रोहित अस्पताल के बिस्तर पर लेटा था। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे और आँखों में आँसू भरे थे। उसे सबसे ज्यादा दर्द चोटों का नहीं, बल्कि उस इंसान के धोखे का था जिसे वह अपनी दुनिया मानता था। यही उसकी आखिरी मुलाकात की सबसे दर्दनाक याद बन गई। चलो देखे कैसे:
रोहित और शालनी की गहरी दोस्ती:
रोहित और शालनी दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। रोहित एक गरीब परिवार से था। उसके पिता की एक छोटी साइकिल रिपेयर की दुकान थी। जबकि शालनी बहुत अमीर घर से थी। उसके पिता एक फैक्ट्री चलाते थे। रोहित पढ़ने में बहुत तेज था। उसके पास पर्याप्त संसाधन न होने के बावजूद वह हर साल अपनी कक्षा में प्रथम स्थान हासिल करता था।
जिसके कारण और बच्चे उससे दोस्ती करना चाहते थे। लेकिन वह सिर्फ शालनी से ही बात करता था। क्योंकि, शालनी उसे हमेशा अच्छी-अच्छी प्रेरणादायक बातें बताती थी। जिससे उसे मोटिवेशन मिलता था। शालनी और रोहित की दोस्ती पूरे क्लास के बच्चों को पता थी। शालनी रोहित से बहुत सीखती थी। धीरे-धीरे वह अपने क्लास में अच्छे अंक प्राप्त करने लगी।
इस तरह से दोनों बारहवीं कक्षा में पहुँच चुके थे। इस बार दोनों की बोर्ड परीक्षा थी। सभी बच्चे एक दूसरे को प्रतिस्पर्धा की भावना से देख रहे थे। लेकिन शालनी और रोहित मिलजुलकर पढ़ाई कर रहे थे। दोनों इस परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना चाहते थे।
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माँ की मृत्यु के बाद रोहित का टूट जाना:

परीक्षा के एक सप्ताह पहले बीमारी के कारण रोहित की माँ की मृत्यु हो गई। जिसके कारण रोहित टूट चुका था। माँ की मृत्यु के बाद रोहित कई दिनों तक स्कूल नहीं गया। उसकी किताबें मेज पर खुली रहतीं, लेकिन वह पढ़ नहीं पाता था। हर कोने में उसे अपनी माँ की याद आती थी।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है। अब उसके सामने घोर अंधेरा दिखाई दे रहा था। उसने इस बार बोर्ड परीक्षा छोड़ने का मन बना लिया था। इस बात कि खबर शालनी को पता चली तो उसने रोहित को मिलने के लिए स्कूल के पीछे एक रेस्टोरेंट में बुलाया। शालनी ने कहा, “तुम परीक्षा क्यों छोड़ना चाहते हो?” रोहित कुछ बोल नहीं रहा था। शालनी ने दुबारा से फिर पूछा।
रोहित अपना सिर नीचे किए हुआ था। शालनी ने उसका सिर ऊपर उठाते हुए कहा, “मैं समझ सकती हूँ कि तुम्हारी माँ तुम्हें इस दुनिया में अकेला छोड़ कर चली गई। लेकिन होनी को कौन टाल सकता हैं। जो होना था, वह हो चुका हैं।” इस तरह से चिंता में डूबे रहने से कुछ नहीं होने वाला। बल्कि और नुकसान ही होगा।

