प्रेरणादायक चिड़िया की कहानी | Chidiya ki kahani

📅 Published on January 8, 2026
🔄 Updated on February 16, 2026
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Image sources: chatgpt

बच्चों को चिड़िया की कहानी सुनने में मनोरजंक लगता हैं। चिड़िया की कहानी उन्हें कई तरह की सीख प्रदान करती हैं। इसके अलावा चिड़िया की कहानी बच्चों को मेहनत और लगन का पाठ भी पढ़ाती हैं। इसलिए कहानीज़ोन के इस लेख में प्रेरणा से भरपूर चिड़िया की कहानी सुनाने जा रही हूँ। जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं:

1. रानू चिड़िया की सीख:

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रानीपुर गाँव के किनारे एक बड़े पीपल के पेड़ पर बहुत सारी चिड़िया रहती थी। उसी पेड़ पर रानू नाम की एक दयालु चिड़िया भी रहती थी। रानू चिड़िया हर किसी के सुख-दुख में साथ देती थी। उससे किसी का दुख नहीं देखा जाता था। उसी पेड़ पर कालू नाम का एक कौवा भी राहत था। वह आए दिन रानू चिड़िया की हमदर्दी का मजाक उड़ता था।

एक दिन रानू चिड़िया ने कालू कौवे को समझाते हुए कहा- “कालू भैय्या, हमें कभी किसी का मजाक नहीं उड़ना चाहिए।” उसकी बातों को सुनकर कालू कौवे ने कहा- “जा..जा.. तुम अपना यह उपदेश किसी और देना। वह जोर से हँसा और आसमान में उड़ गया। कालू कौवे के इस वार्ताव से रानू चिड़िया बहुत दुखी हुई। लेकिन उसने लोगों की मदद करना नहीं छोड़ी।

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एक दिन उसी गाँव में आग लग गई। लोगों में अफरातफरी मची थी। गाँव वाले आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें देख रानू चिड़िया भी नदी से अपनी चोंच में पानी भर-भर कर आग बुझाने लगी। वही पेड़ पर बैठा कालू कौवे ने रानू चिड़िया से कहा, “तुम्हारे एक-एक बूंद पानी से यह आग नहीं बुझ सकती।” क्यों व्यर्थ का समय खराब कर रही हो।

रानू चिड़िया ने कहा- “कालू भैय्या, मुझे भी पता हैं मेरे एक-एक बूंद पानी से आग नहीं बुझने वाली हैं। लेकिन जब भी आग बुझाने वालों की चर्चा होगी तो उसमें मेरा भी नाम आएगा।” इसलिए तुम्हें भी हमारे साथ आना चाहिए। उसकी बातों को सुनकर कालू कौवे का सिर शर्म से नीचे झुक गया। रानू लगातार आग बुझाने का प्रयास करती रही।

उसे ऐसा करते देख गाँव के छोटे-छोटे बच्चे भी लोटे और गिलास में पानी भर-भरकर आग बुझाने का प्रयास करने लगे। बहुत जल्द गाँव वालों ने आग पर काबू पा लिया।

कहानी से सीख:

छोटे-छोटे प्रयास बड़े कामयाबी के ओर ले जाती हैं।

2. टोनी चिड़िया और बूढ़ी अम्मा:

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हरे-भरे जंगल में आम के पेड़ पर टोनी चिड़िया और उसके बच्चे रहते थे। उसी पेड़ के नीचे एक बूढ़ी अम्मा अपनी झोपड़ी में रहती थी। टोनी चिड़िया खाने की तलाश में कही नहीं जाती थी। वह बूढ़ी अम्मा के ऊपर निर्भर रहती थी। बूढ़ी अम्मा, टोनी चिड़िया और उसके बच्चों को खाना दिया करती थी। जिसके कारण टोनी चिड़िया और उसके बच्चे आकाश में उड़ान भरना भूल चुके थे।

