सुंदरवन में पीहू नाम का एक मोर रहता था। उसे अपनी सुंदरता पर बहुत नाज़ था। वह आए दिन वन के किसी भी पशु-पक्षी को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ता था। वह उन्हें तरह-तरह के व्यंग बोलता था। उसे लगता था कि इस वन का सबसे सुंदर पक्षी मैं ही हूँ। एक दिन उसकी मुलाकात एक कोयल से हुई। उसे देख मोर इतराते हुए कहा- “काली कोयल मुझसे दूर रहना, नहीं तो मैं भी काला हो जाऊंगा।
उसकी बातों को सुनकर कोयल को बहुत बुरा लगा। उसने मोर को समझाते हुए कहा- “मोर भाई आपको इस तरह बातें करना शोभा नहीं देता।” मैं मानता हूँ कि तुम इस वन के सुंदर पक्षी हो। लेकिन हर किसी के अंदर कोई न कोई अच्छाई जरूर होती हैं। इसलिए किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए। कोयल की सलाह मोर को पसंद नहीं आया।
उसने भरे मन से कहा- “इस दुनिया में तुमसे बदसूरत पक्षी कोई नहीं होगा।” जाओ तुम पहले आईने में अपनी सकल तो देखो। चले हो मुझे समझाने। मोर का व्यवहार कोयल को बिल्कुल पसंद नहीं आया। उसने फिर से कहा- “मोर भाई यही घमंड तुम्हारा एक दिन तुम्हें ले डूबेगा। अगर समय रहते समझ गए तो ठीक, नहीं तो एक दिन तुम्हें पछतावा ही मिलेगा।”
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इतना कहकर कोयल वहाँ से उड़ गया। लेकिन मोर को उसकी बातों का कोई फर्क नहीं पड़ा। कुछ दिन बाद पीहू मोर की मुलाकात मिट्ठू नाम एक के तोते से हुई। तोते को देख मोर उसका मजाक उड़ाते हुए कहा- “क्यों तोते भाई, मुझे तुम्हारे रंग और इन झाड़ियों रंग के बीच कोई फ़र्क नहीं दिख रहा। क्या तुम इन्ही घास-फूस को खाते हो जो तुम्हारा रंग हरा हैं। मुझे देखो, मेरे पंख में कितने तरह-तरह के रंग हैं।
मोर की बातें मिट्ठू तोते को बिल्कुल पसंद नहीं आई, उसने कहा- “मोर भाई तुम्हारे पंख जरूर बड़े और सुंदर हैं। लेकिन इनके सहारे तुम ज्यादा दूर तक नहीं उड़ सकते।” जिसके कारण शिकारी तुम्हें कभी भी अपना शिकार बना सकता हैं। इसलिए तुम्हें अपने आप पर ज्यादा अभिमान नहीं करना चाहिए। मोर ने कहा- “जा… जा… तुम मुझे मत समझाओ, मैं तुमसे ज्यादा ज्ञानवान हूँ।
इस तरह से घमंडी मोर को कई पक्षियों ने समझाया कि उसे अपने आप पर ज्यादा नाज नहीं करना चाहिए। उसे सभी पक्षियों के साथ मिलकर रहना चाहिए। जोकि बुरे वक्त में साथ दे सकते हैं। लेकिन पीहू मोर किसी बातों को नहीं माना। वह हमेशा अपनी सुंदरता पर नाज़ करता और अकेले ही रहता था।
एक दिन उसी वन में एक शिकारी आया। वह उस मोर को देख उसके पीछे पड़ गया। बहुत जल्द वह पीहू मोर को पकड़ लिया। वह उसके सभी पंख को उखाड़ कर अपने साथ ले गया। पीहू मोर ने नदी की परछाई में अपने आपको देखा तो वह बहुत मायूस हुआ। अब वह शर्म के कारण चुपचाप झाड़ी में ही छिपा रहता था।
एक दिन उस वन के सभी पक्षी उससे मिले। उन्होंने कहा- “मोर भाई अगर तुम अपने अभिमान को त्यागकर हमारे साथ रहते तो हम तुम्हें बचाने का भरसक प्रयास करते।” शिकारी तुम्हें अकेला पाकर तुम्हारा क्या हाल बना दिया। मोर ने सभी पक्षियों के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा- ”मुझे माँफ कर दो, मुझे मेरे घमंड का सबक मिल चुका हैं।” अब मैं कभी अपनी सुंदरता का घमंड नहीं करूंगा।”
नैतिक सीख:
अभिमान व्यक्ति को गड्ढे में गिराती हैं।
