प्रेरणा से भरपूर 4 बच्चों की कहानियां नैतिक शिक्षा के साथ

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Story for kids in hindi – चार बच्चों की कहानी:

माधोपुर गाँव के पास घने जंगल में एक मंदिर था। मंदिर में पूजा-पाठ और देख-रेख उसी गाँव का एक पुजारी करता था। एक रात्री किसी दूसरे गाँव से कुछ चोर सोना-चांदी, तथा कीमती आभूषण लूटकर रुकने के लिए उसी जंगल के मंदिर में आ पहुँचे। रात्री अधिक हो चुकी थी, चोरों ने सोचा, सुबह अपने-अपने हिस्से का धन लेकर हम यहाँ से निकल चलेंगे। उन्होंने लूटे हुए आभूषणों की पोटली मंदिर में रखकर वही पर सो गए।

उसी रात तेज आंधी-तूफान आने के कारण जंगल के कुछ पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए। जिससे चोरों की मौत हो गई। सुबह-सुबह पुजारी ने मंदिर पहुंचकर देखा कि कुछ लोग मरे पडे थे। मंदिर के पास एक पोटली रखी हुई थी। जिसे पुजारी ने खोलकर देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया। इतना सारा सोने-चांदी का आभूषण देख पुजारी के मन में लालच आ गया।

पुजारी ने चोरों को जंगल में ही दफना दिया और लूटे हुए धन को मंदिर के पीछे एक बॉक्स में डालकर जमीन में छिपा दिया। जिसे वह मौका पाकर अपने घर उठा ले जाना चाहता था। पुजारी भागते हुए अपने गाँव जा पहुँचा और गाँव वालों को गुमराह करते हुए कहा, “हम लोगों को जंगल के मंदिर में नहीं जाना चाहिए। क्योंकि, मंदिर की मूर्ति के पास एक भयानक राक्षस हैं। जोकि, किसी भी व्यक्ति को खा सकता हैं। जिससे बचकर मैं बहुत मुश्किल से भागते हुए आ रहा हूँ।”

उसकी बातों को सुनकर गाँव वालों के मन में डर बैठ गया और सभी ने मंदिर न जाने का निश्चय किया। इस बात की खबर उसी गाँव के 4 बच्चे रोहन, मोहित, सुरेश और रमेश को नहीं थी। जोकि स्कूल गए हुए थे। स्कूल से आते समय चारों दोस्तों ने कहा, “चलो हम लोग मंदिर में दर्शन करते हुए चले।”

चारों दोस्त उसी जंगल के मंदिर की परिक्रमा करने लगे। मोहित का पैर मंदिर के पीछे एक गड्डे में पड़ने से वहाँ की ताजी मिट्टी नीचे दबने लगी। मोहित को लगा जरूर किसी ने यहाँ पर कुछ छिपा कर रखा हैं। चारों दोस्त मिलकर उस गड्डे से मिट्टी निकालने लगे अचानक उन्हे एक बॉक्स दबा हुआ मिला।

बाक्स निकाल कर देखा तो आश्चर्य से चारों दोस्तों के मुँह खुले के खुले रह गए। सभी दोस्तों ने मिलकर उस बॉक्स को उठाकर अपने गाँव ले आए और गाँव के मुखिया को देते हुए सारी घटना बता दी। अगली सुबह मुखिया जी ने एक सभा बुलाई जिसमें पुजारी को भी बुलाया गया। मुखिया जी ने कडक आवाज में पुजारी से पूछा, “तुमने मंदिर के पीछे राक्षस होने की बात पूरे गाँव को बताई थी। इन बच्चों को राक्षस नहीं मिले।”

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तुम जरूर कुछ छिपा रहे हो। पूरी बात सच-सच बता दो, नहीं तो तुम्हें इस गाँव से निकाल दिया जाएगा। पुजारी ने पूरी बात गाँव वालों को सच-सच बता दी। जिसके कारण उसे पूरे गाँव के सामने शर्मिंदा होना पड़ा। पूरे गाँव के सामने चारों बच्चों को उनकी बहादुरी और ईमानदारी के लिए सम्मानित किया गया।

