बादशाह अकबर बहुत विनोदी स्वभाव के थे। उन्हें पहेलियाँ बुझाने का बहुत शौक था। उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान मंत्री थे। लेकिन, बादशाह अकबर को सिर्फ बीरबल के द्वारा दिए गए जबाब पसंद आते थे। क्योंकि बीरबल हर पहेली का जबाब सबसे अंत में बहुत ही सोच समझकर देता था। बादशाह अकबर का लगाव बीरबल के साथ अधिक देख उनके अन्य मंत्री बीरबल से ईर्ष्या करने लगे थे।
एक दिन दरबार में बीरबल उपस्थिति नहीं थे। सभी मंत्री मिलकर बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भरने लगे। लेकिन, बादशाह बीरबल की बुद्धिमानी और चतुराई से अच्छे से वाकिफ थे। इसलिए, वे बीरबल के खिलाफ बुरा नहीं सोचे। बादशाह ने कहा, “तुम लोग बिना वजह अपने समय बर्बाद कर रहे हो, बीरबल तुम लोगों से कही ज्यादा बुद्धिमान हैं। इसलिए उसे मैं अधिक प्यार करता हूँ।”
सभी मंत्रियों के बार-बार कहने पर बादशाह अकबर ने कहा, “देखो आज बीरबल इस सभा में उपस्थति नहीं हैं। तुम लोगों से मैं एक सवाल करता हूँ। अगर सवाल के सही जबाब नहीं दे सके तो सभी को मृत्यु दंड दिया जाएगा। बादशाह अकबर की बात सुनकर चारों मंत्री भयभीत हो गए। उन्ही मंत्रियों में एक ने कहा, “जहाँपनाह! आप प्रश्न पूछिए।”
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बादशाह अकबर ने पूछा, “संसार में सबसे बड़ी चीज क्या हैं?” प्रश्न सुनकर सभी मंत्री चुप हो गए। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि प्रश्न का उत्तर कैसे दिया जाए? सभी मंत्री कुछ देर तक आपस में विचार विमर्श करते रहे। तभी एक मंत्री ने जबाब दिया, “हुजूर! खुदा की खुदाई सबसे बड़ी चीज हैं।” दूसरे मंत्री ने जबाब दिया, “जहाँपनाह! राज्य की सल्तनत सबसे बड़ी चीज हैं।”
बादशाह अकबर को दोनों मंत्रियों का जबाब बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा, “ठीक से सोच समझकर जबाब दो, वरना मैं अपने वादे के अनुसार तुम लोगों को मृत्यु दंड दूँगा।” तीसरे मंत्री ने कहा जहाँपनाह! मुझे कुछ दिनों का समय दो, मैं आपको आपके अनुसार सटीक जबाब दूँगा। अकबर ने सभी चारों मंत्रियों को एक सप्ताह का समय दे दिया। सभा खत्म हुई सभी चारों मंत्री मुँह लटकाए चले गए।
इस तरह से धीरे-धीरे छः दिन बीत गए। लेकिन, उन्हे कोई उत्तर नहीं सूझ सका। चारों मंत्रियों ने सलाह किया कि इस प्रश्न के जबाब तो सिर्फ बीरबल ही दे सकता हैं। सभी ने बीरबल से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंचकर दरबार में हुए सारी कहानी सुना दी। बीरबल ने कहा- “मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे दूँगा लेकिन मेरी एक शर्त हैं।”
मंत्रियों ने कहा, “एक शर्त नहीं, हम लोग आपकी दस शर्त मनाने के लिए तैयार हैं। बस आप हमें मृत्यु दंड से बचा लीजिए, चारों मंत्रियों ने कहा।” बीरबल ने कहा, “तुम चारों में से दो लोग अपने कंधे पर मेरी चारपाई उठा लीजिए, एक मेरा हुक्का उठा लो, जिसे मैं पीते हुए चलूँगा। और चौथे मंत्री से कहा, “तुम मेरी जूती हाथ में उठाकर चलते रहो।”
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अगर बीरबल उन मंत्रियों को कभी और ऐसा करने के लिए कहे होते तो शायद सभी मंत्री नहीं करते। लेकिन, उन्हे अपने प्राण की रक्षा करनी थी। इसलिए, ऐसा करने पर मजबूर थे। इस तरह बीरबल खाट पर लेटे हुए दरबार जा रहे थे। रास्ते के लोग यह दृश्य देखकर बहुत ही आश्चर्यचकित हो रहे थे। दरबार पहुंचकर चारों ने बीरबल की चारपाई दरबार के मध्य रख दिया।
बादशाह अकबर, बीरबल को चारपाई पर लेटे देख हँस पडे। बीरबल चारपाई से उतरकर कहा, “जहाँपनाह! शायद आपको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। संसार में सबसे बड़ी चीज ‘गर्ज’ हैं।” इस तरह से उन चारों मंत्रियों को एक बड़ा सबक मिल गया। उसी दिन से उन्होंने बीरबल की निंदा और बुराई करना छोड़ दिया।
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