Desi Kahani in Hindi : रोमांस और प्यार से जुड़ी 10 देसी लव स्टोरी

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कई वर्ष पहले गाँव के बुजुर्ग लोग अपने बच्चे का रिश्ता बचपन में ही तय कर देते थे। बच्चा बड़ा होने पर उसी लड़की से शादी करता था। बच्चे अपने माता-पिता और बुजुर्ग व्यक्तियों का बहुत सम्मान करते थे। जिससे वे चाहकर भी उनके फैसले को नहीं बदल सकते थे। आज के लेख में इसी प्रकार की 10 desi kahaniyan सुनाने जा रही हूँ, जोकि गाँव से जुड़ी हैं। इन सभी कहानियों को मैंने अपने बुजुर्गों से सुनी हैं। जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं:

1. Desi love story in hindi – बेपनाह प्यार:

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नहरपुर गाँव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। उसकी उम्र लगभग सोलह साल रही होगी। उसके पिता दूध बेचने का काम किया करते थे। राजू पढ़ाई में बहुत तेज था। वह बरहवी कक्षा में पढाई करता था। उसके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। किसी तरह से उसके घर का गुजर-बसर हो रहा था। राजू के पिता की तबीयत ठीक नहीं रहती थी। कभी-कभी राजू अपने पिता की साइकिल लेकर दूध देने जाया करता था।

अचानक एक दिन राजू के पिता की मृत्यु हो गई। राजू अपने पिता को खोने का सदमा बर्दस्त नहीं कर पाया। जिसके कारण उसने स्कूल जाना भी छोड़ दिया। कुछ दिन बाद उसकी माँ राजू को समझाते हुए बोली, “बेटा राजू इस तरह से खामोस बैठे रहने से हमारी समस्या और बढ़ती जाएगी। हमें अनेकों नुकसान का सामना करना पड़ेगा। राजू ने कहा, “माँ मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब मेरी पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा?”

राजू की माँ ने कहा, “बेटा तुम्हारे पिता ने हमें जहाँ छोड़ा हैं, हम वही से फिर शुरुआत करेंगे। अब तुम्हें अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने पिता की तरह दूध भी बेचना पड़ेगा। राजू ने कहा, “माँ मैं अपने घर की परिस्थितियाँ बदलने के कुछ भी करने को तैयार हूँ।” उस दिन से राजू अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर-घर जाकर दूध बेचने लगा। देखते-देखते उसके घर की स्थिति बदलने लगी।

ठंड का महिना था, भयानक कोहरा पड़ रहा था। दो मीटर के आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। उस दिन राजू सुबह-सुबह दूध बेचने जा रहा था। रास्ते में राजू को बचाओ-बचाओ की आवाज सुनाई दी। राजू अपनी साइकिल सड़क के किनारे खड़ी करके आगे गया तो देखा कि एक लड़की तेजी उसकी तरफ भागती चली आ रही थी। राजू ने उस लड़की का हाथ पकड़ कर अपने पीछे छिपा लिया।

बदमाशों ने राजू से कहा, “तुम यहाँ से चले जाओ वरना हम तुम्हें मार देंगे। राजू ने तुरंत एक-एक को मारकर नीचे गिरा दिया। राजू की मार देख दो बदमाश भाग निकले। लेकिन तीसरा बदमाश राजू से काफी देर तक लड़ाई करता रहा। राजू ने उसको भी बहुत मारा। अंत में जाते-जाते उसने राजू के कंधे पर चाकू मार दिया। राजू ने उसे मारने के लिए काफी दूर तक पीछा किया। लेकिन वह जंगल की तरफ भाग कर चला गया।

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राजू वापस अपनी साइकिल के पास आया तो देखा, वह लड़की वही खड़ी थी। उसे देख राजू पहचान गया कि यह तो सेठ धनीराम की बेटी हिना हैं। उसके घर पर वह प्रतिदिन दूध देने जाता हैं। राजू ने उससे पूछा तुम यहाँ कैसे? उसने कहा, “मैं कोचिंग पढ़ने गई थी। बीच रास्ते में मुझे इन बदमाशों ने घेर लिया।” वह बहुत डर हुई थी। जिसके कारण थर-थर-थर काँप रही थी।

