बच्चे जानवरों में बंदर की कहानी सुनना अधिक पसंद करते हैं। क्योंकि अधिकतर बच्चे बंदर को देखे हुए होते हैं। इसके अलावा बंदर अपनी बुद्धिमानी और चतुराई के लिए भी जाना जाता हैं। जिससे बच्चों को अधिक सीखने को मिलता हैं। तो चलिए कहानीज़ोन के आज के इस लेख में हम बंदर की कहानियां देखते हैं। जोकि निम्न प्रकार से लिखित हैं:
1. चतुर किसान और बंदर:

कबीर नाम का एक किसान था। वह बहुत बुद्धिमान और चतुर था। वह हर काम को बहुत सोच समझकर करता था। जिसके कारण उसके आसपास के लोग उसकी अधिक तारीफ करते थे। वह अपने फसल की बहुत अच्छे से ध्यान रखता था। एक बार की बात हैं, कबीर अपने खेत में काम कर रहा था। उसकी पत्नी दोपहर का खाना लेकर आई। वह खाने के साथ एक आम भी लाई थी।
कबीर खाना खाकर आम की गुठली को अपने खेत के बगल वाले तालाब के पास फेंक दिया। कुछ वर्षों में वह गुठली पेड़ का रूप ले लिया। देखते-देखते उस पेड़ में मीठे-मीठे रसीले आम लग गए। उस पेड़ पर कई बंदर रहने लगे थे। जिससे उस पेड़ पर लगे आम को कोई तोड़ नहीं पाता था। एक दिन कबीर अपने खेत में बैठा था। उसे अचानक आम तोड़ने का एक विचार आया।
उसने अपने खेत से मिट्टी के छोटे-छोटे गोले उठाकर पेड़ पर मारना शुरू कर दिया। बंदरों को कुछ सुझाई नहीं दिया। बंदरों ने किसान को आम तोड़कर मारना शुरू कर दिया। इस तरह से किसान को बहुत सारे आम मिल गए। किसान अपनी बुद्धिमानी से पेड़ पर लगे आम प्राप्त कर लिया। एक बार फिर किसान की बुद्धिमानी के लिए उसे सभी गाँव वालों ने प्रोत्साहित किया।
नैतिक सीख:
सोच समझकर हर किसी समस्या का हाल निकाला जा सकता हैं।
2. शैतान चीकू बंदर को सबक:

चंपक वन में सभी जानवर मिलजुलकर रहते थे। कोई भी जानवर किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता था। उसी वन में चीकू नाम का एक बंदर रहता था। वह जंगल में अन्य बंदरों से जितना छोटा था उससे अधिक शैतान भी था। धीरे-धीरे उसकी शैतानी इतनी अधिक बढ़ती गई की वह जंगल के अन्य जानवरों को परेशान करना शुरू कर दिया। कभी-कभी तो वह पेड़ की डाल पर छिपकर अचानक से किसी जानवर के सामने छलांग लगा देता था। जिससे वह जानवर डरकर तेजी से भाग जाता था।
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ऐसा करने से चीकू बंदर को बहुत मजा आता था। वह खी-खी करके हँसने लगता था। इसे तरह से उसकी हरकते दिनों-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। जिसके कारण अधिकतर जानवर उस वन को छोड़कर जा चुके थे। एक दिन चीकू बंदर के दिमाग में खतरनाक शैतानी सूझी। उसने एक पेड़ के नीचे गड्ढा खोदकर उसके ऊपर घास-फूस से ढक दिया।
वह चाहता था कि जानवर उस गड्ढे में गिर जाए जिससे उसे हँसने का मौका मिल जाए। लेकिन इत्तेफ़ाक़ ऐसा हुआ कि उस तरफ कोई जानवर नहीं आते थे। चीकू भी उस गड्ढे को अब भूल चुका था। एक दिन चीकू कही से मस्ती में उछलते-कूदते चला आ रहा था, अचानक से वह उसी गड्ढे में जा गिरा। जिसके कारण उसे अधिक चोट आ गई। बड़ी मुश्किल से उसके माता-पिता ने उसे उस गड्ढे से बहार निकाला।
गड्ढे से बाहर आकर चीकू बंदर को बहुत पछतावा हुआ। उसके माता-पिता ने उसे कहा, “अगर आज तुम्हारे जगह पर कोई और होता तो उसे भी चोट आती। उस दिन चीकू बंदर को अपनी गलती का ऐहसास हुआ। उसने शैतानी करना छोड़ दिया। अब वन के और जानवर उसकी तरफ आना शुरू कर दिए।
नैतिक सीख:
दूसरों के लिए खोदे गए गड्ढे में एक दिन वही इंसान खुद गिरता हैं।
3. बंदर और मगरमच्छ:

किसी नदी के किनारे जामुन के पेड़ पर एक बंदर रहता था। उसी नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था दोनों बहुत गहरे दोस्त थे। बंदर मगरमच्छ को जंगल के फल तथा काले-काले जामुन खिलता था। जबकि मगरमच्छ बंदर को अपनी पीठ पर बैठकर पूरे नदी की सैर कराता था। दोनों बहुत खुश रहते थे। एक दिन मगरमच्छ अपनी पत्नी के लिए फल और जामुन ले गया।
उसकी पत्नी फल को खाकर बहुत खुश हुई। वह मन ही मन सोचने लगी कि इसका दोस्त इतने मीठे-मीठे फल खाता हैं। उसका दिल कितना मीठा होगा। वह अपने पति से जिद्द करने लगी कि मुझे आपके दोस्त का दिल खाना हैं। उसके पति ने कहा, “मैं ऐसा नहीं कर सकता वह मेरा दोस्त हैं।” लेकिन उसकी पत्नी उसे ऐसा करने के लिए मजबूर कर दी। मगरमच्छ अपने दोस्त बंदर को बहला-फुसला कर अपनी पत्नी के पास ले आया।
पत्नी के पास पहुंचकर मगरमच्छ ने सारी कहानी अपने दोस्त बंदर को बता दी। बंदर बहुत बुद्धिमान था उसने कहा, “इतनी छोटी सी बात तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया। मैं अपने दोस्त के लिए अपनी जान भी दे सकता हूँ, दिल क्या बात हैं। उसकी बातों को सुनकर मगरमच्छ की पत्नी मन ही मन बहुत खुश हुई। उसने सोचा कितना सच्चा दोस्त हैं।
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बंदर ने अपने दोस्त को फटकार लगाते हुए कहा, “अगर तुम मुझसे पहले बता देते तो मैं अपना दिल साथ ले आता। मैंने अपना दिल जामुन के पेड़ पर छोड़ आया। चलो मेरे साथ लेकर आते हैं। बंदर मगरमच्छ की पीठ पर सवार हो गया मगरमच्छ अपनी चाल से पानी में चलने लगा। बंदर उसकी पीठ पर बैठे-बैठे भगवान से अपनी जान की भीख मांग रहता था।
बंदर किसी तरह नदी के किनारे पहुचा। वह उछलकर पेड़ पर चढ़ गया। उसने कहा तुम दोस्ती के लायक नहीं हो। आज से हमारी तुम्हारी दोस्ती खत्म। आज अगर मैने अपना दिमाग नहीं लगाया होता तो मैं अपनी जान से हाथ धो बैठता।
नैतिक सीख:
मुश्किल घड़ी में बुद्धिमानी और धैर्य के साथ लिया गया निर्णय हर समस्या का समाधान कर देती हैं।

