बीरबल की 5 चतुराई भरी कहानियां – Akbar Birbal Stories in Hindi

📅 Published on December 29, 2024
🔄 Updated on February 27, 2026
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बच्चों और बड़ों के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजन से भरपूर अकबर-बीरबल की कहानियाँ अधिक लुभाती हैं। क्योंकि, इस तरह की कहानियों में बीरबल की बुद्धिमता और चतुराई देखने को मिलती हैं। इसलिए, आज हम 5 अधिक लोकप्रिय अकबर और बीरबल की कहानियाँ सुनाने जा रहे हैं। जोकि, निम्नलिखित प्रकार से हैं।

1. जितनी चादर उतने पैर:

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एक बार की बात हैं किसी गाँव में एक गरीब ब्राम्हण रहता था। जोकि, भिक्षा मांगकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। धीरे-धीरे उस ब्राम्हण के घर पर कुछ खाद्य सामग्री इकट्ठा हो गई। उसकी पत्नी ने कहा- “हमें अपने घर किसी विद्वान को बुलाकर भोजन करवाना चाहिए।”

ब्राम्हण, पत्नी की बात मान गया। दोनों ने सोचा कि अपने राज्य में सबसे अधिक विद्वान कौन हैं? जिसे हम खाने पर बुला सकते हैं। ब्राम्हण की पत्नी के निगाह में बीरबल से ज्यादा विद्वान कोई और नहीं दिख रहा था। दोनों ने निश्चय किया कि अपने घर बीरबल को आमंत्रित करते हैं।

ब्राम्हण बीरबल को आमंत्रित करने के लिए चला गया। लेकिन, ब्राम्हण रास्ते में सोचता हैं कि अगर वह बीरबल के साथ उसके और साथी मंत्रियों को भी बुलाएगा तो वे लोग उसकी बड़ाई और प्रशंसा करेंगे। लेकिन ब्राम्हण ने अपने घर की व्यवस्था को ध्यान नहीं दिया। वह बीरबल के साथ उनके कई मंत्रियों को भी भोज पर आमंत्रित कर दिया।

जब बीरबल और उसके मंत्री ब्राम्हण के घर पर भोज के लिए आए तो उसका खाना कम पड़ गया। कुछ लोगों को आधे पेट ही भोजन मिला। जब सोने की व्यवस्था करनी थी तो उसके घर में चादर की कमी हो गई।

उसकी व्यवस्था देख बीरबल ने ब्राम्हण को अपने पास बुलाया और उसे समझाते हुए कहा- “जितनी चादर उतने पैर पसारना चाहिए” आपके घर पर अधिक लोगों की खाने-पीने की व्यवस्था नहीं थी तो आप किसी एक को बुला सकते थे। आप लोगों के दिखावे के चक्कर में आकर अपनी बेइज्जती करवा ली।

2. सबसे अक्लमंद कौन:

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एक समय की बात हैं बादशाह अकबर के सभी मंत्री, बीरबल को प्रधानमंत्री पद से हटाने की माँग करने लगे। उनका कहना था कि तानसेन बीरबल से भी ज्यादा बुद्धिमान हैं। उन्हें प्रधानमंत्री का पद दिया जाए। बादशाह अकबर अपने सभी मंत्रियों की बात को स्वीकारते हुए कहा- “मैं सबसे पहले दोनों की परीक्षा लेना चाहता हूँ।”

जिसके लिए तुम दोनों को इंग्लैंड के राजा के पास जाकर इस खत को देकर, इसका जबाब लेकर आना हैं। उन दोनों को एक सील बंद खत दिया गाय। बीरबल और तानसेन इंग्लैंड के राजा के पास पहुंचे और खत देते हुए अपना परिचय बताए। जब राजा ने खत पढ़ा तो उसमें लिखा था खत लाने वाले को फांसी पर लटका दिया जाए।

इंग्लैंड के राजा अपने मंत्री को आदेश दिया कि इन दोनों को फांसी पर लटका दिया जाए। अगले दिन सुबह ठीक समय के अनुसार दोनों को फांसी पर चढ़ाने के लिए ले जाया जा रहा था। संगीतज्ञ तानसेन बहुत दुखी था, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। वह मन ही मन सोच रहा था कि मैं क्यों प्रधानमंत्री पद के लालच में पड़ गया।