राजू ने कहा- “तुम चिंता मत करो, मैंने उन्हे मारकर भगा दिया।” इतना सुनते ही वह राजू को जोर से पकड़कर रोने लगी। राजू ने उसे साइकिल पर बैठाकर उसके घर पर छोड दिया। हिना उस रात सो न सकी। वह तरह-तरह की बातें सोचती रही। मन ही मन उसके दिल में राजू के लिए प्यार उमड़ने लगा। वह सुबह होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।

बेपनाह-प्यार
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सुबह उसके दरवाजे की घंटी बजी। उसने गेट खोला तो देखा राजू दूध लिए खड़ा था। हिना राजू को घर के अंदर आने के लिए कहा। हिना ने राजू को मुस्कुराते हुए धन्यवाद किया। वह राजू के प्रति अपना प्यार जाहिर करने लगी। लेकिन राजू इन सभी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा था।

एक दिन सुबह-सुबह राजू दूध लेकर उसके घर पर आया। उस दिन हिना के घर पर कोई नहीं था। वह बिना कुछ सोचे समझे उसे कसकर अपनी बाहों में पकड़ ली। उसने कहा, “राजू I love you!” मैं तुमसे बेपनाह प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती। राजू मुझे यहाँ से अपने पास ले चलो। राजू ने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह किसी भी बात को मानने के लिए तैयार नहीं थी।

उसने राजू से कहा, “राजू! अगर मेरे जीवन में तुम्हारे अलावा कोई और आया तो मैं अपने आप को खत्म कर लूँगी।” उसकी बातों को सुनकर राजू को बहुत बड़ा झटका लगा। उसने हिना से कहा, “तुम ऐसा कुछ मत करना, मैं तुम्हें अपने साथ ले चलूँगा।” अब राजू और हिना की love story शुरू हो चुकी थी।

एक दिन उन दोनों को बाहें में बाहें डाले हिना के पिता ने देख लिया। उसे दिन उसके पिता ने हिना को बहुत डांटा। जबकि वह राजू के घर जाकर उसको बहुत भला-बुरा कहा। राजू ने उसे सारी बात समझाने की कोशिश की। लेकिन हिना के पिता ने उसकी एक बात भी नहीं सुनी। एक दिन मौका पाकर दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली। राजू और हिना एक साथ रहने लगे। दोनों ने अपने जीवनसाथी के साथ बहुत खुश थे।

2. Desi Kahani – किया हुआ वादा:

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मोहित की उम्र लगभग पाँच साल रही होगी। एक दिन उसके दादा अपने ससुराल गए हुए थे। ससुराल में उनकी अच्छी मेहमान नवाजी हुई। जिससे उसके दादा वहाँ पर कुछ और दिन रुक गए। एक दिन सुबह-सुबह वे खेत से टहलकर वापस घर आ रहे थे। गाँव के बीच रास्ते में एक व्यक्ति ने उन्हें रोककर चाय-नाश्ता करवाने लगा। दादाजी ने देखा कि उनके घर में एक प्यारी गुड़िया खेल रही थी।

दादाजी ने उसे अपने गोद में उठाकर दुलार करने लगे। दादा जी ने बातों-बातों में उस व्यक्ति को वचन दे दिया कि आपके पोती सरिता के साथ हम अपने पोते मोहित की शादी करेंगे। उस समय उस बच्ची की उम्र लगभग चार साल रही होगी। धीरे-धीरे दोनों बच्चे बड़े हो चुके थे। एक दिन सरिता के दादा मोहित के घर पर आए। उन्होंने कहा, “समधी जी कई साल पहले दिए वचन आपको याद हैं ना?”

