भोला और माधव दो ग्वालवाल थे। दोनों के पास कई गाय और भैंस थी। भोला बहुत लालची व्यक्ति था। जबकि, माधव के अंदर सब्र संतोष था। दोनों प्रतिदिन दूध लेकर बाजार बेचने जाया करते थे। बाजार के रास्ते में एक नदी पड़ती थी। प्रतिदिन भोला अपने दूध में उस नदी से पानी मिला देता था। जबकि माधव उसे ऐसा करने से मना करता था। लेकिन वह उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था।
भोला के खराब व्यवहार और घटिया दूध की गुणवत्ता के कारण उसके ग्राहक दिनों-प्रतिदिन कम होते चले जा रहे थे। लेकिन, भोला अपने दूध में पानी मिलाना बंद नहीं कर रहा था। गर्मी का दिन था, एक दिन भोला और माधव दूध देकर पैसे वसूलने लगे। दोनों को बाजार में दोपहर हो चुकी थी। वापस घर आते समय भोला और माधव रास्ते में पड़ने वाली नदी में नहाने का मन बनाया।
नदी पहुंचकर दोनों ने अपनी-अपनी साइकिल नदी के किनारे लगे जामुन के पेड़ के साथ खड़ा कर दिया। दोनों ने अपने-अपने कपड़े निकालकर साइकिल पर रखा दिया और नदी में नहाने के लिए चले गए। भोला और माधव को ठंडे-ठंडे पानी से नहाने में बहुत मजा आ रहा था। दोनों घंटों नदी के पानी में नहाते रहे।
अचानक बंदरों का एक झुंड कहीं से नदी के किनारे आ गया। वे भोला के कपड़ों के साथ खेलने लगे। अचानक उसके कपड़े में से एक पैसे की पोटली नीचे गिरी। बंदरों ने उसे लेकर उन पैसों के सिक्कों को एक-एक करके नदी में फेकना शुरू कर दिए। एकाएक भोला की नजर बंदरों के ऊपर पड़ी। वह भागते हुए नदी से बाहर आया और बंदरों के पीछे पड़ गया।
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लेकिन भोला जब तक बंदरों से अपनी पोटली छुड़ा पाता, बंदरों ने आधा पैसा नदी में फेंक चुके थे। भोला अपनी पोटली देख बहुत दुखी हुआ। भोला मायूस नदी के किनारे बैठा था कि उसका दोस्त माधव नदी से बाहर आया और उसके मायूस होने का कारण पूछा। भोला ने पूरी कहानी अपने दोस्त माधव से बता दिया।

माधव ने कहा, “भोला, मेरे दोस्त इसमें चिंता की क्या बात हैं। तुमने जो पैसे दूध में पानी मिलाकर कमाए थे। वही पैसे नदी में गए हैं। मैंने तुम्हें कई बार समझाया था कि छल कपट करके कमाया गया पैसा कभी फलता नहीं हैं। इसलिए, हमें ईमानदारी के साथ पैसे कामना चाहिए।
भोला, ने उसी दिन से प्राण किया कि वह कभी भी गलत काम नहीं करेगा। वह ईमानदारी के साथ पैसे कमाएगा। उसी दिन से भोला दूध में पानी मिलाना बंद कर दिया। देखते-देखते उसके ग्रहाक भी बढ़ने लगे। अब उसके दूध की मांग इतनी अधिक हो गई कि उसका सारा दूध घर पर ही बिक जाता था। अब उसे बाजार में दूध बेचने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
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एक दिन उसकी मुलाकात उसके दोस्त माधव से हुई। उसने पानी से भरा एक केन देते हुए कहा, “भोला भाई लो नदी का पानी, दूध में मिला दो। जिससे तुम्हारी आमदनी और बढ़ जाएगी।” उसकी बातों को सुन भोला को अपने पुराने दिन याद आ गए। दोनों आपस में गले लगकर जोर-जोर से हँसने लगे। भोला ने कहा, “अगर उस दिन बंदर हमारे पैसों को पोटली लेकर नहीं भागे होते तो आज हम यहाँ तक नहीं पहुंचते। इसलिए कहा जाता हैं जो भी होता हैं अच्छे के लिए होता हैं।
नैतिक सीख:
ईमानदारी के साथ कमाया गया धन फलित होता हैं।
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