जब जीवन का सफर डगमगाने लगता हैं। आगे अंधेरा ही अंधेरा दिखाई देता हैं। ऐसी दशा में भगवान गौतम बुद्ध के द्वारा दिए गए उपदेश जीवन को एक नया आयाम देने का काम करते हैं। इसलिए, आज हम buddha motivational story in hindi में प्रेरणा से भरपूर जीवन में बदलाव लाने की क्षमता वाले उपदेशों के बारें में देखेंगे, जोकि निम्नलिखित प्रकार से हैं:
जीवन में गुरु का महत्त्व – Importance of Guru in life:

एक बार महात्मा बुद्ध किसी गाँव में लोगों को प्रेरित कर रहे थे। तभी उस गाँव का एक बच्चा अपने पिता के साथ आया और उसने बुद्ध से पूछा, महात्मन्! “मैं स्कूल नहीं जाना चाहता।” बुद्ध ने बच्चे से पूछा, ऐसा क्यों? बच्चे ने कहा, “मेरी कक्षा में सभी बच्चे मुझे पढ़ने में कमजोर समझते हैं। जिसके कारण सभी अध्यापक मेरे ऊपर अधिक नजर रखते हैं। इसकी वजह से मैं परेशान हो चुका हूँ।”
बुद्ध ने बच्चे को एक कहानी सुनाते हुए कहा, “जिस प्रकार से फालतू पड़े पत्थर को एक मूर्तिकार अनावश्यक पत्थर काट-काट कर एक भव्य मूर्ति का रूप दे देता हैं। फिर लोग उसकी पूजा करते हैं। ठीक उसी प्रकार से, गुरु अपने शिष्य के सारे अवगुण और बुराइयों को निकालकर उसे एक महान व्यक्ति की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता हैं।
जरा सोचो! “अगर पत्थर, उस छेनी और हथौड़ी की चोट को बर्दाश्त न कर पाए और वह टूट जाए तो क्या वह पत्थर कभी मूर्ति बन सकती हैं?” ‘नहीं’, बच्चे ने कहा। इसी तरह, अगर हम अपने आप को शिक्षक को समर्पित कर देते हैं तो वह हमारे कमजोरियों को निकालकर मंजिल तक पहुंचने का रास्ता दिखलाता है।
बुद्ध के उपदेश:
गुरु हमें जीवन जीने का सार बताता हैं। इसलिए, हमें उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए।
1. परिश्रम का महत्त्व – Importance of hard work:

एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ गाँव की गलियों से होते हुए कही प्रवचन देने जा रहे थे। तभी रास्ते में उन्हें, एक आलसी व्यक्ति दिखा जोकि, एक पेड़ के नीचे आराम से लेटा हुआ था। उसकी पत्नी बच्चे को गोद में लिए हुए फटकार लगा रही थी। वह बुद्ध को देख उनके चरणों में गिर गई, और कहने लगी- “मेरा क्या कसूर था जो मैं कष्ट उठा रही हूँ? कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।”
बुद्ध ने पूछा क्या बात हैं? मुझे बताओ! औरत रोते हुए कहा, “महात्मन्! हमारे घर की स्थिति बहुत नाजुक हैं, घर में कुछ खाने को नहीं हैं। मेरे बच्चे कल से भूखे हैं। लेकिन, मेरे पति इस पीपल के पेड़ के नीचे आराम करते रहते हैं। घर में खाने के लिए अनाज कहाँ से आएगा? इसके बारे में कुछ भी सोचते नहीं हैं।
भगवान बुद्ध से जुड़ी कहानियां: बुद्ध की कहानी हिंदी में – Buddha Story in Hindi
महात्मा बुद्ध, उस व्यक्ति से पूछते हैं कि तुम कोई काम क्यों नहीं करते हो? जिससे तुम्हारा जीवन यापन हो सके। उस व्यक्ति ने कहा, “मेरा जीवन व्यर्थ हैं। मुझे काम कौन देगा? मेरे अंदर कोई हुनर भी नहीं हैं। महात्मा बुद्ध ने पूछा,”क्या कोई बच्चा जन्म से हुनर सीखकर पैदा होता हैं? ‘नहीं’। इसलिए, अगर तुम जीवन में किसी एक क्षेत्र में अथाह मेहनत, लगन और परिश्रम करते रहोगे तो तुम उस क्षेत्र के सबसे ज्यादा ज्ञानवान व्यक्ति बन सकते हो।
जो इंसान अपने जीवन जीने का मकसद भूल चुका हो, जो इंसान परिश्रम करना नहीं जनता। उसके जीवन की गति भी रुक जाती हैं। क्योंकि, परिश्रम के बिना किसी के जीवन में उन्नति नहीं हो सकती। जिस प्रकार से सुबह के भोर में चिड़िया अपने भोजन की तलाश में निकल जाती हैं और शाम को रैन बसेरे में आती हैं। ठीक उसी प्रकार, हमें भी अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करते हुए उसे प्राप्त करने की अटूट चाहत होनी चाहिए।
बुद्ध के उपदेश:
आत्मविश्वास, मेहनत, लगन और परिश्रम के बल पर कुछ भी कर पाना संभव हैं।
2. जीवन में शांति का मार्ग – The way to peace in life:

किसी गाँव में हरीराम नाम का एक सेठ था। उसका व्यापार दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी बढ़ता जा रहा था। देखते-देखते वह अपने आस-पास के सबसे आमिर व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल हो गया। इस तरह से वह अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझने लगा। उसने अपनी कमाई से बड़े-बड़े मकान बनवा लिए और नौकर-चाकर तथा बड़ी-बड़ी गाड़ी खरीद ली।
लेकिन, दुर्भाग्यवश! उसके दिन फिर गए, उसे उसके व्यापार में घाटा लगने लगा। जिसके कारण उसकी धन-संपति का बहुत नुकसान होने लगा। देखते-देखते कुछ ही दिनों में सेठ की सारी धन-दौलत खत्म हो गई। अब सेठ हरीराम एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गया।
परेशानी बढ़ती देख, वह गाँव में प्रवचन कर रहे महात्मा के पास पहुँचा। उसने कहा, “स्वामी जी! मेरे व्यापार में बहुत बड़ा घाटा लगा। जिसके कारण मैं बर्बाद हो गया। कृपया मुझे कोई मार्ग बताए जिससे मेरे मन को शांति मिल सके।”
साधु ने पूछा, तुम्हारा सब कुछ चला गया? सेठ ने कहा, हाँ महाराज! साधु ने कहा, “क्या वह सब कुछ तुम्हारा था जो तुम्हारे पास रहना चाहिए? जिसके लिए तुम इतनी चिंता में डूबे हुए हो?” सेठ ने कोई जबाव नहीं दिया।
साधु ने फिर पूछा, “जन्म के समय तुम अपने साथ क्या लेकर आए थे?” स्वामीजी, जन्म के साथ कोई कुछ भी नहीं लेकर आता, सेठ ने कहा।
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साधु ने कहा, ठीक हैं! तुम मरते समय अपने साथ क्या-क्या लेकर जाना चाहते हो? महराज! मरते समय भला, कोई कुछ कैसे ले जा सकता हैं? साधु ने कहा, फिर इस मायाजाल के चक्कर में क्यों पड़े हो? महाराज! “जब तक मौत नहीं आ जाती मेरा और मेरे परिवार का गुजर बसर कैसे चलेगा?”
साधु ने हँसते हुए कहा, जो धन के भरोसे होता हैं। उसका यही हाल होता हैं। आपको इस प्रभु परमात्मा ने सुंदर-सुंदर हाथ पैर दिए हैं। उसे काम में लगाओ परिश्रम करो और सबसे बड़ी बात ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखो। तुम्हारे काम भी होते चले जाएंगे और तुम्हारे मन में शांति भी बनी रहेगी। साधु की बातों को सुनकर सेठ हरीराम कई वर्षों के बाद उस दिन शांति के साथ चैन की नींद सोया।
बुद्ध के उपदेश:
ईश्वर पर भरोसा रखते हुए मेहनत और लगन के साथ जीवन में शांति के साथ-साथ कामयाबी भी हासिल की जा सकती हैं।
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