मोहित के दादा हँसते हुए, हाँ…हाँ क्यों नहीं मुझे अपने दिए हुए वचन अच्छे से याद हैं। सरिता के दादा ने कहा, “तो मेरी समझ से अब दोनों बच्चों के बंधन में बांधने का समय आ चुका हैं। दोनों सहमत हो गए। शादी की तारीख भी पक्की हो गई। अब मोहित सरिता से चुपके-चुपके मिलना भी शुरू कर चुका था। सरिता और मोहित दोनों का लगाव काफी बढ चुका था। दोनों एक दूसरे से बेपनाह प्यार करने लगे थे।

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एक दिन मोहित साइकिल से गिर गया। जिसके कारण उसका एक पैर टूट गया। उसके घर वालों ने प्लास्टर लगवाया। एक दिन उसके दादा सरिता के घर पर गए। वे सरिता के दादा के सामने अपने दोनों हाथों को जोड़ते हुए कहा, “मेरे पोते का एक पैर टूट गया।” अभी उसका इलाज चल रहा हैं। क्या पता वह ठीक हो पाए या नहीं। इसलिए आप अपने पोती के लिए कोई अच्छा लडका देख लो।

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मोहित के दादा की बातों को सुनकर सरिता के दादा ने कहा, “समधी जी हम दोनों मिलकर मोहित को ठीक करने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।” लेकिन हम यह रिश्ता खत्म नहीं करेंगे। जरा सोचो अगर आज मेरी पोती के साथ ऐसा कुछ हुआ होता तो। मोहित के दादा ने सरिता के दादा की बातों को सुनकर उन्हें अपने गले से लगा लिया। कुछ समय बाद मोहित पूरी तरह से ठीक होकर चलने लगा। उसके दादा ने दोनों की धूम-धाम से शादी कर दी। इस तरह से उन्होंने अपना किया हुआ वादा निभा दिया।

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3. Romantic desi kahani – बचपन का प्यार:

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सुरेश और सलोनी दोनों एक साथ पढाई करते थे। सुरेश एक गरीब लोहार का बेटा था। उसके पिता लकड़ियों का काम करते थे। जबकि, सलोनी के पिता सुनार थे। उनकी अच्छी खासी आमदनी थी। सलोनी और सुरेश दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। धीरे-धीरे दोनों बड़े हो रहे थे। उनका प्यार भी एक दूसरे के लिए और बढ़ता जा रहा था। सुरेश सलोनी के दुख-सुख में हमेशा साथ देता था।

एक दिन स्कूल के पिकनिक पर सुरेश ने सलोनी को प्रपोज कर दिया। सलोनी उसे अपने बाहों से लगाते हुए कहा, “Thank you! my life partner” उस दिन से दोनों एक दूसरे को अपना जीवन साथी मनाने लगे। एक दिन दोनों आपस में बातचीत करते हुए घर जा रहे थे। बीच रास्ते में सलोनी के गाँव का एक व्यक्ति उन दोनों को देख लिया। उसने सलोनी के पिता से जाकर सारी बात बता दी।

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सलोनी के पिता ने कहा, “तुम उस लोहार के बच्चे का साथ छोड़ दो, नहीं तो ठीक नहीं होगा।” सलोनी ने कहा, “पापा हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं। बहुत जल्द हम दोनों शादी भी करने वाले हैं। उसकी बातों को सुनकर उसके पिता ने उसे फटकार लगाया। वह गुस्से से भरे हुए सुरेश के घर पहुँच गए। वहाँ पहुंचकर सुरेश से कहा, “तुम मेरे बेटी का साथ छोड़ दो, तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा।”

सुरेश के पिता सलोनी के पिता को समझाते हुए कहा, “सेठ जी हम दोनों की खुशी हमारे बच्चों की खुशी में हैं। इसलिए हम दोनों के लिए अच्छा होगा कि हमें अपने बच्चों का साथ देना चाहिए। लेकिन सलोनी के पिता ने सुरेश के पिता की एक बात नहीं मानी। एक दिन सलोनी और सुरेश ने कोर्ट मैरेज कर लिया। सलोनी सुरेश को लेकर अपने पिता के पास गई।

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सलोनी ने कहा, “पिता जी सुरेश और मैं दोनों बचपन के दोस्त हैं। हम दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। हमने जो कुछ भी किया हैं अपनी मर्जी से किया हैं। उसने आगे और अपने पिता को और बहुत कुछ समझाया। उसके पिता ने कहा, “ठीक हैं बेटा, आप दोनों की खुशी में हमारी भी खुशी हैं। लेकिन हम तुम दोनों की शादी धूम-धाम से करेंगे।