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उसके साथ बीरबल बहुत शांत स्वभाव से आगे बढ़ रहा था। थोड़ी दूर चलने के बाद बीरबल तानसेन के पास गया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। जहाँ पर फांसी होनी थी, वहाँ पहुँचकर बीरबल बोलने लगा पहले मैं फांसी पर चढ़ूँगा, तानसेन बोलने लगा नहीं पहले मैं फांसी पर चढ़ूँगा। दोनों आपस में झगड़ा करने लगे। जल्लाद ने दोनों के वार्ताव को देख राजा के पास तक खबर पहुँचा दिया।

राजा वहाँ पर आकर उन दोनों के द्वारा इस तरह से किए जाने वाले वार्ताव का कारण जानना चाहा। बीरबल ने कहा- “महाराज अकबर के ज्योतिष ने बताया हैं कि अगर संदेशवाहक का आप फाँसी दे देते हैं तो बादशाह अकबर आपके राज्य को आसानी से जीत सकता हैं। उनकी बात सुनकर राजा बहुत क्रोधित हो गया।

वह उन दोनों के साथ एक खत भेजता हैं। जिसमें बादशाह अकबर को युद्ध के लिए ललकारता हैं। इंग्लैंड से वापस लौटकर तानसेन बादशाह अकबर के समाने हाथ जोड़कर नतमस्तक होकर कहा- “जहाँपनाह! मैं आपके दरबार का प्रधानमंत्री बनने लायक नहीं हूँ। कृपया बीरबल को मंत्री बने रहने दें।” इस प्रकार से बादशाह अकबर फिर से बीरबल को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

3. कुआँ और पानी:

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बहुत समय पहले की बात हैं। शिवपुर गाँव में सुखदेव नाम का एक किसान रहता था। जिसके पास बहुत अधिक जमीन थी। लेकिन, वह सिर्फ अपने पूरे साल भर के अनाज के लिए कुछ ही जमीन पर फसल लगाता था। एक बार उसके खेत में अधिक पैदावार हुई, जिसे वह पूरे साल भर में खत्म नहीं कर पाया। कुछ अनाज वह गाँव के बनिया को बुलाकर बेच दिया। जिससे उसे अधिक पैसे मिले।

उसके दिमाग में विचार आया कि अगर खाली पड़े सभी खेतों में फसल लगा दिया जाए तो बहुत अधिक पैसे मिल सकते हैं। किसान ने अपने खाली पड़े सभी खेतों में फसल लगवा दिए। जब सिंचाई करने का समय आया तो किसान पानी निकलने के लिए कई जगह खोदाई कारवाई। लेकिन, उसे कही भी पानी नहीं मिला।

किसान मायूस हो गया। वह अब सोचने लगा कि वह अपने फसल की सिचाई कैसे करेगा? उसे उसके खेत के पास एक कुआँ दिखाई दिया। वह उसी कुए से पानी निकालने के लिए गया। लेकिन उस कुए का मालिक आकर उसे पानी लेने से मना कर दिया। वह कहता हैं मैं इस कुए को बेच रहा हूँ। आप इस कुए को खरीद सकते हैं। किसान ने उस कुए को खरीद लिया।

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अगले दिन वह उस कुए से पानी निकालने के लिए जतन कर रहा था। तभी कुएं का मालिक फिर से वहाँ आया। उसने किसान से कहा- “मैंने कुए को बेचा हैं न की पानी को, तुम्हें पानी लेने के लिए पानी भी खरीदना पड़ेगा।” किसान न्याय पाने के लिए बादशाह अकबर के दरबार में गुहार लगाया। बादशाह अकबर दोनों की बातों को सुनकर असमंजस में पड़ गए।

उन्होंने बीरबल को इस मामले का निस्तारण करने के लिए कहा। बीरबल उस व्यक्ति से कहता हैं- “जब तुमने कुएं को बेच दिया तो तुम्हारा पानी वहाँ क्या कर रहा हैं।” तुम जितनी जल्दी हो सके अपने पानी को कुए से बाहर निकल लो। वह व्यक्ति दरबार में सभी के सामने लज्जित हो गया। बादशाह अकबर उसे गुमराह करने के जुर्म में कारावाश में डाल दिया।

4. अकबर की दूसरी शादी:

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एक बार की बात हैं, बादशाह अकबर की बेगम अपने भाई को अपने दरबार का प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी। एक दिन बादशाह अकबर का मूड अच्छा देखकर बेगम ने कहा- “महाराज बीरबल को बोलो मुझे आप से माँफी माँगने के लिए मजबूर करें नहीं तो मैं तुम्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दूंगा। बादशाह अकबर ऐसा करना नहीं चाहते थे।