रोहित की आँखों में आँसू भर आए। शालनी अपनी रुमाल से उसके आँसू को पोंछते हुए कहती हैं- “रोहित, मुझे पता हैं तुम्हारे सिर से माँ की छाया जरूर हट गई है।” लेकिन अगर तुम मुझे अपना समझते हो तो मैं तुम्हारे जीवन में छाया बनकर रहूँगी। मैं तुम्हारा साथ हर एक कदम पर देने के लिए तैयार हूँ। इतना सुनकर रोहित आँसू भरी आँखों से शालनी को प्यार से देखने लगा।
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रोहित ने शालनी से पूछा, “क्या तुम सच में मेरे साथ कदम-कदम मिलाकर चलने को तैयार हो?” शालनी ने अपनी बाहें फैलाते हुए अपना सिर हिलाया। शालनी रोहित को अपने गले से लगा ली। रोहित को मानो एक नई दुनिया मिल गई हो। शालनी ने कहा, “अब मुझे तुम्हारे आँखों आँसू नहीं दिखना चाहिए।” रोहित ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
बोर्ड परीक्षा में सफलता और नया सपना:
शालनी रोहित को समझाते हुए कहा, “अब हमारा लक्ष्य हमारी परीक्षा हैं। जिसमें तुम्हें हर साल की तरह इस साल भी प्रथम स्थान प्राप्त करना होगा।” रोहित ने कहा, ‘जरूर प्राप्त करेंगे।’ उस दिन से दोनों फिर से परीक्षा कि तैयारी में जुट गए। दोनों की परीक्षा बहुत अच्छी हुई। जब परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। रोहित अपने जिले का टॉपर बना। जबकि शालनी ने अपनी कक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया।
अब दोनों कॉलेज में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा दिए। रोहित का दाखिला उसके जिले के गवर्नमेंट कॉलेज में हो गया। जबकि शालनी का नंबर कम होने के कारण उसे दाखिला नहीं मिल सका। अब दोनों के सामने बड़ी समस्या थी। रोहित ने कहा, “मैं इस कॉलेज में दाखिला नहीं लूँगा। चलो किसी दूसरे कॉलेज मे दोनों एक साथ दाखिला लेंगे।”
लेकिन शालनी ने कहा, “रोहित तुम कैसी बातें कर रहे हो? इस कॉलेज में दाखिले के लिए लोग परेशान रहते हैं। और तुम कह रहे हो मैं इस कॉलेज में दाखिला नहीं लूँगा।” इस कॉलेज में हम दोनों साथ में नहीं पढ़ सकते हैं तो कोई बात नहीं। मैं किसी प्राइवेट कॉलेज में दाखिला ले लूँगी। हम दोनों बीच-बीच में मिलते रहेंगे।
इस तरह से शालनी ने अपने मामा के घर के पास एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला ले लिया। वह अपने मामा के घर पर रहकर पढ़ाई करने लगी। जिसके कारण उसका और रोहित का मिलना नहीं हो पाता था। किसी तरह रोहित ने कॉलेज में एक साल कंप्लीट किया।
कॉलेज में शालनी का बदलता व्यवहार:
लेकिन उसे शालनी की कमी हमेशा महसूस होती थी। लेकिन शालनी को रोहित कि याद नहीं आती थी। शालनी के व्यवहार में बदलाव आने लगा। उसके फोन कम आने लगे। वह रोहित से छोटी-छोटी बातों पर दूरी बनाने लगी। कई दिनों तक रोहित ने खुद को समझाया कि शायद पढ़ाई का दबाव होगा, इसलिए शालनी बदल रही है। लेकिन उसके मन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। आखिरकार उसने खुद उससे मिलने का फैसला किया।
आखिरी मुलाकात जिसने सब बदल दिया:

एक दिन वह शालनी से मिलने उसके कॉलेज में गया। उसने देखा कि कॉलेज में शालनी और उसके कई दोस्त एक साथ बैठकर हंसी-मजाक कर रहे थे। वह शालनी के पास गया उसे अपने गले लगाना चाहा। शालनी ने उसे धक्का दे दी। जिससे वह नीचे गिर गया। इतने में शालनी का बॉयफ्रेंड पूछता हैं, “शालनी कौन हैं ये? तुम्हें गले क्यों लगाना चाह रहा हैं।”
शालनी ने कहा, “इसका नाम रोहित हैं, यह मेरे स्कूल में पढ़ता था।” यह हमेशा मेरे पीछे पड़ा रहता था। लेकिन मैं इसे बिल्कुल चाहती नहीं थी। इतना सुनते ही शालनी का बॉयफ्रेंड और उसके दोस्त रोहित को लात-घूसे से मारने लगे। रोहित के लिए यह दृश्य किसी बुरे सपने से कम नहीं था। रोहित बार-बार कह रहा था। शालनी मेरी जीवन साथी हैं। हम दोनों जीवन पर्यंत एक साथ रहने का वादा किया था।
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इस तरह से शालनी के बॉयफ्रेंड ने उसे इतना मारा कि रोहित के नाक और मुंह से खून निकलने लगा। इतना ही नहीं शालनी ने कहा- “परीक्षा के समय इसकी माँ मर गई थी तो मैंने इसे परीक्षा देने के लिए कहा। मेरी वजह से इसने पढ़ाई कर पाई नहीं तो यह फेल हो जाता।” उसकी बातों को सुनकर रोहित रोते हुए कहा, “शालनी ऐसा मत बोलो, यह सब झूठ हैं। शालनी मैं तुमसे बेपनाह प्यार करता हूँ।
उसके बॉयफ्रेंड ने रोहित को घसीटते हुए गेट से बाहर कर दिया। रोहित मासूमियत भरी आँखों से शालनी को देख रहा था। शालनी उसके पास आई और बोली ‘Get Lost From Here’. जमीन में लेटा हुआ रोहित उसकी बातों को सुनकर मायूस हो गया। वह उठना चाह रहा था। लेकिन उठ नहीं पा रहा था। क्योंकि शालनी के बॉयफ्रेंड ने उसे बहुत बुरी तरह मार दिया था। वह घायल हो चुका था।
रोहित सोच भी नहीं सकता था कि जिस लड़की ने कभी उसके आँसू पोंछे थे, वही आज सबके सामने उसकी बेइज्जती करेगी। उसके लिए यह दर्द किसी चोट से कहीं ज्यादा गहरा था।
उसे किसी ने जिले के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया। उस दिन अस्पताल की सफेद दीवारों के बीच रोहित ने तय किया कि अब वह अपने आँसुओं को कमजोरी नहीं बनने देगा। लेकिन शालनी की वह आखिरी मुलाकात उसके दिल में हमेशा दर्द बनकर रह गई।
सीख:
जीवन में हर मुस्कुराता चेहरा सच्चा साथ नहीं देता। इसलिए भरोसा सोच-समझकर करना चाहिए।
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