उन्ही आभूषणों को बेचकर मुखिया जी ने अपने गाँव की सड़क, बिजली, पानी और खेल के मैदान जैसी अनेकों चीजें बनवा दी। जिससे माधोपुर गाँव एक सम्पन्न गाँव में बदल गया। उस गाँव के विकास से लोगों की खुशी दुगुनी हो गई।

नैतिक सीख:

ईमानदारी के साथ किया गया काम खुद को और दूसरों को लाभ पहुँचाता हैं।

Short Story in Hindi – माँ और उसके 4 बच्चे:

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एक झोपड़ी में एक औरत और उसके चार बच्चे रहते थे। बच्चों के पिता की मृत्यु हो चुकी थी। बच्चों का पालन-पोषण उनकी माँ करती थी। जोकि, बहुत ही साहसी और निर्भीक थी। वह प्रतिदिन अपने बच्चों को साहस, बुद्धिमानी और चतुराई से भरी कहानी सुनाया करती थी। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहता था। बड़ा बच्चा कुछ समझदार था, बाकी तीनों बच्चे बहुत छोटे थे।

धीरे-धीरे माँ ने अपने बच्चों को पाल-पोष कर बड़ा कर दिया। अब बच्चे स्कूल जाना शुरू कर दिए थे। सभी भाई एक साथ स्कूल आते-जाते थे। हमेशा एक दूसरे की मदद करते थे। कुछ समय बाद स्कूल के कुछ शरारती बच्चों ने भी उन चारों भाइयों से दोस्ती कर ली। उन शरारती दोस्तों ने चारों भाइयों में अलगाव पैदा कर दिया।

अब चारों भाई एक दूसरे के साथ आना-जाना बंद कर चुके थे। एक दिन स्कूल से आते समय बडे भाई का एक्सीडेंट हो गया। जिसे उसके तीनों भाइयों ने उसे अकेला छोड़कर घर आ गए। अधिक समय होने पर बडे बेटे को माँ ने नहीं देखा तो उसके छोटे भाइयों से पूछा कि तुम्हारा बड़ा भाई कहाँ हैं? तब उन्होंने अपनी माँ से बताया की वह रास्ते में गिर गया था।

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माँ अपने बड़े बेटे को मरहम-पट्टी करवा कर घर ले आई। चारों बेटों को अपने सामने बैठाकर पूछी, “तुम लोगों में क्या विवाद हैं जोकि एक दूसरे के साथ रहना, आना-जाना, खाना-पीना सब बंद हो चुका हैं।” बच्चों की बातों से माँ समझ गई कि उसके बच्चे ने गलत बच्चों की संगत पकड़ ली हैं। जिसके कारण वे एक दूसरे को देखना पसंद नहीं कर रहे हैं।

माँ ने अपने बच्चों को समझाते हुए कहा, “एक झाड़ू होता हैं जो आपस में बाँधा रहता हैं तो वह अपने आसपास की गंदगी की साफ कर देता हैं। लेकिन, जब वह बिखर जाता हैं तो लोग उसे गंदगी समझकर उठाकर फेंक देते हैं।”

ठीक इसी प्रकार तुम चारों के साथ हो रहा हैं। आज तुम लोगों ने अपने बडे भाई की मदद नहीं की, कल तुम लोगों को जरूरत पड़ेगी तो कौन मदद करेगा? तुम लोग अपना अस्तित्व चाहते हो तो एक साथ रहना पड़ेगा। नहीं तो बिखर जाओगे। माँ की बातें सुनकर चारों बच्चे लज्जित हो गए। उस दिन से चारों फिर से एक साथ रहने लगे।

नैतिक सीख:

एक होकर बडे से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता हैं। एकता में बल होता हैं।

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