बच्चों को जानवरों में सबसे पसंदीदा जानवर शेर लगता हैं। क्योंकि शेर जंगल का राजा माना जाता हैं। वह जंगल में किसी भी जानवर से तेज भाग सकता हैं। इसके अलावा वह बलशाली और बुद्धिमान भी होता हैं। इसलिए कहानीज़ोन के इस लेख में बच्चों का मनपसंद शेर की कहानी सुनाने जा रही हूँ। जोकि निम्न प्रकार से हैं:
1. शेर का आतंक:

जंगल के किनारे बसा एक गाँव श्रीपुर था। उस गाँव में सभी एक दूसरे की मदद करते थे। एक दिन उस जंगल में एक शेर रहने के लिए आ गया। जंगल में उसका आतंक बहुत भयानक था। वह छोटे बड़े सभी जानवरों को मारकर खा गया। कुछ महीनों बाद उस जंगल में कोई जानवर नहीं बचे थे। इस बात की खबर गाँव वालों को थी। इसलिए वे उस जंगल की तरफ नहीं जाते थे।
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एक दिन वही शेर भटकते हुए गाँव में घुस आया। वह एक बच्चे को मारकर खा गया। इस खबर से पूरे गाँव के लोगों के अंदर गुस्सा भरा हुआ था। उन्होंने शेर को पकड़ने के लिए गाँव में एक पंचायत जुटाई। लेकिन कोई भी शेर को पकड़ने का सही तरीका नहीं बता सका। तभी एक व्यक्ति ने कहा, “हमें शेर पकड़ने का सही तरीका अपने गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति “पंडित राम सुमेर” ही बात सकते हैं।”
गाँव वाले इकट्ठा होकर पंडित राम सुमेर के पास गये। उनकी बातों को सुनकर पंडित राम सुमेर ने शेर को पकड़ने का तरीका बताया। गाँव वाले हिम्मत जुटाकर जंगल के रास्ते में एक बड़ा गड्ढा खोद दिया। उस गड्ढे में जाल लगाकर ऊपर से हरी-हरी घास से ढक दिया। गड्ढे से थोड़ी दूर एक बकरी बांध दिया। गाँव वाले जाल की रस्सी को लेकर झाड़ी में छिप गए।
एक बकरी म्यां-म्यां की आवाज करने लगी। उसकी आवाज सुनकर शेर बकरी को झपटने दौड़ा, जैसे ही शेर का पैर गड्ढे में गया सभी लोगों ने जाल को खींचकर बांध दिया। इस तरह से शेर जाल में फंस गया। गाँव वालों ने उसे दूर किसी बड़े जंगल में छोड़ आए।
नैतिक सीख:
घमंड का अंत बहुत जल्द होता हैं।
2. बुद्धिमान खरगोश और शेर:

एक बार की बात हैं एक शेर अपने आपको बहुत बलवान समझता था। उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। एक दिन वह भटकते हुए सुंदरवन में जा पहुँचा। उसने देखा की इस वन में बहुत सारे छोटे-छोटे नरम-मुलायम जानवर हैं। वह किसी को भी मारकर आसानी से खा सकता था। उसी दिन से उसने अपना शिकार करना शुरू कर दिया।
उसके डर से जंगल के सभी जानवरों ने एक सभा आयोजित किए। सभा में उन्होंने निर्णय लिया कि हम सभी शेर सिंह के पास जाकर अपनी-अपनी बातें रखेंगे। सभी जानवर मिलकर शेर सिंह की गुफा के पास गए। खरगोश ने कहा- “महाराज हम आपके जंगल में रहते हैं। इसलिए हम लोगों का फर्ज बनाता हैं कि आपके खाने का बंदोबस्त करे। इसलिए हम लोग आपके पास बारी-बारी से आ जाएंगे।
शेर सिंह जंगल के जानवरों की बात सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने सोचा इससे अच्छा और क्या हो सकता हैं। मुझे तो बैठे-बैठाए खाना मिलता रहेगा। उसने कहा, “लेकिन तुम लोग मेरी एक बात का ध्यान रखना। अगर किसी दिन मैं भूखा सोया तो तुम सभी को एक साथ मार दूंगा। सभी जानवर उदास होकर जंगल की तरफ चले गए। उस दिन से एक-एक जानवर शेर सिंह की गुफा में उसका भोजन बनाने के लिए जाते थे।
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एक दिन खरगोश, राजा शेर सिंह के पास जा रहा था। वह बहुत उदास था। वह अभी मरना नहीं चाहता था। शेर सिंह की गुफा में पहुँचने से पहले उसे एक कुआँ दिखाई दिया जोकि पानी से भरा हुआ था। उसके दिमाग में एक विचार आया। वह शेर सिंह के पास पहुँचा तो शेर सिंह गरजकर कहा- “तुम आने में इतनी देर कैसे कर दी।” आज मैं जंगल के सारे जानवरों को मार डालूँगा।
खरगोश बहुत ही नम्र आवाज में कहा – “महाराज की जय हो, देरी के लिए माफी चाहता हूँ।” मैं समय से आपके गुफा के पास आ गया था। लेकिन, गुफा के पहले मुझे एक आपसे भी ज्यादा बलवान शेर ने रोक लिया, वह मुझे खाना चाहता था। लेकिन मैं किसी तरह से बचते हुए आपके पास आया हूँ। उसकी बातों को सुनकर राजा शेर सिंह गुस्से से लाल-पीला हो उठा। उसने कहा- “मुझसे ताकतवर इस जंगल में कोई नहीं हो सकता। आज तुम्हें मारने से पहले मैं उसे मरूँगा।
खरगोश शेर सिंह को लेकर कुएं के पास गया। उसने राजा शेर सिंह को कुएं में देखने को कहा, “शेर कुएं में अपनी गुस्से वाली परछाई देख जोर से दहाड़ मारा। उसने बिना कुछ सोचे समझे कुएं में छलांग लगा दी। कुआँ गहरा होने के कारण शेर बाहर नहीं निकल सका। इस तरह से जंगल के जानवर खतरनाक शेर से मुक्ति पा गए। जंगल के जानवरों ने खरगोश को उसकी बुद्धिमानी के लिए सराहा।
नैतिक सीख:
चतुराई और बुद्धिमानी के बल से बड़ी सी बड़ी समस्या का हल निकला जा सकता हैं।
3. शेर और फकीर:

कबीरपुर गाँव एक जंगल के किनारे बसा था। एक बार उस जंगल में एक खतरनाक शेर रहने के लिए आ गया। शेर के आतंक से गाँव वाले बहुत परेशान थे। गाँव वालों ने बहुत मुश्किलों के बाद किसी तरह से शेर पकड़ कर एक पिंजरे में बंदकर दिया। अब उस गाँव में लोग शेर को देखने के लिए आते थे। एक दिन एक फकीर उसी गाँव से जा रहा था। जहाँ पर शेर पिंजरे में बंद था।
फकीर को देख शेर ने कहा, “बाबा मुझे इस पिंजरे से आजाद करवा दो, मैं इस जंगल को छोड़कर दूर किसी दूसरे जंगल में चला जाऊंगा। बाबा ने कहा, “शेर महराज क्या गारंटी हैं कि तुम बाहर आकर मुझे नहीं मारोगे।” शेर फकीर बाबा के सामने मोटी-मोटी आँसू बाहे जा रहा था। फकीर बाबा को दया आ गई। उसने शेर को पिंजरे से बाहर निकाल दिया।
पिंजरे से बाहर आकर शेर ने कहा, “मैं बहुत दिनों से भूखा हूँ। सबसे पहले तुम्हें मारकर अपनी भूख मिटूँगा।” शेर की बात सुनकर फकीर के पैरों-तले जमीन खिसक गई। वह अपनी जान की भीख मांग रहा था। यह सब नजारा पेड़ पर बैठा एक कौवा देखा रहा था। उसने फकीर से पूछा बाबा क्या बात हैं? तुम शेर सिंह से क्या बातें कर रहे हो। फकीर ने सारी बातें उस कौवे से बात दी।
कौवा बहुत बुद्धिमान था। वह जोर-जोर से हंसने लगा। उसने कहा, मैं मान ही नहीं सकता कि इतना शक्तिशाली शेर पिंजरे में कैद होगा। अगर ऐसा हैं तो मुझे दिखाओ तुमने पिंजरे को कैसे खोला? शेर फिर से पिंजरे में चला गया। मौका पाते ही फकीर बाबा ने पिंजरे का गेट बंद कर दिया। शेर पिंजरे के अंदर जोर-जोर से दहाड़ लगाने लगा। फकीर ने कौवे का धन्यवाद करके वहाँ से चला गया।
नैतिक सीख:
सोच समझकर लिया गया निर्णय लाभ पहुंचाता हैं।
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