उनकी मैडम ने देशप्रेम की एक कहानी सुनाई। कहानी सुनकर आरव बोला, “मैडम जी! मैं भी पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बनकर सेना में जाऊँगा। अपने देश की सीमा की रक्षा करूँगा।” ‘शाबाश आरव!’ मैडम ने कहा।

रोहित ने कहा, ‘मैडम जी मैं भी पढ़-लिखकर नेता बनूँगा और अपने देश का नाम दुनिया में रौशन करूँगा।’ मैडम ने कहा, अच्छी बात हैं। इस तरह से सभी बच्चों ने अपनी-अपनी इच्छाएं बताई। सबसे आखिर में समीर ने कहा, “मैडम जी मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहता हूँ।

तभी आरव और रोहित बोल पड़े,”गरीब की सेवा करना कोई देशप्रेम थोड़ी हैं” यह तो पैसा कमाने का एक जरिया हैं। मैडम जी ने कहा, “मरीजों की सेवा करना भी देशप्रेम हैं। क्योंकि, वे भी देश के नागरिक हैं। मैडम ने आरव और रोहित से पूछा कि जब सैनिक घायल होते हैं तो उनका इलाज कौन करता हैं? जब नेता बीमार होते हैं तो उनका इलाज कौन करता हैं? यदि देश में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा आती हैं तो उनका इलाज कौन करता हैं।

सभी बच्चों ने एक स्वर में बोले, “डॉक्टर!” मैडम ने कहा, तो आप कैसे कह सकते हैं कि डॉक्टर का काम देशप्रेम से नहीं जुड़ा हैं। मैडम ने कहा, “कोई भी काम, पूरी लगन और ईमानदारी के साथ डॉक्टर, इंजीनियर, मजदूर, किसान, शिक्षक करते है तो वह देश प्रेम के अंतर्गत ही आता हैं। क्योंकि, सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी मिलकर एक उन्नत देश के निर्माण में सहयोग करते हैं।

नैतिक सीख:

एक मजबूत देश के लिए हर वर्ग के लोगों का योगदान जरूरी होता हैं।

बच्चों के लिए आसान छोटी कहानी यहाँ पढ़ें:

7. आम का पेड़:

तनुज, एक छोटा सा बच्चा था और उसका मित्र आम का पेड़ था। दोनों एक दूसरे को बहुत अधिक चाहते थे। तनुज उसी पेड़ के साथ खेलता था। धीरे-धीरे तनुज बड़ा होने लगा। अब वह आम के पेड़ के पास खेलने कभी-कभी ही जाता था। एक दिन आम के पेड़ ने तनुज को मिलने के लिए बुलाया। तनुज उससे मिलने के लिए आया। आम के पेड़ ने कहा, “दोस्त! आओ साथ खेलते हैं। मैं अकेला महसूस कर रहा हूँ।”

“नहीं,… मुझे खिलौने से खेलना हैं। मेरे पास पैसे भी नहीं हैं कि मैं खिलौने खरीद सकूँ। तनुज ने मुँह फूलाकर बोला। पेड़ ने तनुज से कहा, “दोस्त! मुझमें लगे इन रसीले आमों को बेचकर तुम अपने लिए खिलौने ले सकते हो।” तनुज रसीले आमों को लेकर चला गया। तनुज कई महीनों तक वापस नहीं लौटा पेड़ उदास रहने लगा।

अचानक एक दिन तनुज वापस लौटा। पेड़ ने खुश होकर कहा, आओ मेरे दोस्त दोनों बातें करें। देखो मैं तुम्हारे बिना उदास रहता हूँ। तनुज ने कहा, “मेरे पास समय नहीं हैं। मुझे अपने परिवार के लिए घर बनाना हैं। लेकिन मेरे पास लकड़ी नहीं हैं। पेड़ ने अपने मित्र को सबसे मजबूत टहनी दे दी। वह लकड़ी लेकर चला गया। पेड़ उसके लौटने का इंतजार करता रहा। लेकिन तनुज उसका हाल-चाल तक लेने नहीं आया।

कुछ महीनों बाद एक दिन तनुज अपने परिवार के साथ पेड़ के पास आया। पेड़ अपने दोस्त को देख फूले नहीं समाया। उसने अपने दोनों हाथ उसके सामने फैलाते हुए कहा, “दोस्त एक बार मेरे गले लग जा, वर्षों हो गए, मुझे तुम्हारे साथ खेले हुए। लेकिन, तनुज ने पेड़ से कहा, “मुझे एक सीधा और लंबा तना चाहिए, जिससे मुझे नाव बनवानी हैं।

पेड़ ने दोस्त को पाने की खुशी में तना काटने के लिए कह दिया।” लेकिन तनुज एक बार फिर पेड़ से दूर चला गया। पेड़ फिर से अकेला और उदास हो गया। एक दिन एक बूढ़ा व्यक्ति पेड़ के पास आया, वह तनुज ही था। पेड़ ने उसे देखकर निराशा से कहा, “मित्र, अब मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं हैं।” तनुज ने कहा- “दोस्त अब मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं बहुत थक चुका हूँ। मैं सिर्फ तुम्हारे पास आराम करना चाहता हूँ।”

दयालु पेड़ ने कहा, मित्र तुम मेरे ठूँठा का सहारा लेकर आराम कर सकते हो। पेड़ अपने पास अपने दोस्त को देखकर बहुत खुश था। तनुज मन ही मन सोचने लगा हमें भी इस पेड़ की तरह दयालु होना चाहिए।

नैतिक सीख:

हमें स्वार्थी नहीं दयालु होना चाहिए।

🙋‍♂️ FAQs – छोटी कहानी हिंदी में

kahanizone-site-icon

Get Beautiful Moral Stories Every Week

Moral stories for kids & adults
Short • Inspiring Easy to Read

📖 Free Story PDF on signup

No spam. Only stories. Unsubscribe anytime.

Leave a Reply