10 Best Kahani in Hindi – कहानियां हिन्दी में

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कहानियां बच्चों के लिए गागर में सागर भरने जैसा काम करती हैं। क्योंकि यह वही माध्यम हैं, जिससे बच्चा अपने दिमाग में उस कहानी से जुड़े पत्रों की छवि बनाता हैं। इसलिए कहानी प्रमुख तौर पर प्रेरणादायक और मनोरंजन से भरपूर होना चाहिए। हम Kahanizone हर लेख की कहानी बच्चे के अनुसार सुनाने की कोशिश करते हैं। आज की kahani in hindi कुछ इस प्रकार से हैं।

1. हौसला बढ़ाते रहो:

एक समय की बात हैं, कुछ मेंढक उछाल कूद करते हुए अपने घर को जा रहे थे। बीच रास्ते में एक कुएं में दो मेंढक गिर पड़े। उनके साथी मेंढकों ने उन दोनों को निकालने की बहुत कोशिश की। लेकिन सारी कोशिश असफल रही। कुछ समय बाद कुएं के ऊपर बैठे मेंढकों ने अपने दोस्त को आवज लगाते हुए कहने लगे कि अब तुम दोनों बाहर नहीं आ सकते। इसलिए बाहर आने की कोशिश मत करो, कुआँ बहुत गहरा हैं।

एक मेंढक ने अपने दोस्तों की बात सुनकर बाहर निकलने का प्रयास करना बंद कर दिया। जबकि दूसरा मेंढक अपने प्रयास को और बढ़ा दिया। अथक प्रयास के बाद वह बाहर निकल आया। जब उसके दोस्तों ने उससे पूछा कि, “हम लोग तुम्हें कह रहे थे कि बाहर निकलना आसान नहीं हैं।” तो तुम कैसे बाहर आ गए?

मेंढक ने कहा, “मैं जरा ऊंचा सुनता हूँ। जब आप लोग मुझे कुछ कह रहे थे तो। मैंने सोचा आप लोग मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं।” इसलिए मैंने अपने प्रयास को और मजबूत कर दिया। जिससे मैं बाहर निकल आया। जबकि, दूसरे मेंढक ने अपने दोस्तों की बात मानकर वही पड़ा रहा। कुछ दिन बाद वहाँ उसकी मृत्यु हो गई।

नैतिक सीख:

लोगों के ऊपर ध्यान मत दो अपने बनाए वसूलो पर चलो।

2. सच्चा मित्र:

भीम और रामू दो दोस्त थे। एक दिन दोनों जंगल के रास्ते स्कूल जा रहे थे। अचानक दोनों को सामने से एक भालू आता दिखाई दिया। भीम झट से एक पेड़ पर चढ़ गया। जबकि, रामू को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। तभी उसके दिमाग में आया की भालू मरे हुए इंसान को नहीं खाता। रामू तुरंत अपनी श्वास को खींचकर जमीन पर लेट गया।

भालू, रामू के पास आकर उसके नाक और कान के पास सूंघ वह उसे मरा समझकर वहाँ से चला गया। भालू को ऐसा करते हुए दूसरा दोस्त भीम देख रहा था। पेड़ से नीचे आकर अपने दोस्त रामू से पूछा, “मेरे दोस्त, भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था।” रामू ने कहा, “जो संकट में साथ छोड़ कर भाग ले वह दोस्त नहीं हो सकता। रामू का सिर उसके सामने शर्म से झुक गया।”

नैतिक सीख:

सच्चा मित्र वही जो संकट में साथ दे।

3. गुस्सा मत करो:

रीना को बात-बात में गुस्सा आ जाता था। वह गुस्से में किसी को कुछ भी कह देती थी। इस बात को लेकर उसके परिवार के लोग चिंतित रहते थे। उसकी मम्मी ने उसे कई बार समझाया था कि हमें गुस्सा नहीं करना चाहिए। जिसके कारण हमारा चेहरा बिगड़ जाता हैं। लेकिन रीना फिर भी किसी भी बात को लेकर गुस्सा हो जाती थी।

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एक दिन रीना कुर्सी मेज पर बैठकर पढ़ाई कर रही थी। वही नीचे उसका छोटा भाई बॉल से खेल रहा था। अचानक बॉल उछालकर रीना के टेबल पर रखे गुलदस्ते से टकरा गई। गुलदस्ता गिरकर चूर-चूर हो गया। रीना अपने भाई के ऊपर चिल्ला पड़ी। रीना को गुस्सा हुए देख उसकी माँ ने एक आईना लेकर आई। उसने आईना को रीना के सामने रख दिया। आईना में अपना बिगड़ा चेहरा देख रीना का गुस्सा फुर्र हो गया। उसकी माँ ने कहा, देखा आईना कभी झूठ नहीं बोलता।

