जीवन में सही निर्णय लेना बहुत जरूरी होता है। कई बार लोग बिना पूरी बात समझे दूसरों की बातों में आकर फैसला कर लेते हैं और बाद में पछताना पड़ता है। यहाँ पढ़िए निर्णय लेने की सीख देने वाली 2 सुंदर नैतिक कहानियाँ जो बच्चों और बड़ों दोनों को महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। तो चलिए देखते हैं दोनों कहानियों को:
1. बिल्ली और कुत्ते की कहानी:

सोहन नाम का एक धोबी था। उसने एक कुत्ता और बिल्ली पाल रखा था। दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी। एक बार बिल्ली बिना वजह कई दिनों से म्याऊं-म्याऊं की आवाज निकाले जा रही थी। जिसके कारण धोबी सो नहीं पा रहा था। उसने पता किया कि बिल्ली को कोई दिक्कत तो नहीं हैं। लेकिन, उसे कोई कारण नहीं मिला।
एक दिन धोबी बहुत थका-हारा घर आया और जल्दी खाना खा कर सो गया। कुछ समय बाद बिल्ली फिर से जोर-जोर से म्याऊं-म्याऊं की आवाज निकालने लगी। धोबी गुस्से से भरा हुआ उठा और उसने डंडे से बिल्ली को यह कहते हुए पीटने लगा कि दिन-रात म्याऊं-म्याऊं करती रहती हैं। इससे शांत बैठे नहीं जा रहा।
उसकी पिटाई को देख वहीं बैठा कुत्ता सोचने लगा शांत रहने में ही भलाई हैं। उसी रात चोर को घर में जाते देख कुत्ता नहीं भौंका। जिसके कारण धोबी के घर में चोरी हो गई। सुबह उठ कर धोबी ने कुत्ते की पिटाई करते हुए कहा- “तुम्हें किस लिए पाल रखा हैं।” हमारे घर में चोरी हो गई और तुम मौन बैठे रहे।
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उस कुत्ते ने सोचा कल शोर मचाने के लिए बिल्ली की पिटाई हो गई। और आज शोर न मचाने के लिए मेरी पिटाई हो गई। अब कुत्ता बहुत चिंतित होकर सोचने लगा कि “शांत रहना अच्छा हैं, या बोलना? इसलिए, कहा जाता हैं कि बिना सोचे समझे निर्णय लेना दिशाहीन व्यक्ति की निशानी होती हैं। जिसे आए दिन पछतावा ही मिलता हैं।
नैतिक सीख:
जल्दबाजी में किसी के अनुसार निर्णय लेना खतरनाक साबित हो सकता हैं।
2. अपना घर सबसे प्यारा:

किसी तालाब में तीन मछलियाँ रहती थी। उन तीनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। वे हमेशा एक साथ खाने की खोज में जाती और उन्हें जो भी मिलता उसे मिल बाँटकर खाती थी। एक दिन दोपहर के समय तीनों मछलियाँ आराम कर रही थी। तीसरी मछली ने कहा- “मैं तालाब के किनारे-किनारे चक्कर लगाने जा रही हूँ।”
उसे तालाब के किनारे एक मेंढ़क दिखाई दिया। जोकि एक पत्थर पर बैठ कर टर्र-टर्र कर रहा था। मछली ने कहा- “आप पूरे दिन टर्र-टर्र करते रहते हो थकते नहीं क्या?” मेंढ़क गुस्से भरे स्वर में बोला- “मैं क्यों थकूँगा, मुझे तो टर्र-टर्र करना अच्छा लगता हैं। वैसे तुम एक बात बताओ तुम पूरी उम्र एक ही तालाब में रहते-रहते बोर नहीं होती?”
मुझे देखो मैं कभी एक तालाब से दूसरे तालाब में तो कभी समुद्र तक भी घूम आता हूँ। मुझसे पूँछों यह दुनिया कितनी बड़ी हैं। तुमने तो इस दुनिया में सिर्फ एक ही तालाब देखा हैं। मेंढ़क की बातों को सुनकर मछली उदास होकर और आगे चली गई। तभी वह एक जामुन के पेड़ के पास पहुँची।
उस पेड़ पर एक बंदर बैठा था। बंदर मामा क्या आप मुझे भी जामुन खिलाओगे? बंदर ने मछली को ताना मारते हुए कहा – “तुम लोगों का जीवन बेकार हैं। तुम लोग बस एक ही तालाब में इधर उधर भटकती रहती हो।” मुझे देखो, मैं दिन भर इधर उधर छलांग लगाता रहता हूँ। मैं प्रतिदिन खाने के लिए नई-नई चीजें खोजता हूँ। तुम लोग अपने लिए कोई नया घर क्यों नहीं खोज लेते।
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मछली बंदर की बातों में आ गई। उसने उस तालाब को छोड़ने के लिए मन बना लिया। वह मुँह लटकाए हुए अपने दोनों दोस्तों के पास पहुँची। उसे उदास देख दोनों मछलियों ने उसकी उदासी का कारण जानना चाहा। वह मछली अपने दोनों दोस्तों से कहती हैं – “हम लोग एक तालाब में ही सीमित होकर मर जाएंगे। क्या हम लोगों को पता हैं।” इस दुनिया के बाहर भी बड़ी दुनिया हैं।
उसके दोस्त भी उस मछली के कहने पर आ गए। तीनों उस तालाब को छोड़कर एक नदी में आकर बहुत खुश हो गए। तभी, उन तीनों को एक मगरमच्छ खाने के लिए उनके पीछे पड़ गया। बड़ी मुश्किल से जान बचाते हुए तीनों एक समुद्र में जा पहुंचे। अब वे तीनों वहाँ बहुत खुश थे।
कुछ दिन बाद उन तीनों के पीछे एक बड़ी मछली पड़ गई। किसी तरह से तीनों अपनी-अपनी जान बचाकर अपने पुराने तालाब में आ गई। अब उस तालाब में तीनों आराम से रहने लगी। उन्हे पता चल गया था कि अपना घर सबसे प्यारा होता हैं।
कहानी से सीख:
किसी को देखकर या फिर किसी के कहने पर आकर लिया गया फैसला हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं।
🙋♂️ FAQs – निर्णय लेने वाली नैतिक कहानियाँ
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