5 शिक्षाप्रद मोरल कहानियाँ – Kahani in Hindi

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नैतिक कहानियाँ बच्चों को बहुत बड़ी सीख दे जाती हैं। क्योंकि, बच्चा कहानी को अपने दिमाग में छवि बनाता हैं। जिससे बच्चे का मानसिक विकास तेज गति से होता हैं। आज के इस लेख में हम बच्चों के लिए छोटी-छोटी मोरल कहानियां प्रदान कर रहे हैं। जोकि, निम्न प्रकार से लिखित हैं:

1. अंधेरे का डर:

राजू एक होनहार बच्चा था। वह अपने माता-पिता तथा आस-पास के लोगों को बहुत ही प्रिय था। लेकिन राजू के अंदर एक कमी थी। राजू को अंधेरे से बहुत डर लगता था। वह अंधेरी जगह में जाने से बचता था। उसका डर दूर करने के लिए उसके माता-पिता कई कदम उठा चुके थे। लेकिन राजू का डर उसके मन से जा नहीं रहा था।

एक दिन शाम को राजू अपने घर के सामने खेल रहा था। तभी उसे टिमटिमाता हुआ एक जुगनू दिखाई दिया। राजू उस जुगुनू को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे लग गया। अंधेरा हो चुका था, लेकिन राजू जुगुनू पकड़ने के चक्कर में अपने डर को भूल चुका था। वह किसी झाड़ी पर बैठे जुगुनू को पकड़कर बहुत खुश हुआ। उसे लेकर वह अपने मम्मी-पापा को दिखाने चला गया।

राजू के हाथ में जुगुनू देखकर उसके मम्मी पापा बहुत खुश हुए। उन्हें समझ आ गया की राजू का अंधेर से डर को भगाने के लिए हमें अंधेरे में ही कुछ न कुछ करना पड़ेगा। अब उसके मम्मी पापा कम प्रकाश वाले कमरें में राजू के साथ लुका-छिपी खेलते थे, खेलते-खेलते लाइट भी बंद कर देते थे। देखते-ही-देखते राजू का अंधेरे से डर गायब हो गया।

नैतिक सीख:

हमें मुश्किल लगने वाली चीजों से भागना नहीं, बल्कि उसका सामना करना चाहिए।

2. हर समय बराबर नहीं होता:

रोहित बात-बात में हर किसी के अंदर दोष निकलता रहता था। उसके माता-पिता उसे कई बार समझा चुके थे कि, हमें हर किसी के अंदर उसके गुणों को देखना चाहिए, न की अवगुणों को। लेकिन, रोहित किसी की बातों पर ध्यान नहीं देता था। उसे लोगों के अंदर की बुराइयाँ ही दिखती थी। जबकि अच्छाइयाँ उसे समझ नहीं आती थी।

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एक दिन बहुत गर्मी थी। जिसके कारण घर के पंखे भी काम करना बंद कर चुके थे। रोहित पसीने से तर-बतर था। उसने अपने मम्मी से कहा, “इतनी गर्मी नहीं होनी चाहिए। देखो मेरी हालत कैसी हो गई हैं।” मम्मी ने उसे समझाते हुए कहा, “कोई बात नहीं बेटा, यह गर्मी कुछ ही समय के लिए हैं। यह हमेशा ऐसे नहीं रहने वाली। सब्र रखो सब ठीक हो जाएगा।

उसके अगले दिन तेज मूसलाधार बारिश होने लगी। बारिश के कारण हर जगह पानी-ही-पानी भर गया। रोहित ने अपनी मम्मी से कहा, “मम्मी! इतनी बारिश नहीं होनी चाहिए। देखो हर जगह पानी भर गया हैं। उसकी मम्मी ने रोहित को समझाते हुए कहा, “बेटा! रोहित, प्रकृति भी हमें सीख देती हैं कि यह जीवन एक जैसा नहीं रहता। जैसे, ठंडी, गर्मी, बरसात और पतझड़ कुछ समय के लिए होते हैं। ठीक उसी प्रकार से हमारे जीवन में सुख और दुख कुछ ही समय के लिए होते हैं। जिसके लिए हमें कभी परेशान नहीं होना चाहिए।

नैतिक सीख:

जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा एक जैसी नहीं होती हैं। इसलिए हमें विषम परिस्थितियों में भी घबराना नहीं चाहिए।

3. मेंढक और केकड़े की दोस्ती:

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किसी झील के किनारे एक नीला मेंढ़क रहता था। वह हर किसी के सुख-दुख में साथ देता था। झील के सभी जीव-जन्तु मेंढ़क से बहुत लगाव रखते थे। उसी झील में एक बूढ़ा केकड़ा रहता था। केकड़े और मेंढ़क में गहरी दोस्ती थी। दोनों दोपहर के समय एक टीले पर बैठकर खूब सारी बातें करते थे।

एक दिन उसी झील में एक सांप आ गया। वह धीरे-धीरे मछलियों को खाना शुरू कर दिया। देखते-ही-देखते मछलियों की संख्या में कमी होने लगी। मछलियाँ उस झील के बूढ़े केकड़े के पास गई। उन्होंने नीले मेंढ़क को दोषी बताया। केकड़े ने कहा, “वह ऐसा नहीं कर सकता, मैं उसे अच्छे से जनता हूँ।” लेकिन तुम लोगों के लिए मैं मेंढ़क से बात करूंगा।

