सच्ची घटना पर आधारित – Bhoot Wali Kahani

📅 Published on December 11, 2025
🔄 Updated on February 16, 2026
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कहानीज़ोन के इस लेख में हम आपको सच्ची घटना पर आधारित bhoot wali kahani सुनाने जा रही हूँ। मुझे पूरा विश्वास हैं कि इस तरह की कहानियां आपको अंदर तक झकझोर कर रख देंगी। इसके अलावा आपको डरा भी सकती हैं। इसलिए इस कहानी को मनोरंजन के तौर पर खुले दिमाग से पढ़ें। जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं।

1. नैनीताल हॉस्टल – रूम नंबर 101 की लड़की:

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नैनीताल के एक पुराने गर्ल्स हॉस्टल में रूम नंबर 101 में तरह-तरह की आवाजें आती थी। उस रूम में कोई नहीं रहता था। लेकिन वर्ष 2014 में ज्यादा एडमिशन होने की वजह से गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन नेहा को रूम नंबर 101 की चाबी देते हुए कहा, “नेहा अभी हॉस्टल में कुछ और रूम तैयार हो रहे हैं।” कुछ दिन के लिए इस रूम में रह लो फिर मैं तुम्हें किसी दूसरे रूम में शिफ्ट कर दूँगी।

वार्डन मुस्कुराते हुए नेहा से कहा, “अभी तुम हॉस्टल में नई-नई आई हो थोड़ा सावधान रहना।” अपने रूम की खिड़की और दरवाजों को बंद रखना। स्टडी टेबल पुरानी होने की वजह से कुछ आवाजें आती हैं। कोई दिक्कत हो तो तुम मुझे फोन कर लेना। हॉस्टल में नेहा का पहला दिन था। उसने अपने बैग को अलमीरा में रख दिया। पहली रात मेस में खाना खाकर अपने रूम में सोने के लिए आ गई।

रात को लगभग 1:30 AM पर सररररर… सररररर… कॉपी के पन्ने पलटने जैसी आवाज़ आई। आवाज सुनकर उसे लगा शायद खिड़की खुली होगी। लेकिन उसके कमरे की खिड़की बंद थी। नेहा थोड़ा डर गई, पर उसने खुद को समझाया। “पहाड़ी हवा है… आदत हो जाएगी।” अगले दिन नेहा की मुलाकात उसकी सीनियर मीनाक्षी से हुई। उसने बातों-बातों में पूछ लिया, “नेहा तुम किस रूम में रहती हो।”

नेहा ने कहा, ” रूम नंबर 101 में।” मीनाक्षी ने कहा, “थोड़ा सावधान रहना हो सके तो जल्द से जल्द अपना रूम चेंज करवा लेना।” क्योंकि, उस रूम में मेरे एक सीनियर ने 2012 में फेल होने के डर से सुसाइड कर लिया था। तभी से उस रूम में रात में किताबों के पन्ने पलटने तथा किसी के पढ़ने की आवाज़ें आती हैं। लेकिन नेहा ने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने कहा, “मीनाक्षी मैम आज के इस युग भूत-प्रेत नहीं होते, ओके?”

उस रात नेहा सो रही थी। अचानक किताब के पन्ने पलटने की आवाज आने लगी। वह उठकर स्टडी टेबल के पास जाकर देखी तो मानो अभी-अभी उसकी किताब किसी ने खोली हो। वह थोड़ा डर गई। उसने सोचा, शायद मैंने किताब को खुला छोड़ दिया था। जोकि हवा आने की वजह से फड़फड़ा रही थी। वह किताब को बंद करके वापस जाकर सो गई।

कुछ समय बाद लगभग 2:15 बजे बाथरूम के नल से अचानक पानी टपकने लगा ‘टप-टप-टप-टप… नेहा डरते-डरते बाथरूम तक गई। लेकिन वहाँ कोई नहीं था। अचानक से पानी गिरने की आवाज आना भी बंद हो गई। तभी फिर से उसके स्टडी टेबल से किताब के पन्ने पलटने के आवाज आने लगी।

