रोहन एक होनहार बच्चा था। वह बुद्धिमान, चतुर तथा होशियार था। उसकी सबसे अच्छी खासियत यह थी कि वह जानवरों तथा पशु-पक्षियों से बहुत प्यार करता था। वह अपने घर में दो तोते और खरगोश को पाल रखा था। जिसे वह बहुत प्यार करता था। स्कूल से घर आने के बाद वह सबसे पहले तोते और खरगोश के साथ खेलता था। जिससे उसे बहुत खुशी मिलती थी।
एक दिन रोहन स्कूल से घर वापस आ रहा था। अचानक उसे एक छोटा पिल्ला (puppy) दिखा, वह घायल था। उसके पैरों से खून निकल रहा था। रोहन ने आसपास देखा उसे कोई दिखाई नहीं दिया। वह पिल्ले को लेकर अपने घर चला गया। घर पहुँचकर रोहन ने पिल्ले के पैर को साफ करके पट्टी बांध दिया। उसे खाने के लिए दूध और बिस्किट दिया। रोहन ने उस पिल्ले का नाम ‘जैकी’ रखा।

धीरे-धीरे वह पिल्ला ठीक हो गया। अब रोहन और जैकी दोनों दोस्त बन चुके थे। रोहन जैकी को हमेशा अपने साथ रखता था। जैकी भी बिना रोहन के खाना नहीं खाता था। शाम होते ही दोनों घर के सामने वाले बगीचे में खेलने निकल जाते थे। एक दिन रोहन और जैकी बगीचे में खेल रहे थे। तभी सामने से एक बूढ़ी दादी आती दिखाई दी।
दादी को देख जैकी रोहन के पीछे छिपने लगा। पास आकर दादी ने रोहन से कहा, “बेटा यह पिल्ला मेरा हैं, लाओ मुझे दे दो।” रोहन ने कहा, “दादी इसे मैंने सड़क पर घायल अवस्था में पाया था। अब हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके हैं। हम इसे आपको नहीं दे सकते।” जैकी दादी के ऊपर भौंकने लगा। तभी रोहन के दादा भी बगीचे में आ गए। बूढ़ी दादी ने रोहन के दादा से सारी बातें बता दी।
रोहन के दादा ने पिल्ले को बूढ़ी दादी को दे दिया। जैकी को ले जाते देख रोहन रोने लगा। रोहन को उसके दादा ने समझाया कि वे उसे दूसरा पिल्ला ला देंगे। उधर जैकी घर पर खाना-पीना छोड़ दिया था। क्योंकि वह रोहन के साथ ही खाना खाता था। अब वह मायूस रहने लगा। बूढ़ी दादी ने सोचा ऐसे तो यह पिल्ला मर जाएगा। इससे अच्छा है, इसे उस बच्चे को ही दे दें।
बूढ़ी दादी जैकी को लेकर रोहन के घर गई। दरवाजे के सामने जैकी को देख रोहन तेजी से भागकर दादी के पास आ गया। वह जैकी को लेकर अपने गले से लगा लिया। जैकी भी उसे चाटने लगा। रोहन और जैकी का प्यार देख बूढ़ी दादी के आँखों से आँसू छलक आए। उसने रोहन के दादा से कहा- “मुझे माँफ कर दो, उस दिन मुझे जैकी को नहीं ले जाना चाहिए था। लेकिन क्या करूँ मेरे घर में कोई और नहीं हैं।”
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मेरा इस पिल्ले के साथ समय गुजर जाता था। इसलिए इसे मैंने इसे पाल रखा था। एक दिन यह कही भटक गया। जिससे शायद इसकी मुलाकात रोहन से हुई होगी। रोहन के दादा ने कहा- “जब से जैकी घर से गया हैं। रोहन भी ठीक से खाना-पीना नहीं खा रहा। क्योंकि वे दोनों एक साथ ही खाना खाते थे।” रोहन के दादा ने कहा, “क्या आप हमारे यहाँ रुक सकती हो।” आपको जैकी भी मिल जाएगा और रोहन भी खुश रहेगा।
उस दिन से बूढ़ी दादी रोहन के घर पर रहने लगी। अब रोहन, बूढ़ी दादी और जैकी बहुत खुश रहने लगे। एक दिन बारिश हो रही थी। रोहन और जैकी बगीचे में भीगते हुए पानी में खेल रहे थे। अचानक तेज आंधी तूफान आने लगा। जैकी रोहन के ऊपर भौंकने लगा। लेकिन रोहन समझ नहीं पा रहा था कि जैकी क्या कहना चाहत हैं।
जैकी ने रोहन के कपड़े पकड़कर घर की तरफ खींच लाया। अचानक बगीचे का वह पेड उखड़कर नीचे गिर गया। कुछ समय पहले रोहन उसकी पेड़ के नीचे खेल रहा था। यह सब नजारा देख रोहन और उसके घर वाले समझ गए कि जैकी रोहन को बगीचे से खींचकर घर क्यों लाया। रोहन और उसके घर वालों ने रोहन की जान बचाने के लिए जैकी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया।
कहानी से सीख:
हमें एक दूसरे के प्रति ऐहसानमंद रहना चाहिए।
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