नैतिक सीख:

गुस्सा आने पर शांत जगह पर अकेले में हो जाए।

4. एक लक्ष्य पर ध्यान दें:

जंगल में एक शेर कई दिनों से भूखा था। उसने सोचा चलो शिकार करने चलते हैं। वह शिकार की खोज में निकाल पड़ा। घंटों बाद दूर झाड़ी में उसे एक खरगोश दिखाई दिया। वह दबे पाँव उस खरगोश को पकड़ने के लिए चल पड़ा। तभी उसे एक हिरण दिखाई दिया। उसने सोचा खरगोश को मारकर भूख नहीं मिटेगी। क्यों न हिरण का शिकार कर लूँ।

शेर हिरण के पीछा करने लगा। हिरण तेज रफ्तार से रास्ता तय कर रहा था। शेर ने हिरण का काफी दूर तक पीछा किया। लेकिन उसने शेर को चकमा देकर किसी और रास्ते से दूसरे जंगल में चला गया। तभी शेर को याद आया कि हिरण का पीछा करने से अच्छा हैं थोड़ा ही सही चलो खरगोश को ही खा लेते हैं। शेर वापस वहाँ पहुंचकर देखा तो वहाँ से खरगोश जा चूका था।

नैतिक सीख:

सफलता के लिए एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती हैं।

5. ईमानदारी:

गर्मियों की छुट्टी में वैभव अपने दोस्तों के साथ जम्मू घूमने के लिए प्लान बना रहा था। उसने अपने पापा से जिद्द करके नया फोन भी ले लिया था। अगले दिन वैभव और उसके दोस्त ट्रेन पकड़कर जम्मू के लिए निकल गए। स्टेशन पहुंचकर उन्होंने एक आटो से होटल के लिए निकल गए। होटल पहुंचकर सभी दोस्त अपने-अपने कमरे में चले गए। फ्रेश होकर वैभव ने सोचा मम्मी को बता दूँ।

लेकिन उसने देखा कि उसके पास फोन नहीं था। वैभव समझ गया कि उसने आटो में अपने पापा से बात की थी। फोन उसी आटो में ही छूट गया हैं। वैभव ने अपने दोस्तों के फोन से अपने फोन पर कॉल किया, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। वह उस आटो वाले को भला-बुरा कहने लगा। तभी उसके कमरे की घंटी बजी।

आटो वाले ने उसका फोन वैभव की तरफ बढ़ाते हुये कहा, “मैं तुम्हारा फोन वापस करने दस किलोमीटर दूर से आ रहा हूँ। ताकि आपकी सोच और नजरिया जम्मू के लोगों दुर्व्यवहार न हो। आप सभी आटो वाले को को चोर की निगाह से देखते। लेकिन, ध्यान रहे आगे से अपने फोन की हिफाजत अपने आप करना।

नैतिक सीख:

अपनी गलती के कारण दूसरों को बदनाम करना ठीक नहीं होता। अपने समान की सुरक्षा खुद करनी चाहिए।

पंचतंत्र की 101 कहानियां (हिन्दी में)

इस किताब में सचित्र पशु-पक्षियों पर आधारित पंचतंत्र की 101 कहानियां, नैतिक शिक्षा के साथ सरल हिन्दी भाषा में लिखित हैं। इन कहानियों को किसी भी उम्र के लोग पढ़ सकते हैं।

6. माँ की शिक्षा:

बच्चा स्कूल से अपने हाथ में एक पत्र लेकर आया। उसने अपनी माँ से कहा, “माँ! आज हमारे क्लास टीचर ने मुझे यह पत्र देकर कहा इसे अपनी माँ को दे देना। माँ ने पत्र खोलकर पढ़ा जिसमें लिखा था। तुम्हारा लड़का मंद बुद्धि हैं। इसे मैंने समझाने का बहुत प्रयास किया। लेकिन इसका मन किसी और चीजों में लगा रहता हैं।

आपका बच्चा किसी भी सामान को खोलता और बनाता रहता हैं। मेरी समझ से इस स्कूल में नहीं किसी मकैनिक की दुकान पर जाने की आवश्यकता हैं। पत्र पढ़कर माँ के आँखों में आँसू भर आए। बच्चे ने पूछा माँ आप क्यों रो रही हो? माँ ने कहा, “आपके टीचर ने पत्र में लिखा हैं कि आपका बच्चा बहुत बुद्धिमान हैं इस स्कूल में आपके बच्चे को पढ़ाने लायक टीचर नहीं हैं।