नेहा ने पीछे पलटकर देखा तो स्टडी टेबल के पास हवा में एक लड़की बैठी थी। उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। उसके पैर ज़मीन में नहीं थे। वह मोटी आवाज में बोली, “मैं पढ़ रही हूँ। इस बार मैं परीक्षा पास कर लूँगी।” तुम भी मेरे साथ आकर पढ़ाई करो। नेहा अपने वार्डन को फोन करने लगी। अचानक से वह लड़की गायब हो गई।

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अगली सुबह नेहा ने वार्डन को रात्री की पूरी घटना सुना दी। वार्डन गहरी सांस लेते हुए बोली – “बेटा सविता एक बहुत ही होशियार लड़की थी। परीक्षा के एक दिन पहले उसके घर से फोन आया कि अगर परीक्षा में फेल हो गई तो घर वापस मत आना। उसी सोच में उसका पहला पेपर खराब हो गया।”

उस रात उसने हॉस्टल के रूम नंबर 101 पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अब भी पढ़ना चाहती हैं। इसलिए वह किताबों के पन्ने पलटते रहती हैं। उस दिन वार्डन ने रूम नंबर 101 को खाली करवा कर नेहा को किसी और रूम में शिफ्ट करवा दिया।

2. अनजाने में पत्नी की हत्या:

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सन् 1972 में दिल्ली के कारोल बाग में कोठी नंबर 17 में सेठ रामनाथ और उनकी पत्नी रहते थे। उसके बहू और बेटे इंग्लैंड में रहते थे। रामनाथ का व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था। कुछ समय बाद उन्हें व्यापार में बहुत बड़ा घाटा लगा। अब सेठ रामनाथ बहुत चिंतित रहने लगे। एक दिन सेठ रामनाथ उदास होकर घर पर बैठे थे। तभी उसकी पत्नी रामनाथ के पास आई।

वह सेठ रामनाथ को समझाते हुए कहने लगी, “जो हुआ सो हुआ, इस बात को लेकर इतना चिंतित नहीं होना चाहिए।” हमारे पास गुजर-बसर करने के लिए पर्याप्त पैसे हैं, सबकुछ भूल जाओ। रामनाथ ने गुस्से में आकर टेबल पर पड़ी चाय की केतली उसके सिर पर फेंक दिया। गहरी चोट लगने के कारण उसकी पत्नी के सिर से तेज खून निकलने लगा। उसे समझ नहीं आया कि यह मैंने क्या कर दिया।

सिर से खून अधिक निकलने के कारण उसकी मौत हो गई। सेठ ने सोचा इस बात के बारें में अगर लोगों को पता चलेगा तो लोग मुझे कातिल कहेंगे। उसने अपनी पत्नी की लाश को घर के आँगन में दफ़ना दिया। इस बात की खबर किसी को नहीं चली। उसने उसी रात घर छोड़कर घूमने के बहाने किसी दूसरे शहर चला गया। एक महीने बाद जब वह अकेले वापस घर लौटा तो उसने अपने आस-पास खबर फ़ैला दी कि उसकी पत्नी खो गई। जिसे वह बहुत खोजा लेकिन नहीं मिल सकी।

अब रामनाथ अपने किए पर बहुत पछता रहा था। एक रात लगभग 2:30 बजे थे रामनाथ अपने बेडरूम में अकेले सो रहा था। अचानक से उसके बेडरूम का दरवाजा किसी ने खटखटाया। रामनाथ डर हुआ था। उसने सोचा मेन गेट खुला था क्या? जिससे कोई मेरे बेडरूम तक आ गया। उसने अपने कमरे का दरवाजा खोलकर देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। वह मेन गेट को देखने चला गया।

लेकिन, मेन गेट में ताला लगा हुआ था। वह वापस अपने रूम में आ गया। वह कमरे की लाइट बंदकर कंबल को ओढ़ने लगा। अचानक उसने देखा कि उसकी पत्नी उसके बगल में लेटी हुई हैं। वह डर गया हड़बड़ाते हुए उठा और लाइट जलाया तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। अचानक से उसके कमरे की लाइट अपने आप बंद हो गई। उसकी पत्नी सविता मोटी आवाज में बोली, “रामनाथ पैसे से इतना प्यार की तुमने अपनी पत्नी को मार डाला।”