एक दिन बूढ़ी अम्मा की तबीयत खराब हो गई। अम्मा ने टोनी चिड़िया से कहा- “तुम अपने बच्चों को लेकर कही और चली जाओ। मेरा कुछ भरोसा नहीं हैं कब मैं प्राण त्याग दूँ।” लेकिन टोनी चिड़िया कही नहीं गई। एक दिन बूढ़ी अम्मा अपनी झोपड़ी से नहीं निकली। टोनी चिड़िया ने झोपड़ी में जाकर देखा तो बूढ़ी अम्मा मर चुकी थी।

टोनी चिड़िया अपने बच्चे को लेकर किसी और जंगल को जाने लगी। वह पानी पीने के लिए एक नदी के किनारे अपने बच्चों को लेकर गई। वहाँ से उसके बच्चे उड़ नहीं पा रहे थे। टोनी चिड़िया को परेशान देख एक कछुए ने पूछा- “क्या बात हैं? तुम कुछ परेशान लग रही हो।” टोनी चिड़िया ने कछुए को सारी कहानी सुना दी। कछुए ने कहा- “बहन तुमने अम्मा की बात न मानकर बड़ी गलती कर दी।”

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अब तुम्हें अपने बच्चों को फिर उड़ना सीखना पड़ेगा। कछुए ने कहा, मेरा एक बगुला दोस्त हैं। मैं तुम्हें उससे मिलवा देता हूँ। वह तुम्हारे बच्चों को फिर से आकाश में उड़ना सीखा देगा। कछुए ने टोनी चिड़िया और उसके बच्चों को बगुला से मिलवा दिया। बगुले ने उसे आसमान में फिर से उड़ना सीखा दिया।

कहानी से सीख:

हमें मेहनत और परिश्रम से पीछे नहीं हटना चाहिए।

3. टुनटुनी चिड़िया और कोहरा:

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किसी जंगल में टुनटुनी चिड़िया अपने बच्चों के साथ रहती थी। टुनटुनी चिड़िया बहुत ही लगनशील और मेहनती थी। वह अपने बच्चों की देखभाल बहुत अच्छे से करती थी। जिसके कारण उसके आसपास की चिड़िया अक्सर टुनटुनी चिड़िया से प्रेरणा लेती थी।

एक बार की बात हैं। पानी को बर्फ बना देने वाली प्रचंड ठंड पड़ रही थी। ओले और शीतलहर भी चल रही थी। दो मीटर के आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इस तरह से दो दिन बीत चुके थे।

जंगल में सभी चिड़िया अपने-अपने घोंसले में बैठी हुई थी। टुनटुनी चिड़िया ने सोचा आज कई दिन हो गए हमारे बच्चे भूखे बैठे हैं। मौसम का कुछ पता नहीं कब तक ऐसे बैठे रहेंगे। वह अपने बच्चों को समझा-बुझा कर उड़ गई। ठंड बहुत ज्यादा थी। जिसके कारण वह अपने पंख फैला नहीं पा रही थी।

उसने फिर भी कोशिश जारी रखा। वह उड़ते-उड़ते एक पहाड़ी पर जा पहुंची। उसने देखा कि उस पहाड़ी पर धूप निकली हुई थी। उसने अपने दोनों पंखों को फैलाकर धूप सेकी। वहीं से अपने बच्चों के लिए खाना लेकर अपने घर को चली गई। उसे बाहर से आते देख। जंगल के अन्य चिड़ियों ने पूछा- “टुनटुनी बहन इतनी ठंड में तुम कहाँ से आ रही हो।”

टुनटुनी छिड़िया पहाड़ी की सारी बात जंगल के चिड़ियाँ को बता दी। सभी चिड़ियाँ हिम्मत करके पहाड़ी की ओर निकल गये। इस तरह से टुनटुनी चिड़िया ने जगल के चिड़ियाँ को एक सबक दे दी। खाली बैठे रहने से कुछ नहीं होगा। हमें बाहर निकलकर अवसर की तलाश करनी पड़ेगी।

कहानी से सीख:

अच्छा समय कभी नहीं आता उसे लाना पड़ता हैं।

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