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इसलिए आप अपने बच्चे को घर पर ही शिक्षा दीजिए। उसी दिन से उसकी माँ ने अपने बच्चे को घर पर पढ़ाने लगी। एक दिन वह बच्चा बल्ब का अविष्कार करके दिखाया। जिसे लोग थॉमस अल्वा एडीसन के नाम से जानते हैं।

नैतिक शिक्षा:

हमें बच्चों के हौसले को उत्साहित करते रहना चाहिए।

7. किस्मत को दोष मत दो:

रामू अपने गुरु का बहुत ही चहेता शिष्य था। वह अपने गुरु की हर बातों को बहुत ध्यान से सुनता था। एक बार उसके गुरु बता रहे थे कि भगवान हर जगह हैं। वह अंतर्यामी हैं कण-कण में हैं, तुम्हारे अंदर हमारे अंदर सभी के साथ भगवान रहते हैं। गुरु की बात रामू को बहुत अच्छी लगी। उसका आत्मविश्वास ऊंचा हो गया।

एक बार एक हाथी के कान में एक चींटी चली गई। हाथी बेकाबू हो उठी हाथी का महावत उसके ऊपर बैठा था। वह सबको कह रहा था कि सामने से हट जाए। हाथी तेजी से जंगल की तरफ भागी जा रही थी। रामू उसी रास्ते से नदी से पानी लेने जा रहा था। उसने देखा सामने से हाथी आ रही हैं। हाथी का महावत तेज-तेज आवाज लगा रहा था कि सामने से हट जाओ हाथी बेकाबू हो चुकी हैं।

रामू ने सोचा इस हाथी के अंदर भी तो भगवान हैं यह मुझको चोट क्यों पहुंचाएगी। रामू ने हाथी के महावत की बात नहीं सुनी। वह रास्ते में ही खड़ा हो गया। हाथी ने उसे उठा कर नहीं में फेंक दिया। रामू को नदी में गिरने से थोड़ा-बहुत चोट आई। वह बहुत गुस्सा हुआ। वह अपने गुरु के पास जाकर सारी घटना को बता दिया।

गुरुजी ने कहा, “हाथी के अंदर भगवान हैं। लेकिन उसके ऊपर बैठे महावत के अंदर भी भगवान हैं।” जो तुम्हें रास्ते से हटने के लिए कह रहा था। जिसकी बात तुमने नहीं मानी।

नैतिक सीख:

दूसरों को दोष देने से पहले अपने आप के द्वारा किए गए गलतियों पर ध्यान देना चाहिए।

8. प्रयास करते रहो:

गुरु अपने शिष्य के साथ किसी यात्रा पर निकले थे। अधिक दूर चलने के कारण गुरुजी का प्यास के कारण गला सुख रहा था। गुरुजी ने अपने शिष्य से कहा, “बेटा! मुझे प्यास लग रही हैं। पानी का बंदोबस्त करो। गुरुजी एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए। शिष्य कमंडल लेकर पानी की तलाश में निकल गया। कुछ दूर जाने के बाद उसे बहता हुआ पानी दिखाई दिया।

लेकिन अचानक कुछ जगली जानवर उस पानी के में आकर बैठ गए। जिससे वह पानी गंदा हो गया। शिष्य वापस अपने गुरु के पास जाकर इस बात को बता दिया। कुछ समय बाद गुरुजी ने शिष्य को फिर से पानी लेने के लिए भेजा। लेकिन पानी अभी दूषित ही था। उसने बिना पानी लिए वापस गुरुजी के पास चला गया।

इस बार गुरुजी शिष्य के साथ स्वयं पानी लेने गए। गुरुजी ने देखा की पानी साफ और निर्मल था। उन्होंने पानी पीकर अपनी प्यास बुझा ली। गुरुजी ने अपने शिष्य से कहा, “इंसान के जीवन में कभी-कभी निराशा जरूर आती हैं। लेकिन वह आपने मार्ग पर प्रयत्नशील हैं तो वह निराश क्षणिक होती हैं।”

इसलिए इस जल की तरह बहते रहो। निरंतर प्रयास करते रहो। तुम्हारे जीवन में आने वाली हर मुश्किलें अपने आप हट जाएंगी।

नैतिक सीख:

जीवन में हमेशा प्रयत्नशील रहना चाहिए। मुश्किलों से डरकर पीछे नहीं हटना चाहिए।

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9. आलस को दूर भगाओ:

रामकुमार नाम का एक व्यक्ति था। वह बहुत मेहनती था। वह शहर जाकर अपने मेहनत के दम पर बहुत सारे पैसे कमा लिया। रामकुमार एक दिन शहर से वापस घर आ गया। उसने कमाए हुए पैसों से अपने बच्चों और पत्नी को नए-नए कपड़े दिलवा दिया। बहुत जल्द उसके सारे पैसे खत्म हो गए। कुछ समय बाद उसको पैसों की दिक्कत होने लगी थी।