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अब वह बहुत डर चुका था। उसने रोते हुए कहा, “सविता मुझे माँफ़ कर दो, मैंने तुम्हें अनजाने मे मारा था।” आज मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि मैं बीते हुए दिनों के ख्यालों में नहीं खोया रहूँगा। सविता ने फिर से कहा, “रामनाथ यह सब यही रह गया। क्या कुछ मैं अपने साथ लेकर गई। ऐसे ही तुम भी एक दिन चले जाओगे। व्यर्थ की चिंता मत करो। अपने जीवन को खुशियों के साथ बिताओ।

अचानक से लाइट फिर से जलने लगी। रामनाथ, सविता… सविता… करके जोर-जोर से रोने लगा। उस दिन उसे ऐहसास हुआ कि मैंने गुस्से में आकार अपना कितना बड़ा नुकसान कर लिया। उसने प्रण किया कि आज से वह अपने बचे हुए हर एक पल को खुशियों के साथ बिताएगा। उसे दिन से रामनाथ अपने आप को पूरी तरह से बदल दिया।

3. मुंबई के राणा प्रताप हॉस्पिटल की नर्स:

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मुंबई में स्थित राणा प्रताप के नाम से एक बहुत बड़ी हॉस्पिटल थी। उस हॉस्पिटल में अनिता नाम की एक नर्स काम करती थी। अनीता किसी भी काम को ढंग से नहीं करती थी। वह मरीजों से बात-बात में झगड़ पड़ती थी। उसे किसी भी पेसेन्ट का देख-भाल करना अच्छा नहीं लगता था। उसकी कई बार शिकायत हो चुकी थी। लेकिन उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा था।

एक दिन सावित्री नाम की औरत की तबीयत खराब हो गई। उसके घर वाले उसे उसी अस्पताल में लेकर आए। डॉक्टरों ने उसका इलाज करना शुरू कर दिया। उसे ब्लड की जरूरत थी। डॉक्टरों ने कहा, “अगर एक घंटे के अंदर इसे ब्लड नहीं चढ़ाया गया तो इसकी मौत हो सकती हैं।” उसके घर वालों ने ब्लड की व्यवस्थ कर दी। उसे ब्लड चढ़ाने लगा। उसके घर वाले उसके बेड के पास बैठे थे।

तभी नर्स अनीता सावित्री के लिए दवाइयां लेकर आई। उसने देखा कि उसके पास कुछ लोग बैठे हैं। उसने गुस्से में उन्हें डांटते हुए। बाहर निकाल दिया। अब सावित्री के पास कोई नहीं था। तभी उसका छोटा बेटा अपनी माँ को देखने के लिए अंदर गया। उसे अंदर जाते हुए नर्स ने देख लिया। वह उसे जोर से डांटकर भगा दिया।

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सावित्री के घर वालों ने नर्स की शिकायत हास्पिटल के अधिकारियों से कर दी। इस बात की खबर उसे पता चल गई। वह गुस्से में आकर ब्लड पाइप निकल दी। जिसके कारण उस औरत की मौत हो गई। कुछ दिन बाद उस औरत की प्रेत आत्मा चुड़ैल बनकर उस अस्पताल में घूमने लगी। एक दिन अनिता की डियूटी रात में थी। वह हॉस्पिटल के पांचवें मंजिल पर पेसेन्ट को दवाएं देने गई थी।

वह लिफ्ट में अकेले नीचे आ रही थी। जैसे ही लिफ्ट बंद हुई। उसके सामने वही औरत आकार खड़ी हो गई। उसकी आँखें लाल-लाल, बाल खुले हुए, सफेद साड़ी पहने हुए थी। उसके पैर नहीं थे। उसे देख अनीता बहुत डर गई। उसने मोटी आवाज में बोली, “पहचाना मुझे, मैं वही सावित्री हूँ, जिसकी तुमने ब्लड की पाइप निकल दी थी। जिसके कारण मेरी मौत हो गई।

अनीता उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी। लेकिन उसने उसकी एक न सुनी। उस प्रेत आत्मा ने उस नर्स को मौत के घाट उतार दिया। अब वह प्रेत आत्मा उसी अस्पताल में रहने लगी। वह वहाँ के बेपरवाह कर्मचारियों को सबक सीखाने का काम करने लगी। इस तरह से उस हॉस्पिटल के सभी कर्मचारी अपनी-अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाने लगे।

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