बच्चों और बड़ों के लिए दिल को छू लेने वाली लोकप्रिय कहानियाँ। इस तरह की कहानियाँ प्रेरणा के साथ-साथ जीवन जीने की कला भी सीखाती हैं। इसके अलावा बच्चे को सकारात्मक सोच के साथ-साथ मनोरंजन भी करवाती हैं। तो चलिए देखते हैं आज की ज्ञानवर्धक हिन्दी कहानियां जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं:
1. निरंतर प्रयास का महत्त्व:

किसी गाँव में मोहनलाल नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत मेहनती और लगनशील व्यक्ति था। वह किसी भी दशा में घबराता नहीं था। बल्कि उसका डटकर सामना करता था। एक बार वह अपने खेत जुताई कर रहा था। गर्मी के कारण वह पसीने से तर-बतर हो चुका था। अचानक उसके सामने इंद्रदेव प्रकट हुए। उन्होंने किसान से कहा, अभी बहुत तेज धूप हैं। थोड़ा आराम कर लो फिर जुताई करना।
लेकिन किसान ने इन्द्रदेव की बात नहीं मानी। इंद्रदेव उसके ऊपर क्रोधित हो उठे। वे बादलों को दस साल तक बारिश न करने का हुक्म दे दिया। इस खबर को सुनकर उस गाँव के सभी किसान अपना-अपना हल पैक करके रख दिए। लेकिन मोहनलाल प्रतिदिन अपने खेत की जुताई करता था।
उसे ऐसा करते देख बादलों के एक मुखिया ने पूछा- “जब तुम्हें पता हैं कि दस साल तक बारिश नहीं होने वाली तो तुम प्रतिदिन खेत की जुताई क्यों जुताई करते रहते हो? किसान ने बड़े नम्र आवाज में जबाब दिए। इस बात की जानकारी मुझे अच्छे से हैं कि दस साल तक बारिश नहीं होगी।
लेकिन मैं प्रतिदिन खेत की जुताई इसलिए भी करता हूँ कि कही मैं हल चलाना न भूल जाऊँ। उसकी बात सुनकर बादलों के मुखिया ने सोचा- “किसान ठीक ही कह रहा हैं।” दस साल में कही हम लोग भी बरसना न भूल जाए। बादलों ने मिलकर तेज बारिश करना शुरू कर दिया। बारिश देख किसान का चेहरा खुशी से खिल उठा।
कहानी से सीख:
जो किसी भी परिस्थितियों में मेहनत करना नहीं छोड़ते, सफलता उनके कदम चूमती हैं।
2. हमेशा सकारात्मक रहे:

एक समय कि बात हैं, एक गौरैया अपने बच्चों के साथ एक गिरे हुए पेड़ के कटोरे में रहती थी। एक दिन वहाँ एक सांप भी आकर रहने लगा। उसे देख गौरैया बहुत डर गई। बारिश का भी मौसम आने वाला था। गौरैया न चाहते हुए भी अपने बच्चों को कही और ले जाना चाहती थी।
एक दिन वह उड़ते-उड़ते नदी के किनारे लगे एक आम के पेड़ पर जाकर बैठी। उसने सोचा यहाँ पर हमें आश्रय मिल जाए तो हमें पानी पीने के लिए दूर भी नहीं जाना पड़ेगा। गौरैया ने उस आम पेड़ से पूछा, “क्या मैं आपके टहनियों में घोंसला बना सकती हूँ?” आम का पेड़ बहुत नम्र था। वह कभी किसी को मना नहीं करता था। लेकिन उसने गौरैया को घोंसला बनाने के लिए मना कर दिया।
इसी तरह की और भी कहानी देखें: प्रेरणादायक चिड़िया की कहानी
गौरैया उस पेड़ से थोड़ी दूर एक दूसरे पेड़ पर घोंसला बनाकर अपने बच्चों के साथ रहने लगी। एक दिन तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश होने लगी। जिसके कारण नदी के किनारे लगा आम का पेड़ नदी में गिरकर पानी के साथ बहता हुआ जा रहा था। पेड़ को पानी में बहते हुए देख गौरैया ने आम के पेड़ से कहा, “क्या तुम्हें याद हैं एक दिन मैं तुमसे आश्रय मांगने आई थी। लेकिन तुमने मुझे मना कर दिया था।
देखो आज तुम्हारी क्या हालत हो गई हैं। पेड़ ने कहा, “प्यारी चिड़िया, तुम्हें छोड़कर आज तक मैंने अपनी टहनियों पर घोंसला बनाने के लिए किसी को मना नहीं किया।” तुम्हें मना करने का मुख्य कारण यह था कि मुझे पता था कि इस बरिश में मैं गिर जाऊंगा। क्योंकि मेरी जड़े बहुत कमजोर हो चुकी थी।
मैं नहीं चाहता था कि तुम और तुम्हारे बच्चे मेरे कारण मारे जाओ। इतने कहते हुए पेड़ पानी बहकर चला गया। गौरैया को अपनी गंदी सोच पर बहुत दुख हुआ।
कहानी से सीख:
जो भी होता हैं अच्छे के लिए होता हैं।
3. भगवान पर भरोसा:

रोहित अपनी माँ के साथ बाजार गया था। उसकी माँ घर के लिए कुछ समान खरीद रही थी। रोहित मासूमियत भरे चेहरे के साथ उस दुकान के सामने खड़ा था। वह दुकानदार को देखकर मुस्कुराए जा रहा था। तभी दुकानदार ने कहा, “बेटा टॉफी ले लो, उसने सामने रखे टॉफी के डिब्बे खोलते हुए कहा, “टॉफी निकल लो बेटा।” लेकिन, रोहित टॉफी नहीं ले रहा था। उसकी माँ ने कहा, ले लो रोहित बेटा। लेकिन फिर भी रोहित ने टॉफी नहीं ली।
दुकानदार उसके पास आकार सभी डिब्बे में से टॉफी निकलकर उसके जेब में भर दिया। जब रोहित और उसकी माँ वापस घर जाने लगे। माँ ने पूछा, रोहित बेटा जब अंकल तुम्हें टॉफी लेने के लिए कह रहे थे तो तुमने टॉफी नहीं ली। लेकिन बाद में तुमने टॉफी ले ली ऐसा क्यों? रोहित बहुत ही मासूमियत भरी आवाज में जबाब दिया- “माँ, अगर मैं अपनी मर्जी से टॉफी लेता तो एक दो टॉफी ही लेता। लेकिन जब अंकल ने दिया तो आपने देखा कि डिब्बे से मुट्ठी भर-भर भरकर टॉफी दिया।
ठीक इसी प्रकार से जब भगवान हमें अपनी मर्जी से देता हैं तो वह हमारी सोच से कई गुना ज्यादा देते हैं। हम बस एक छोटी सी सोच में रहते हैं। क्या पता भगवान हमें उससे भी ज्यादा देने कि सोच रहा हो? हमें उसकी मर्जी में ही खुश रहना चाहिए।
कहानी से सीख:
आपके पास जो कुछ भी हैं उसी में खुश रहे। और भगवान का शुक्रिया करते रहे।
4. लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे:

एक बार एक राजा जंगल से शिकार खेलकर वापस अपने महल को जा रहा था। उसे अचानक बहुत तेज प्यास लगी। उसने अपने सैनिकों को एक कुटिया के सामने रुकने के लिए कहा। राजा अपने घोड़े से उतरकर उस कुटिया में गया। वह महात्मा को प्राणम करते हुए कहा- “क्या मुझे एक लोटा पानी मिल जाएगा।” महात्मा जी आशीर्वाद देते हुए कहा, “आपके शत्रु चिरंजीवी हो।”
महात्मा का आशीर्वाद सुनकर राजा गुस्से से लाल-पीला हो उठा। उसने पानी से भरे लोटे को उठाकर फेंक दिया। और कहा, मुझे आपका आशीर्वाद नहीं चाहिए। कृपया अपना अपना आशीर्वाद वापस ले। आप मेरे शत्रु की मंगलकामना चाहते हैं। आप मेरा हित नहीं चाहते। अब मैं इस कुटिया में एक पल भी नहीं रुकना चाहता। उसने अपने सैनिकों वहाँ से चलने के लिए आदेश दिया।
कुछ इसी तरह की और भी कहानी यहाँ देखें: बुद्धिमान राजा की कहानी
महात्मा जी राजा को रोकते हुए कहा, “राजन् आपने हमारे आशीर्वाद का सही अर्थ नहीं समझा।” जब आपके शत्रु जीवित रहेंगे तो आप हर निर्णय सोच समझकर लेंगे तथा हमेशा चौकन्ना रहेंगे। क्योंकि, बेपरवाह व्यक्ति बहुत जल्द धोखा खाता हैं। इसलिए मैं आपके शत्रु की नहीं बल्कि आपकी मंगलकामना कर रहा था। राजा को ऐहसास हुआ। उन्होंने गुरुजी को प्राणम करके अपने महल को चले गए।
कहानी से सीख:
किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा सचेत रहना चाहिए।
5. गुस्से में लिया गया निर्णय:

एक बार एक व्यक्ति ने थोड़े-थोड़े जोड़े पैसों से एक चमचमाती नई कार खरीदकर लाई। वह व्यक्ति प्रतिदिन सुबह उठते ही अपनी कार को बड़े प्यार से साफ करके उस पर पॉलिस करता था। उसे प्रतिदिन ऐसा करते हुए उसकी एक पाँच साल की बेटी देखती थी। उसे पता था कि उसके पापा उस कार को बहुत प्यार करते हैं। लेकिन वह लड़की अपने पापा से बहुत प्यार करती थी।
एक दिन उस लड़की ने कार पर एक पत्थर से खरोंचकर कुछ लिख रही थी। उसे कार के ऊपर खरोंच लगाते देख उसके पिता ने उसका हाथ तेजी से मरोड़ दिया। जिसके कारण उस बच्ची कि एक अंगुली टूट गई। अस्पताल में लेटे हुए बेटी ने अपने पिता से पूछा, “पापा मेरी अंगुली कब ठीक होगी?” इस बात को सुनकर उसका पिता अंदर से भर आया।
वह गुस्से में आकर कार को लात मारने के लिए गया। उसने जब वह खरोंच को देखा तो। कार पर लिखा था “आई लव यू डैड!” वह व्यक्ति अपने दोनों गुठने के भल वही नीचे बैठकर रोने लगा। तभी उसकी बेटी उसके कंधे पर अपना हाथ रखते हुए कहा,”गाड़ी तो दूसरी आ जाती, लेकिन अगर मुझे कुछ हो जाता तो आप अपने आपको कभी माफ़ नहीं करते।
वह व्यक्ति अपनी बेटी को पकड़कर उसे अपने गले से लगा लिया। उसने कहा, “बेटी मुझे माफ कार दो” मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। कहने का मतलब सिर्फ इतना हैं, “अक्सर हम गुस्से में अपना कितना बड़ा नुकसान कर लेते हैं।” लेकिन उसका ऐहसास बाद में होता हैं। फिर उस समय सिर्फ पछतावा ही होता हैं। इसलिए हमें अपने गुस्से को हमेशा संभाल कर रखना चाहिए।
कहानी से सीख:
क्रोध और गुस्से में लिया गया निर्णय हमेशा दुखदाई होता हैं।
