नैतिक सीख से भरपूर हिन्दी कहानियाँ – Hindi moral story

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बच्चों को कहानी सुनाने का प्रमुख उद्देश्य उस कहानी से मिलने वाली सीख के बारे में जानना। इसलिए, बच्चों के माता-पिता आमतौर पर नैतिक सीख के साथ दी हुई कहानियाँ खोजते हैं। कहानीज़ोन अपने हर कहानी में नैतिक सीख के बारें में बताने की कोशिश करते है। आज की इस hindi moral story में हम आपको अच्छी अच्छी शिक्षाप्रद कहानियाँ सुनाने जा रहे हैं। जोकि निम्नलिखित प्रकार से हैं।

1. डरपोक पत्थर:

किसी नदी के किनारे दो पत्थर पड़े थे। दोनों बहुत ही आराम से रहते थे। कभी-कभी पानी की लहरें उन्हे नहला भी देती थी। इस तरह से उनके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। उन्हें सुख-ही सुख था। समय बीतता गया एक दिन एक शिल्पकार पत्थर की तलास में नदी के किनारे आया।

उसने दोनों पत्थर को अपने साथ ले गया। अगले दिन उस व्यक्ति ने छेनी और हथौड़ी लेकर पहले वाले पत्थर को काटने लगा। शिल्पकार ने जैसे ही पहले पत्थर पर हथौड़ी चलाया कि वह पत्थर मुझे मत तोड़ो, मुझे मत तोड़ो कहते हुए चिल्लने लगा। शिल्पकार उस पत्थर को छोड़ दिया। उसने दूसरे पत्थर को उठाया और उसे अपने छेनी और हथौड़ी से उस पत्थर को मूर्ति का रूप दे दिया।

कुछ दिन बाद एक व्यक्ति मूर्ति खरीदने आया। वह उस मूर्ति को ले जा रहा था। तो उसने देखा एक पत्थर पड़ा हैं। उसने पड़े हुए पत्थर को भी अपने साथ ले गया। उस व्यक्ति ने मूर्ति को मंदिर में लगा दिया। जबकि दूसरे पत्थर को मंदिर के बाहर रख दिया। अब लोग छेनी और हथौड़ी से काटे गए पत्थर की मूर्ति पर जल और दूध चढ़ाते उसकी पूजा करते।

जबकि, दूसरे पत्थर पर लोग नारियल तोड़ते जिससे उस पत्थर को पूरे जीवन दर्द झेलना पड़ता रहा। जबकि, मूर्ति बने पत्थर को एक बार दर्द हुआ। लेकिन लोग अब उसकी पूजा करना शुरू कर दिए थे।

नैतिक सीख:

मुश्किलों से डरकर भागने से अच्छा उसका सामना करना चाहिए।

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2. अनमोल खजाना:

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एक समय की बात हैं एक साधु महात्मा किसी गाँव में प्रवचन देने जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति अपने खेत के किनारे मायूस बैठा हैं। साधु महात्मा ने उस व्यक्ति के पास जाकर पूछे। क्या हुआ? तुम इतना उदास क्यों बैठे हो। उस व्यक्ति ने कहा, “महाराज! मेरे पास पैसा कमाने का कोई साधन नहीं हैं। मेरे बच्चे भूखे हैं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू।”

साधु महात्मा ने कहा, “तुम्हारे समस्या का हल हैं मेरे पास, अभी जल्दी में हूँ। वापस आते समय बता कर जाऊंगा।” साधु महात्मा प्रवचन देने चले गए। महात्मा जी को वापस आते समय रात अधिक हो गई। लेकिन उन्होंने आपने वादे के अनुसार उस व्यक्ति के घर पर गए और उससे कहा, “एक बार मैं प्रवचन देकर वापस आ रहा था तो देखा था कि कुछ लोग किसी गाँव से लूटे हुए धन को तुम्हारे खेत में छिपा रहे थे।

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लेकिन मुझे वह जगह ठीक से मालूम नहीं हैं। तुम इस खेत की खुदाई करो, देखना धन तुम्हें जरूर मिलेगा। इतना कहकर साधु अपने कुटिया को चला गया। उस व्यक्ति ने अगली सुबह पूरे खेत खुदाई कई बार किया। लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। उसी रात साधु महात्मा ने उस जोते हुए खेतों में बीज डाल दिया।

अगले दिन बारिश भी हो गई। देखते-देखते उस खेत में गेंहू की अच्छी फसल तैयार हो गई। एक दिन वह व्यक्ति उसी रास्ते से जा रहा था। उसने देखा की उसके खेत में लहलहाते हुए फसल लगे थे। जिसे देख वह व्यक्ति बहुत खुश हुआ।

नैतिक सीख:

मेहनत के बल पर हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं।

3. कोहरे से सीख:

ठंड का महीना था, सीतलहर चल रही थी। सुबह के आठ बजने को थे। लेकिन कोहरा अधिक पड़ने के कारण दो मीटर से अधिक दूर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। राजू को परीक्षा देने जाना था। बाहर का मौसम देखकर ठंड के कारण राजू के दाँत किटकिटा रहे थे। लेकिन राजू बिना देरी किए अपनी साइकिल लेकर परीक्षा देने निकाल पड़ा।