सलोनी के पिता ने सुरेश के घर पर अपनी बेटी का रिश्ता लेकर गए। दोनों परिवार बहुत खुश थे। एक दिन दोनों की बहुत धूम-धाम से शादी हो गई। सुरेश और सलोनी अपने बचपन के प्यार के साथ खुशी-खुशी रहने लगे।

4. Hindi Love Story – पहली मुलाकात:

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ममता एक छोटे से गाँव में रहने वाली लड़की थी। उसकी उम्र लगभग अठारह साल रही होगी। उसका गाँव नदी के किनारे बसा था। वहाँ पर बिजली पानी की समस्या थी। घर में लोग उजाला करने के लिए दीपक और लालटेन का उपयोग करते थे। जबकि पीने का पानी नदी से लाते थे। उस गाँव में जाने के लिए नदी में नाव के सहारे जाना पड़ता था।

एक दिन ममता के मामा मुंबई शहर उसके घर पर आए। गाँव का माहौल उन्हें बहुत पसंद आया। इसलिए वे गाँव में अधिक समय तक रहे। एक दिन वापस घर जाने लगे तो ममता भी अपने मामा के साथ जाने के लिए तैयार हो गई। ममता गाँव से पहली बार बाहर निकली थी। वह शहर की अंधा-धुंध चमक देख चकित हो उठी। यह सब उसने अपने जीवन में पहली बार देखी थी।

मुंबई पहुंचकर ममता बहुत खुश थी। वह प्रतिदिन अपने मामा के बच्चों के साथ नई-नई जगह घूमने जाती थी। उसके मामा के घर के बगल में एक सुंदर पार्क था। जहाँ पर ममता प्रतिदिन घूमने जाती थी। वहाँ बच्चों को खेलते देख उसे बहुत अच्छा लगता था। एक दिन शाम का समय था। ममता पार्क में एक बेंच पर बैठी थी। तभी स्कूल का ड्रेस पहने हुए एक लड़का वहाँ आया। वह भी ममता के बगल बेंच पर बैठ गया।

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रमेश ने ममता से पूछा आप स्कूल नहीं जाती हो। ममता ने रमेश को अपनी सारी कहानी सुना दी। रमेश ने कहा, “क्या आपको पता हैं इस युग में जो इंसान शिक्षित नहीं होता उसे लोग कैसे मूर्ख बना देते हैं। इसलिए तुम्हें भी पढ़ाई करनी चाहिए। धीरे-धीरे ममता और रमेश दोनों काफी देर तक बातें करते रहें। ममता को रमेश की बातें प्रेरणादायक लग रही थी। वह रमेश से बहुत प्रभावित हुई।

उसने रमेश के बारें में भी बहुत कुछ पूछा। ममता एक छोटे से गाँव से थी। वह बहुत भोली और मासूम लड़की थी। उसके सवाल सुनकर रमेश खिलखिलाकर खूब हँसा। वह समझ गया कि ममता अभी बहुत नादान हैं। उसे इस दुनिया के बारें में बहुत कुछ नहीं पता हैं। लेकिन वह ममता को महसूस होने नहीं दिया कि उसे इस दुनिया के बारें में अधिक जानकारी नहीं हैं। ममता देखने में बहुत सुंदर और मासूम थी।

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रमेश उसकी मीठी-मीठी बातों से बहुत प्रभवित हुआ। उसने ममता से कहा, “क्या तुम पढ़ना चाहती हो? ममता ने कहा, “हाँ मैं पढ़ना चाहती हूँ। उस दिन ममता ने अपने मामा के सामने पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। उसके मामा ने ममता का दाखिला स्कूल में करवा दिया। उसी स्कूल में रमेश भी पढ़ता था। एक दिन स्कूल में दोनों की मुलाकात हुई। रमेश उसे स्कूल ड्रेस में देख बहुत खुश हुआ।

उस दिन से वे दोनों साथ रहने लगे। रमेश और ममता दोनों के अंदर एक दूसरे के प्रति लगाव अधिक था। एक दिन दोपहर की छुट्टी हुई थी। दोनों साथ में लांच कर कर रहे थे। ममता रमेश को एक निगाह से देखे जा रही थी। जबकि, रमेश खाना खाने में लगा था। ममता ने रमेश से “I love you” कहा। उसकी आवाज सुनते ही वह एकाएक उसे प्यार भरी आँखों से देखने लगा। वह उसे अपने गले से लगा लिया।

