10 Lines Short Moral Stories for Kids | 1 Minute Read

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कहानियाँ शिक्षा और मनोरंजन का एक उत्तम साधन हैं। जिसके माध्यम से हम बच्चों को रोमांचित करते हैं। जब बात छोटी कहानी की हो तो, हम अक्सर ऐसी कहानी खोजते हैं जो कम शब्दों में बड़ी सीख दे जाए। इसलिए आज हम 10 lines short moral stories सुनाने जा रहे हैं। जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं।

1. शिल्पकार और पत्थर की कहानी:

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एक समय की बात हैं, एक शिल्पकार दूर पहाड़ी से दो पत्थर ले आया। जिससे वह मूर्ति बनाना चाहता था। एक दिन शिल्पकार अपनी छेनी और हथौड़ी से पत्थर को मूर्ति का रूप देने जा रहा था। उसने पहले वाले पत्थर पर जैसे ही छेनी और हथौड़ी मारी वह पत्थर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसने कहा, “मुझे मत तोड़ो मुझे बहुत दर्द हो रहा हैं।”

पत्थर की बातें सुनकर शिल्पकार ने उस पत्थर को छोड़ दूसरे पत्थर पर छेनी और हथौड़ी से मूर्ति का रूप देने लगा। धीरे-धीरे छेनी और हथौड़ी की मार सहते-सहते। एक दिन वह पत्थर मूर्ति का रूप धारण कर लिया। एक बार शिल्पकार के पास कुछ लोग मूर्ति लेने आए। वे लोग उस मूर्ति को अपने साथ ले गए। जाते-जाते वह व्यक्ति वहाँ पड़े दूसरे पत्थर को भी अपने साथ ले गया।

मूर्ति को मंदिर में विराजमान कर दिया गया। जबकि, दूसरे पत्थर को मंदिर के बाहर रख दिया। लोग मंदिर में लगे मूर्ति के ऊपर जल और दूध चढ़ाते और उसकी पूजा करते। जबकि बाहर पड़े पत्थर पर नारियल तोड़ते। जिससे दूसरा पत्थर सारी उम्र कष्ट झेलता रहा।

कहानी से सीख: 

अगर हम अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में थोड़ा कष्ट उठा लेंगे, तो हमे पूरी जिंदगी में सुखमय तरीके से बीतेगी।

2. गधा और धोबी की कहानी:

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एक धोबी और उसकी पत्नी गधे पर कपड़े का गट्ठर लाद कर जा रहे थे। रास्ते में उनकी मुलाकात एक पंडित से हुई। पंडित ने धोबी से कहा, “तुम लोग कितने क्रूर और निर्दयी व्यक्ति हो। तुम्हें इस जानवर के ऊपर कपड़े का गट्ठर नहीं लादना चाहिए।” तुमको पाप लगेगा जिसके कारण तुम लोग नरक में जाओगे।

धोबी ने पंडित जी की बात मान ली और कपड़े के गट्ठर को अपने सिर पर रख लिया और गधे को साथ में लेकर चलने लगा। कुछ दूर आगे जाने पर धोबी की मुलाकात एक कुम्हार से होती हैं। कुम्हार कहता हैं “तुम दोनों से बड़ा मूर्ख इस दुनिया में कोई नहीं होगा। गधा साथ में होते हुए दोनों पैदल जा रहे हो। तुम्हें गधे पर बैठ कर जाना चाहिए।” धोबी और उसकी पत्नी गधे पर बैठ कर चलने लगे।

थोड़ी दूर और आगे जाने के बाद धोबी की मुलाकात एक वैद्य से होती हैं। वैद्य ने धोबी से कहा- “तुम्हारे अंदर दया नाम की कोई चीज नहीं हैं, इस मासूम गधे के ऊपर बैठ कर जा रहे हो।” धोबी और उसकी पत्नी गधे पर से उतर गए। वे दोनों गधे को अपने ऊपर उठा कर चलने लगे।

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आगे कुछ दूर चलने पर धोबी की मुलाकात एक भिखारी से होती हैं। जो उन दोनों को देखकर जोर-जोर से हंसने लगा। धोबी और उसकी पत्नी असमंजस में पड़ गए, अब क्या करें।

कहानी से सीख: 

अच्छा करो या बुरा लोग तो कहते रहेंगे।

3. शरारती मेंढक और चींटी की कहानी:

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चींटी और तितली के बीच बहुत गहरी दोस्ती थी। दोनों साथ-साथ खेलते और एक दूसरे के सुख-दुख में सहायता करते थे। एक बार तितली अपने दोस्त चींटी को टापू पर घुमाने ले गई। टापू बीच नदी में था। वहाँ पहुंचकर दोनों बहुत खुश थे। क्योंकि वहाँ पर उन्हें रंग-विरंगे फूल और पेड़ पौधे देखने को मिल रहा था।

उसी टापू पर एक लालची और शैतान मेंढ़क रहता था। एक दिन वह तितली को पकड़ कर खा गया। चींटी टापू के बाहर कैसे जाए। यह सोचकर रो रही थी। तभी उसके पास वह शैतान मेंढ़क आया उसने पूछा, “क्या तुम टापू से बाहर जाने के लिए रो रही हो? चलो मै तुम्हें उस पार छोड़ आता हूँ।” मेंढ़क ने अपनी पीठ पर चींटी को बैठाया और नदी में तैरते हुए चल दिया।

बीच नदी में पहुंचने पर मेंढ़क को शरारत सूझी उसने कहा, “मुझसे अब और नहीं चला जा रहा तुम बहुत भारी हो, तुम अब यही उतार जाओ।” शरारती मेढक ने चींटी को पानी में गिरा कर नदी में मस्ती करने लगा। चींटी नदी में बहते-बहते किसी तरह से पत्ते के सहारे किनारे लगी।

कहानी से सीख: 

हमें कभी किसी के साथ धोखा नहीं करना चाहिए।

4. गरीब बच्चा और आइसक्रीम की कहानी:

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एक छोटा सा लड़का किसी होटल में गया और वहाँ के वेटर से आइसक्रीम के दाम पूछें। वेटर ने उसे दो प्रकार की आइसक्रीम के दाम बताया। लेकिन, लड़का सिर्फ सस्ती वाली आइसक्रीम माँगा, वेटर सोचता है कि लड़का कंजूस है और उसके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं।

लेकिन जब लड़का आइसक्रीम खाकर चला गया, तो वेटर ने देखा कि लड़का उसके लिए 15 रुपए का टिप भी छोड़ गया था। वेटर को समझ आ गया कि लड़के ने टिप देने के लिए अपनी मनपसंद की आइसक्रीम नहीं खाई। वेटर को अपनी गलत सोच का एहसास हुआ। वह लड़के के बारे में गलत धारणा के लिए शर्मिंदगी महसूस किया।

कहानी से सीख: 

यह कहानी आपको बताती है कि किसी भी इंसान के बारे में धारणा बनाने से पहले उसकी सच्चाई जाननी चाहिए।

5. लाचार पत्थर और पानी की कहानी:

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एक नदी में एक गुस्सैल पत्थर रहता था। पत्थर पानी के लहरों से लगातार टकराता रहता था। जिसके कारण पत्थर को बहुत गुस्सा आता और वह दुखी होता। लेकिन पत्थर लाचार था, वह करें भी तो क्या करें। धीरे-धीरे, समय बीतता गया वह पानी से लगातार टकराता रहा। कुछ समय बाद वह पानी से टकराने के कारण चिकना और सुंदर बन गया था।

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एक दिन उसी नदी के किनारे एक पंडित जी घूम रहे थे। उन्हें वह पत्थर दिखा, वे उस पत्थर को अपने साथ ले गए। उसे किसी मंदिर में रख दिया। जिसके कारण लोग उस पत्थर की पूजा करने लगे। उसके ऊपर फूल-माला डालते थे। पत्थर को ऐहसास हुआ कि अगर मैं पानी से टकराकर चिकन नहीं हुआ होता तो आज मैं सड़क पर पड़ा रहता।

कहानी से सीख: 

ठोकरे हमें मजबूत बनाती हैं।

6. कछुआ और खरगोश की कहानी:

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प्रेमवन में एक खरगोश रहता था, जिसे अपनी तेज दौड़ पर बहुत नाज़ था। उस खरगोश को जो भी जानवर मिलता, वह उसे अपने साथ रेस लगाने के लिए कहता। एक दिन वह वन के पास नदी में पानी पीने गया हुआ था। उसी नदी में उसे एक कछुआ दिखाई दिया। खरगोश ने कछुए को अपने साथ रेस लगाने के लिए ललकारा। कछुआ उसके साथ रेस लगाने के लिए तैयार हो गया।