राजू साइकिल बहुत धीरे-धीरे चला रहा था। जैसे-जैसे राजू आगे बढ़ता जाता उसे आगे का रास्ता और दिखाई देने लगता। राजू की आँखों की पलक और बालों पर ओस की बूंदे पड़ी हुई थी। किसी तरह राजू परीक्षा केंद्र तक पहुंचकर परीक्षा दे कर निकला तो मौसम बिल्कुल साफ हो चुका था। वह घर आकर अपने दादा जी से आज की पूरी घटना को बताया।

दादा जी ने कहा, “बेटा राजू तो आज तुमने कोहरे से क्या सीखे? राजू ने कहा, “दादा जी सबसे बड़ी सीख “जीतना रास्ता दिख रहा हैं वहाँ तक चलो, आगे का रास्ता अपने आप दिखने लगेगा। इसके अलाव, मैंने एक और बात सीखी परिस्थितियाँ हमेशा एक जैसी नहीं रहती। आज अगर हमारे जीवन कोहरे की तरह अंधेरा हैं तो एक समय ऐसा भी आएगा कि जीवन में उजाला भी होगा।

नैतिक सीख:

परिस्थितियाँ हमेशा एक जैसी नहीं रहती, कठिन दौर के बाद अच्छा दौर भी आता हैं।

4. संगत की असर:

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सुरेश बहुत ही होशियार लड़का था। उसके अंदर संस्कार कूट-कूट कर भरे थे। वह हमेशा लोगों के निगाह में रहता था। लोग उसकी तारीफ करते थे। कुछ समय बाद सुरेश अपने स्कूल के कुछ ऐसे बच्चों के साथ रहने लगा। जो अपनी खराब हरकतों के कारण लोग आए दिन उनके घर पर शिकायत लेकर जाते थे। बिगड़े हुए दोस्तों के साथ रहते-रहते सुरेश के व्यवहार में भी बदलाव होने लगा।

एक दिन स्कूल से छुट्टी होने के बाद सुरेश अपने दोस्तों के साथ सिगरेट पी रहा था। अचानक उसी रास्ते से उसके पिता घर को जा रहे थे। सुरेश को सिगरेट पीते देख उसके पिता बहुत दुखी हुए। शाम को जब सुरेश घर आया तो उसके पिता ने उसे उसके सामने सिगरेट की डिब्बी रखते हुए कहा, “बेटा, क्या तुम्हें पता हैं यह सिगरेट तुम्हारे जीवन को किस तरह बर्बाद कर सकता हैं।”

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उसके पिता ने काँच का बोतल लिया उसमें सभी सिगरेट को एक-एक करके जला कर डाल दिया। ऊपर से उस बोतल का ढक्कन बंद कर दिया। कुछ समय बाद सुरेश को समझाते हुए कहा, “बेटा! मन लो यह बोतल तुम्हारी शरीर हैं। जिसमें तुम सिगरेट डाल रहे हो उसका प्रभाव जिस तरह यह बोतल काला हो गया हैं। ठीक इसी प्रकार यह तुम्हारे शरीर को प्रभावित करता हैं। पिता की बात सुनकर सुरेश का सिर शर्म से नीचे झुक गया।

नैतिक सीख:

संगत से गुण आते है और संगत से ही गुण जाते हैं। इसलिए हमें अच्छे लोगों की संगत में रहना चाहिए।

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5. गुस्से में निर्णय मत लो:

रामू एक मजदूर आदमी था। उसके घर का गुजारा मजदूरी करने पर ही चलता था। एक दिन रामू मजदूरी करने गया था। उस दिन उसे कोई काम नहीं मिला वह उदास होकर घर वापस चला आया। पूरे दिन घर पर बैठा रहा। वह सोचता रहा कि उसके घर का खर्च कैसे चलेगा। अगले दिन रामू फिर काम की तलाश में बाहर गया।

लेकिन उसे उस दिन भी उसे कोई काम नहीं मिला। वह गुस्से से भर गया उदास होकर घर आया उसने अपनी पत्नी के जेवर को गिरवी रखकर कुछ पैसे ले आया। वह बिना सोचे समझे किसी स्कूल के सामने जूते पालिश करने की दुकान खोल दी। लेकिन उस दिन उसके पास कोई भी जूते पालिश कराने के लिए नहीं आया।

अगले दिन फिर से वह जूते की दुकान खोलकर बैठ गया। लेकिन उसके पास कोई जूते ठीक कराने नहीं आया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके पास लोग क्यों नहीं आ रहे हैं। ग्राहक न आने का प्रमुख कारण उसके दुकान का सही स्थान पर न होना। जोकि बिना जाने समझे जल्दी में फैसला लिया गया था।

नैतिक सीख:

किसी भी निर्णय को सोच समझकर ही लेना चाहिए। गुस्से में आकर लिया गया फैसला नुकसान पहुँचाता हैं।

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