लेकिन अपनी बेगम का मान रखने के लिए उसने बीरबल को ऐसा करने के लिए कह दिया। एक दिन बीरबल को एक तरकीब सूझी उसने महल के दरबारन को कान में कुछ समझाया। फिर वह महल में रानी से बात करने के लिए चला गया। बीरबल रानी से राजा के बारें में बात कर रहे थे। तभी वहाँ दरबारन आई। वह बीरबल से बोली, श्रीमानजी! सब कुछ योजना के अनुरूप हो रहा हैं।

रानी बीरबल से उस योजना के बारें में जानना चाहती हैं। लेकिन, बीरबल कहता हैं- “क्षमा करना! मैं इसके बारें में आपसे कुछ नहीं बता सकता। दरबारन की बात सुन रानी अचंभित हो उठती हैं। वह सोचती हैं कि कही कल के लड़ाई के कारण बादशाह अकबर कोई दूसरी शादी न कर ले।

वह तुरंत भागकर बादशाह अकबर के पास जाती हैं। और कल रात हुए झगड़े के लिए वह माँफी माँगने लगती हैं। बादशाह अकबर जोर-जोर से हँसने लगता हैं और रानी से कहते हैं। देख ली बीरबल की चतुराई तुम्हें मुझसे माँफी माँगने के लिए कैसे मजबूर कर दिया।

5. तीन सवाल:

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एक समय की बात हैं, बादशाह अकबर अपने मंत्रियों से तीन सवाल किए। पहला सवाल- वह क्या हैं, जो आज हैं और कल भी रहेगी? दूसरा सवाल- वह क्या हैं, जो आज हैं लेकिन कल नहीं रहेगी? तीसरा सवाल- वह क्या हैं जो आज नहीं हैं पर कल रहेगी। इन तीनों सवालों के सही जबाब मांगे। दरबार में बैठे सभी मंत्री अपने-अपने जबाब बादशाह अकबर को दिए।

लेकिन बादशाह किसी के जबाब से संतुष्ट नहीं हुआ। जब बीरबल का जबाब देने का नंबर आया तो बीरबल ने अकबर से कहा- “महाराज आपके तीनों सवालों के जबाब आपको राज्य में दिखाकर दूंगा।” जिसके लिए आपको मेरे साथ राज्य भ्रमण पर चलना पड़ेगा। बादशाह अकबर-बीरबल के साथ जाने के लिए तैयार हो गए। बादशाह अकबर और बीरबल अपने भेष बदलकर एक बाजार में पहुंचे।

दोनों एक मिठाई की दुकान पर गए। दुकानदार से एक अनाथ आश्रम बनने के लिए पैसे मांगते हैं। दुकानदार खुशी-खुशी पैसे दे देता हैं। बीरबल राजा से कहता हैं, “जहाँपनाह! यह रहा आपके पहले सवाल का जबाब। इस दुकानदार के अंदर नेकी और दान करने की नियत हैं, जोकी कल भी रहेगी।”

अब दोनों आगे बढ़ते हैं उनकी मुलाकात एक भिखारी से होती हैं। जोकि, एक रोटी का टुकड़ा खा रहा होता हैं। बीरबल उससे एक रोटी का टुकड़ा माँगता हैं। लेकिन वह क्रोधित हो उठता हैं और उसे देने से मना कर देता हैं। बीरबल राजा से कहता हैं- “यह हैं आपके दूसरे सवाल का जबाब। आज यह व्यक्ति गरीब हैं जिसे बहुत मुश्किल से खाने को मिला होगा।

लेकिन कल इसके पास खाने को अधिक होगा तो लोगों को भी देगा। बादशाह अकबर और बीरबल फिर और आगे बढ़ते हैं। कुछ दूर आगे चलकर देखते हैं कि एक साधु महात्मा एक पेड़ के नीचे ध्यान लगाए बैठे थे। वहाँ पहुँचकर बीरबल साधु महात्मा को कुछ धन देने के लिए अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ता हैं।

लेकिन, वह महात्मा धन लेने से मना कर देता हैं। बीरबल कहता हैं ये महात्मा मोह-माया से परे हैं। ये महात्मा अपना नाता प्रभु से जोड़ने के लिए तपस्या कर रहा। महात्मा जी को एक बार प्रभु का दीदार हो जाने के बाद इन्हें आनंद ही आनंद मिलेगा। इस तरह से बादशाह अकबर बीरबल से तीनों सवालों के जबाब पाकर खुश होता हैं। और उसकी बुद्धिमता की सराहना किया।

🙋‍♂️ FAQs – Akbar Birbal Stories in Hindi

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