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जंगल के सभी जानवर एकत्र हुए, कछुआ और खगोश में रेस शुरू हुई। खरगोश तेजी से भाग निकला तथा कछुआ धीरे-धीरे चलता रहा। कुछ दूर चलने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो कछुआ अपनी धीमी चाल से आ रहा था। खरगोश और तेज भागने लगा लगभग आधे रास्ते और चलकर खरगोश ने पीछे मुकड़कर देखा तो दूर-दूर तक कछुआ दिखाई नहीं दिया।

खरगोश ने सोचा,”अभी तो कछुआ बहुत पीछे हैं, चलो इस पेड़ के नीचे थोड़ा आराम कर लेता हूँ”। खरगोश की आँख लग गई और वह उस पेड़ के नीचे सो गया। कछुआ अपनी चाल से धीरे-धीरे चलता रहा। देखते ही देखते कछुए ने खरगोश को पीछे छोड़ दिया और अपने लक्ष्य पर पहुँच गया।

कुछ समय बाद खरगोश की आँख खुली और वह तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ भागने लगा वहाँ पहुच कर देखा तो कछुआ पहले से पहुंचा हुआ था। इस प्रकार से कछुए को जंगल के जानवरों ने विजयी घोषित कर दिया। खरगोश को अपने अभिमान पर बहुत पछतावा हुआ।

कहानी से सीख: 

हमें अपने बुद्धिमत्त्वा तथा कामयाबी पर कभी अभिमान नहीं करना चाहिए।

7. चिड़िया और आग की कहानी:

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एक बार की बात हैं एक छोटा सा गाँव रामपुर जहाँ पर सभी लोग बहुत हँसी खुशी रहते थे। एक बार उस गाँव में आग लग गई। गाँव के सभी लोग नदी से पानी भर कर आग को बुझाने की कोशिश करने लगे। आग बहुत भयानक थी जिसके कारण आग को बुझाने में काफी समय लग रहा था।

आसमान में उड़ रही एक चिड़िया ने आग को देखा तो उसका ह्रदय पिघल गया और वह भी अपनी चोंच में नदी से पानी भरकर डालने लगी। उसको ऐसा करते हुए देख नदी के किनारे बैठा एक कौए ने उस चिड़िया से कहा, “क्यों परेशान हो रही हो बहन, तुम्हारे एक-एक बूंद से आग नहीं बुझने वाली और वह जोर-जोर से उसके ऊपर हंसने लगा।”

चिड़िया बड़े मधुर आवाज में कौए से बोली,”भईया आपने वो कहावत तो जरूर सुनी होगी बूंद-बूंद से घड़ा भरता हैं। हमारी छोटी-छोटी कोशिशे हमें बड़ा बनाती हैं। जबकि, हर शुरुआत शून्य से होती हैं”। फिलहाल, जब भी आग बुझाने वालों का नाम लिया जाएगा तो मेरा नाम भी उसमें शामिल होगा। उसकी बातें सुन कौवा शर्मिंदा हो उठा। चिड़िया के ऊपर किए गए टिप्पणी को लेकर उसे बहुत पछतावा होने लगा और कौआ बोला बहन मुझे माफ कर दो।

कहानी से सीख: 

छोटी-छोटी कोशिशों से ही जीवन हम अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

8. बूढ़ा व्यक्ति और छोटी बच्ची की कहानी:

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एक छोटी सी लड़की अपने पिता के साथ ट्रेन में सफर कर रही थी। ट्रेन में एक बूढ़ा व्यक्ति भी बैठा था, जो लड़की को बार-बार देखता और फिर दूसरी तरह मुंह करके रोने लगता। लड़की के पिता को उसकी नज़र ठीक नहीं लग रही थी। उसने बूढ़े व्यक्ति पर घूरने तथा बच्चा चोरी का इल्ज़ाम लगाया।

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बूढ़ा आदमी उसे समझाने की कोशिश करता है कि उस लड़की को देखकर उसे अपनी पोती की याद आ जाती हैं। जोकि, ठीक उसी लड़की की तरह दिखती थी जो कुछ साल पहले मर गई थी, जिसे वह बहुत प्यार करता था। यह कहते हुए बूढ़ा आदमी रोने लगा।