ममता उसकी बाहों में आकार बहुत खुश थी। उसने कहा, “रमेश तुम्हारी वजह से मुझे एक नई राह मिली हैं, नहीं तो मैं आज अपने गाँव में होती।” देखते-देखते दोनों का प्यार बहुत बढ गया। रमेश अपने घर का इकलौता बेटा था। वह अपने मम्मी-पापा से ममता को मिलवा चुका था। उसके मम्मी पापा भी ममता को बहुत प्यार करते थे। एक दिन ममता के मामा दोनों को साथ-साथ पार्क में बैठे हुए देख लिए।

उन्होंने ममता को समझाया। लेकिन ममता रमेश के बिना नहीं रह पाती थी। वह चुपके-चुपके मिलना शुरू कर दी। एक दिन फिर उसके मामा ने उन दोनों को मिलते हुए देख लिया। उन्होंने ममता को उसके गाँव भेजवा दिया। इस बात का पता रमेश ने लगा लिया। वह अपने मम्मी पापा को लेकर ममता के गाँव पहुँच गया।

ममता अपने गाँव में रमेश को देख बहुत खुश हुई। उसने अपने माता-पिता से सारी बात बता दी। रमेश के माता-पिता ने ममता के माता-पिता को शादी के लिए तैयार कर लिया। वे गाँव में ममता और रमेश की शादी करके उसे मुंबई शहर ले आए। रमेश ममता को अपना जीवन साथी बनाकर बहुत खुश था। उसने ममता से कहा, “हमारी पहली मुलाकात कैसे प्यार में बदल गई। दोनों गले लगकर मुस्कुराने लगे।

UPSC Wala Love | कलेक्टर साहिबा  (हिन्दी में)

इस उपन्यास की मुख्य किरदार एक आईएएस अधिकारी अंजली है।

5. फ्रेशर पार्टी में पहली मुलाकात – Romantic love story:

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मधू इंजीनिरिंग की पढ़ाई के लिए लखनऊ के एक कॉलेज में दाखिला ली थी। वह अपने शहर से निलकर पहली बार किसी महानगर में आई थी। उसके क्लासेज शुरू हो चुके थे। उसके लिए इतने बड़े इंजीनिरिंग कॉलेज में पढ़ना बहुत गर्व की बात थी। धीरे-धीरे तीन चार महीने बीत चुके थे। कॉलेज में फ्रेशर पार्टी होने वाली थी। सभी बच्चे अपने-अपने ग्रुप के साथ तैयारी कर रहे थे।

मधू भी एक ग्रुप के साथ ऐक्ट करने के तैयारी कर रही थी। मधू और पकंज एक साथ तैयारी कर रहे थे। नाटक में पंकज और मधू पति पत्नी का रोल कर रहे थे। पार्टी में पंकज और मधू का किरदार देख बच्चों ने खूब तालियाँ बजाई। इसके अलावा उन दोनों को मिस्टर और मिसेज का अवार्ड भी मिला। मधू और पंकज दोनों अपने परफ़ॉर्मेंस से बहुत खुश थे।

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अगले दिन मधू और पंकज क्लास में एक दूसरे को अपने सामने देखकर स्माइल पास किए। क्लास के बच्चे उन दोनों को मिस्टर और मिसेज के नाम से बुलाने लगे। मधू और पकंज दोनों में नजदीकियाँ बढ़ने लगी। एक दिन पंकज मधू को एक गुलाब देते हुए प्रपोज कर दिया। मधू पकंज के प्यार को स्वीकार कर ली। अब दोनों अक्सर साथ रहते थे।

वे दोनों अपने प्यार को बखूबी बढ़ाने लगे। वे दोनों साथ में घूमना, मूवी देखना शुरू कर दिए थे। दोनों हर एक पल को खूब इंजॉय करते थे। उनकी रोमांटिक लव स्टोरी को एक नई दिशा मिल चुकी थी। कुछ ही महीनों बाद दोनों ने इस रिश्ते के बारें में अपने-अपने घर पर बता दिया। दोनों ने अपने प्यार को जीवनसाथी के रूप में बदल दिया।

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