एक दिन उसने बाजार से एक लॉटरी का टिकट ले आया। रामकुमार खुदकिस्मत रहा उसकी दस हजार रुपये को लॉटरी लग गई। वह बहुत खुश हुआ। उसने उस पैसे को से फिजूल खर्च करने लगा। वह पैसा भी कुछ समय में खत्म हो गया। रामकुमार ने फिर से कई बार लॉटरी टिकट खरीदा। लेकिन उसे कुछ भी नहीं मिला।

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अब रामकुमार के घर खर्च को चलाना मुसीबत बनता जा रहा था। वह जल्दी पैसा कमाने का कोई न कोई तरीका ही खोजता रहता था। जबकि उसे अब मेहनत करना अच्छा नहीं लगता था। उसके घर के बिगड़ते हालात देख। एक दिन उसका पड़ोसी तेज आवाज में कहा, “मेहनत कर रामकुमार! इसके अलावा पैसे कमाने का कोई और तरीका नहीं हैं। उस दिन से रामकुमार फिर से अपने पुराने अंदाज में वापस आ गया। वह जी तोड़ मेहनत करने लगा।

नैतिक सीख:

आलस वह जंजीर हैं जो इंसान को बांधकर रखती हैं। उसके आगे बढ़ने का मौका भी छीन लेती हैं।

10. मजबूरी का फायदा:

विष्णु घर से मुंबई के लिए रवाना हुआ। दो दिन का सफर तय करने के बाद वह मुंबई स्टेशन लगभग शाम सात बजे पहुँचा। स्टेशन से बाहर आकर उसने एक ऑटो चालक को कागज पर लिखा पता दिखाते पूछा मुझे इस पते पर जाना हैं। कितना पैसा लगेगा। ऑटो चालक ने कहा, “यह जगह स्टेशन से ज्यादा दूर हैं लगभग एक घंटे लगेंगे। इसके लिए मैं 100 रुपये लूँगा।

विष्णु ने कहा, ठीक हैं! चलो मुझे जल्दी ले चलो नहीं तो ज्यादा रात हो जाएगी। ऑटो चालक ने विष्णु के सामान ऑटो में रखकर चल दिया। विष्णु लगभग आधे से ज्यादा रास्ता तय कर चूका था। तभी बीच रास्ते में ऑटो खराब हो गई। ऑटो चालक ने विष्णु से कहा, “अब ऑटो सुबह ही ठीक हो पाएगी। विष्णु ने उसे कुछ पैसा देकर दूसरे ऑटो वाले के पास जाकर पूछा।

उस ऑटो चालक ने विष्णु से कहा हाँ चलेंगे लेकिन किराया 100 रुपया लगेगा। विष्णु उसकी बातों को सुनकर आश्चर्य में पड़ गया। उसने कहा- “मैं इस पते पर जाने के लिए स्टेशन से 100 रुपये के किराये में आ रहा था। लेकिन ऑटो खराब हो जाने की वजह से मुझे दूसरा ऑटो लेना पड़ रहा हैं।” लेकिन उस ऑटो चालक ने विष्णु की बात नहीं मानी।

उसने कई ऑटो वाले से पूछा लेकिन सभी 100 रुपये ही किराया बाता रहे थे। विष्णु ने सोचा धीरे-धीरे रात बढ़ती जा रही हैं। चलो पैदल किसी से पूछते हुए चलते हैं। विष्णु अपना सामान लेकर पैदल-पैदल चलने लगा। उसे पैदल चलते हुए लगभग आधे घंटे बीत चुके थे। वह बहुत थक चूका था। तभी उसे एक ऑटो आता दिखाई दिया। उसने उसे रोका देखा तो वह पहले वाला ऑटो चालक था। जिससे वह किराये के बारे में पूछा था।

विष्णु ने कहा चलो भैया ठीक हैं, मैं 100 रुपये देने के लिए तैयार हूँ। ऑटो ड्राइवर ने कहा, “अब 200 रुपये लगेंगे। क्योंकि रात भी ज्यादा हो चुकी हैं। जबकि मैं अपने घर जा रहा हूँ। विष्णु समझ गया की ऑटो ड्राइवर उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठा रहा हैं। उसने अपना सामान उसके ऑटो में रखा और कहा चलो ठीक हैं मैं 200 रुपये दूंगा। विष्णु को समझ आ गया की कभी-कभी परिस्थितियाँ ऐसी भी आ जाती हैं। जिससे गुजरना पड़ता ही हैं।

नैतिक सीख:

हमें कभी भी किसी के परिस्थितियों का फ़ायदा नहीं उठाना चाहिए।

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