बूढ़े आदमी की बातें सुनकर लड़की के पिता को बहुत दुख हुआ। उसने बुजुर्ग व्यक्ति से माफी मांगी। बूढ़ा आदमी उसे माफ कर दिया। लड़की लड़की उस बूढ़े व्यक्ति को अपना दादा बना लेती है।

कहानी से सीख: 

हमें बिना सोचे समझे बहस नहीं करनी चाहिए।

9. खरगोश और बंदर की कहानी:

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एक जंगल में छोटा सा खरगोश अपने परिवार के साथ रहता था। वह हमेशा बहुत खुश और उल्लासित रहता था। जबकि उसके कारण जंगल के अन्य जानवर भी खुश रहते थे। क्योंकि, खरगोश बहुत चंचल और हंसमुख स्वभाव का था। एक दिन वह खरगोश जंगल से खेलकर अपने घर जा रहा था तो उसकी मुलाकात एक शरारती बंदर से हुई।

बंदर उस खरगोश को डरपोक, निकम्मा, कायर और बहुत कुछ भला-बुरा कहता हैं। जिसके कारण खरगोश सदमें में चला जाता हैं। अब खरगोश पहले की तुलना में बहुत शांत रहने लगा था। हमेशा वह बंदर की बातों के बारें में ही सोचता रहता था। इसके आलवा अब वह जंगल में किसी के साथ खेलता भी नहीं था।

वह सबसे अलग अकेले किसी शांत जगह में बैठना पसंद करता था। एक बार जब वह खरगोश नदी से पानी पी रहा था तो उसकी मुलाकात एक हाथी से हुई। उसने खरगोश की परेशानी का कारण पूछा। खरगोश ने अपनी सारी बात हाथी से बता दी। हाथी ने खरगोश के बच्चे को समझाते हुए कहा,”हमें अपने आपको मजबूत बना कर रखना चाहिए।”

किसी की फालतू बातों का असर अपने ऊपर नहीं पड़ने देना चाहिए। इसके अलावा हाथी ने खरगोश को बहुत सारी बातें बताई। जिसके कारण खरगोश के अंदर दुबारा से वही चेतना आ गई। अब उसके ऊपर किसी की फालतू बातों का कोई असर नहीं पड़ रहा था। इस तरह से खरगोश अब हमेशा खुश रहने लगा था।

कहानी से सीख: 

यह कहानी शिक्षा देती हैं कि हमें अपने आप पर विश्वास रखना चाहिए। अपने ऊपर दूसरों की फालतू बातों का प्रभाव नहीं पड़ने देना चाहिए।

10. चिड़िया और साँप की कहानी:

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पीपल के पेड़ पर एक चिड़िया और उसके बच्चे घोंसले में रहते थे। चिड़िया प्रतिदिन अपने बच्चों के लिए खाना लाने जाती थी। उसके घोंसले के पास एक खतरनाक सांप भी रहता था जो उसके बच्चों को खाना चाहता था। एक दिन जब चिड़िया अपने बच्चों के लिए खाना लेकर लौटी तो उसने देखा कि साँप उसके बच्चों को खाने का प्रयास कर रहा था।

यह सब देख चिड़िया बहुत डर गई और उसे लगने लगा की उसके बच्चों का कोई भविष्य नहीं हैं। यह साँप कभी भी घोंसले में आ सकता हैं। लेकिन, चिड़िया ने एक आग का गोला तेजी से उसके घोंसले के पास आता हुआ देखा। उसे पता था कि वह आग का गोला उसके बच्चे और घोंसले भी जला देगा।

चिड़िया ने तुरंत, उस आग के गोले को अपने पंखों से ढकने की कोशिश की और उसे बुझा भी दिया। जिसके कारण उसके पंख भी जल गए। लेकिन, चिड़िया अपनी जान की प्रवाह किए बिना बच्चों को बचा लेती हैं। उसके इस कार्य को देखकर साँप को बहुत आश्चर्य होता है।

चिड़िया की हिम्मत और अपने बच्चों के प्रति लगाव देख साँप बहुत प्रभावित हुआ। उसे समझ आ गया कि चिड़िया जब आग के गोले से लड़ सकती हैं तो वह मुझे किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगी। वह उस पेड़ को छोड़कर जंगल में चला गया।

कहानी से सीख: 

कोई भी बड़ी से बड़ी परेशानी सामने खड़ी हो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। बल्कि, उसका डट कर सामना करना चाहिए।

🙋‍♂️ FAQs – 10 Lines Short Stories with Moral

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