हरिया नाम का एक गड़ेरिया था। उसके पास बहुत सारी बकरियाँ थी। हरिया को अपनी बकरियों से बहुत लगाव था। वह प्रतिदिन उन्हें घास चराने अपने घर से दूर एक जंगल में ले जाता था। उन्ही बकरियों में रानू नाम की एक बकरी थी। उसके चार बच्चे थे। रानू अपने बच्चों का बहुत ख्याल रखती थी। वह जंगल में किसी भी खतरे से सतर्क रहने के लिए अपने बच्चों को समझाती रहती थी।
उसी जंगल में एक खतरनाक भेड़िया भी रहता था। जोकि गड़ेरिया के डर के कारण उसके बकरियों का शिकार नहीं कर पा रहा था। लेकिन वह प्रतिदिन अपने शिकार के चक्कर में झाड़ी में छिपा रहता था। एक दिन बकरियाँ नदी से पानी पी रही थी। बकरियाँ बहुत चौकन्नी थी। लेकिन वे अपने सामने, दायें और बाएं ही देख रही थी। जबकि वे पीछे नदी की तरफ नहीं देख रही थी। उन्हें लग रहा था की नदी के रास्ते कोई नहीं आ सकता।
उस दिन भेड़िया को मौका मिल गया। वह नदी के रास्ते बकरियों के पास आ पहुँचा। वह चुपके से एक बकरी को पकड़कर उठा ले गया। बाकी बकरियाँ वहाँ से भाग गई। रानू बकरी के एक बच्चे को भेड़िया अपना शिकार बना चुका था। रानू अपने बच्चों को समझाती हैं कि हमें चारों तरफ से चौकन्ना रहना चाहिए। जिससे हमारे ऊपर कोई आक्रमण न कर सके।
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रानू अब अपने बच्चों पर पहले से भी ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। वह अपने बच्चे को खोने के गम में हमेशा रहती थी। अब वह चाहती थी कि उस भेड़िया से कैसे बदला लिया जाए। रानू बकरी ने एक जंगली कुत्ते से दोस्ती कर ली। एक दिन जंगल में बकरियाँ घास चरने गई थी। उनके साथ जंगली कुत्ता भी था।
रानू बकरी ने देखा की जंगल के रास्ते में थोड़े-थोड़े हरी मुलायम घास गिरते हुए झाड़ी की तरफ जा रहे थे। उसका एक बच्चा घास को खाते हुए झाड़ी की तरफ बढ़ रहा था। रानू बकरी को अंदेशा हो गया कि यह भेड़िया की ही चाल हैं। उसने अपने बच्चे को आगे बढ़ने से रोक दिया। रानू ने अपने दोस्त जगली कुत्ते को सारी बात समझा दी।
रानू बकरी घास खाते हुए झाड़ी की तरफ बढ़ रही थी कि अचानक उसके पीछे भेड़िया पड़ गया। मौका पाकर उसका दोस्त जंगली कुत्ता भेड़िया के ऊपर टूट पड़ा और उसे मार डाला। उस दिन से रानू उस जंगल में आजादी के साथ रहने लगी। उसका दोस्त हमेशा उसके साथ राहत था।
नैतिक सीख:
हमें हर तरह से सतर्क रहना चाहिए।