केकड़े ने मेंढ़क से सारी बात बता दी। मेंढ़क ने कहा, “हमें जल्द से जल्द पता करना होगा कि मछलियों के संख्या में कमी क्यों हो रही हैं।” एक दिन दोनों ने देखा कि सांप मछलियों को खा रहा था। दोनों ने प्लान बनाया की सांप का अंत कैसे किया जाए। केकड़ा बूढ़ा जरूर था। लेकिन वह ताकतवर था।

दोनों के प्लान के अनुसार, मेंढक ने सांप को लालच दिया। सांप मेंढक को खाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा, केकड़े ने अपने नुकीले पंजों से उसका सिर दबोच लिए। वह तब तक नहीं छोड़ा जब तक वह मर नहीं गया। इस तरह से मेंढक और केकड़े की बुद्धिमानी से मछलियाँ फिर से झील में खुशी-खुशी रहने लगी।

नैतिक सीख:

अपने आप को निर्दोष बताने से कुछ नहीं होगा। उसे साबित करना पड़ता हैं।

4. निरंतर प्रयास का प्रभाव:

भानु आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहा था। लेकिन भानु पढ़ाई में बहुत कमजोर था। उसे पढ़ाया हुआ कुछ याद नहीं रहता था। उसके गुरु ने उसे बहुत समझाया की बिना मन को एकाग्र किए। शिक्षा नहीं ग्रहण कर सकते। लेकिन वह अपने ध्यान को एकाग्र नहीं कर पाता था। एक दिन गुरुजी ने उसे अपने पास बुलाया। उसे समझाते हुए कहा, “शिक्षा तुम्हारे नसीब में नहीं हैं।” आज से तुम आश्रम छोड़कर अपने घर चले जाओ।

गुरुजी ने उसे एक पोटली पकड़ाते हुए कहा, “इस पोटली में सत्तू का आटा हैं। रास्ते में भूख लगे तो खा लेना। भानु पोटली लेकर अपने घर के लिए निकल दिया। रास्ते में उसे भूख और प्यास लग रही थी। उसे एक कुआँ दिखाई दिया। उस कुएं पर एक बूढ़ी दादी पानी भर रही थी। भानु कुएं के पास जाकर दादी से थोड़ा पानी माँगा। उसने सत्तू को गूँद कर खा लिया। पानी पी कर वह तृप्त हो उठा।

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उसने दादी से कहा, “आपने ने पत्थर के पहिये पर निशान क्यों बनाया हैं। दादी ने कहा, “इस पत्थर के पहिये पर निशान रस्सी के हैं। इसे मैंने नहीं, इस रस्सी के बार-बार आने-जाने के कारण बने हैं। इतना सुनते ही भानु सोच में पड़ गया। उसने सोचा जब बार-बार रस्सी के आने-जाने से पत्थर पर निशान बन सकता हैं। तो अगर मैं बार-बार एक चीज को याद करूँ तो क्यों नहीं याद हो सकता।

यही सोचकर भानु ने वापस फिर से आश्रम जाने का निश्चय किया। आश्रम पहुंचकर वह अपने गुरुजी से सारी घटना बात दिया। उसके गुरु जी कहा, “भानु तुमने पत्थर से बहुत बड़ी सीख प्राप्त की हैं।

नैतिक सीख:

लगातार एक ही दिशा में काम करने से सफलता निश्चित ही मिलती हैं।

5. बुद्धि का प्रयोग:

एक बार की बात हैं एक किसान बैलों से अपने खेत की जुताई कर रहा था। एक शेर घूमने निकला था। उसने देखा की किसान दो ताकतवर बैलों से अपने खेत की जुताई कर रहा हैं। उसे आश्चर्य हुआ की ये दोनों बैल किसान के इशारे पर क्यों चल रहे हैं। किसान अपने बैलों को पेड़ के नीचे बांधकर खाना खाने चला गया। शेर बैल के पास आकर पूछा कि, “तुम लोग इतने ताकतवर हो फिर भी किसान का कहना क्यों मानते हो।”

बैल ने शेर को जबाब दिया, “किसान हमारा ख्याल रखता हैं।” वह हमें खाने को देता हैं। इसके अलावा वह हमारे सुख-दुख में साथ देता हैं। सबसे प्रमुख बात किसान के पास बुद्धि हैं। इसलिए, हम लोग किसान की बात मानते हैं। शेर ने पूछा,”बुद्धि क्या चीज होती हैं?” जो मेरे पास नहीं हैं। उसने सोचा मैं इतना ताकतवर और सुंदर भी हूँ। अगर मेरे अंदर बुद्धि आ जाए तो मैं सबसे बलवान हो जाऊंगा।

शेर ने किसान की बुद्धि लेने के लिए उसके खेतों में काम करना शुरू कर दिया। उसे काम करते-करते काफी समय बीत गया। लेकिन उसे कोई नई बुद्धि नहीं मिली।

नैतिक सीख:

किसी को देखकर उसके जैसा बनने का प्रयास नहीं करना चाहिए। सबकी ताकत और कमजोरियाँ अलग-अलग होती हैं।

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