किसान को अन्न देवता कहा जाता हैं। किसान ही वह व्यक्ति होता हैं, जोकि अपने खून-पसीने से अनाज पैदा करता हैं। जिनके लिए हमे ऐहसानमंद होना चाहिए। इसलिए कहानिज़ोन के आज के इस लेख में हम आपको किसान की तीन कहानियाँ सुनाने जा रही हूँ। जोकि, निम्न प्रकार से लिखित हैं:
1. खुद पर भरोसा करे:

समयपुर नामक गाँव में रामलाल नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके घर में उसकी पत्नी और तीन बच्चे थे। रामलाल बहुत ईमानदार और मेहनती था। वह प्रतिदिन सुबह-सुबह फावड़े को लेकर अपने खेत को निकल जाता था। वह दिन भर खेत में मेहनत करता था। उसकी पत्नी उसके लिए दोपहर को खाना लेकर जाती थी। लेकिन कभी-कभी रामलाल अपने काम के आगे खाना-पीना भूल जाता था।
रामलाल अपनी मेहनत के बल से हर साल अच्छा-खासा अनाज पैदा कर लेता था। उसकी फसल देख उसके आस-पास के लोग उससे जलते थे। एक बार रामलाल की गेहूं की फसल बहुत अच्छी हुई थी। लेकिन अभी फसल पकने में थोड़ा समय था। फसल को पानी की जरूरत थी। रामलाल अपनी फसल की सिंचाई करने के लिए दूर किसी खेत में लगे ट्यूबवेल से पानी लाता था।
लेकिन वह व्यक्ति रामलाल की फसल देख उससे ईर्ष्या करने लगा। उसने रामलाल को पानी देने मना कर दिया। अब रामलाल बहुत परेशान हो उठा। उसे लग रहा था कि एक सप्ताह के अंदर फसल की सिंचाई नहीं की गई तो फसल सूखकर खराब हो जाएगी। तभी उसके पास उसका बेटा आया। उसने अपने पिता से उदासी का कारण पूछा? रामलाल अपने दस साल के मासूम बेटे से सारी बात बता दी।
उसके बेटे ने कहा- “पिताजी हम दूसरे के ऊपर क्यों निर्भर हैं। क्योंकि न हम भी ट्यूबवेल लगा लेते हैं।” रामलाल अपने बेटे से कहा- बेटा, इतनी जल्द हम कैसे ट्यूबवेल लगा सकते हैं।” बेटे ने कहा- “हमारे पास और कोई रास्ता नहीं हैं। हमें कैसे भी पानी का बंदोबस्त करना पड़ेगा” बेटे की बात सुनकर रामलाल को हौसला मिला। उसने ट्यूबवेल लगाने के लिए कुआं खोदना शुरू कर दिया।
वह दिन रात एक करके मेहनत करता रहा। उसे कुआं खोदने में कई तरह की परेशानियाँ हुई। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। देखते-देखते वह दो दिन में कुएं से पानी निकल दिया। रामलाल उसे कुएं में ट्यूबवेल लगाकर अपने खेत की सिंचाई करना शुरू कर दिया। उसकी हिम्मत और साहस को देख लोग उसकी सराहना करने लगे।
2. खेत में छिपा खजाना:

हरी नाम का एक किसान था। उसके पास एक खेत था। जोकि बंजर पड़ा रहता था। वह बहुत ही आलसी स्वभाव का व्यक्ति था। कभी भी मेहनत नहीं करना चाहता था। उसके परिवार का भरण-पोषण बहुत मुश्किलों से होता था। एक दिन एक फकीर बाबा उसके घर के सामने से गुजर रहे थे। उन्होंने हरी से उसका हालचाल पूछा। हरी ने कहा, “बाबा कुछ ठीक नहीं चल रहा मेरे साथ।” उसने कहा- बाबा मैं बड़ा आदमी बनाना चाहता हूँ। लेकिन मुझे काम करने में आलस आती हैं।
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फकीर बाबा ने कहा, “ठीक हैं आज मैं थोड़ा जल्दी में हूँ। शाम को वापस आते समय तुम्हारे सवालों का जबाब दूंगा।” फकीर बाबा वहाँ से चले गए। शाम को जब फकीर बाबा वापस आए तो देखे कि हरी उनके आने के इंतजार में बैठा था। उसने फकीर बाबा को देखते ही कहा, “बाबा मेरे सवाल का जबाब तो दे दो।” बाबा ने कहा, “मेरे पास एक तरीका हैं जिससे तुम बिना मेहनत के खूब सारा धन काम सकते हो।
हरी उस तरीके को सुनने के लिए लालायित हो उठा। फकीर बाबा ने कहा- “एक रात मैं कही से वापस अपने कुटिया को जा रहा था। मैंने देखा कि तुम्हारे खेत में दो व्यक्ति एक पोटली में सोने के कुछ जवाहरात छिपा रहे थे।” यह बात मैंने तुमसे बताने की कई बार कोशिश की। लेकिन मुझे समय नहीं मिल पाया। तुम्हारे लिए इससे अच्छा पैसा कमाने का कोई तरीका नहीं मिल सकता।
उसी दिन से हरी अपने पूरे खेत की खुदाई करना शुरू कर दिया। वह दिन-रात एक करके खुदाई करता रहा। लेकिन उसे लेकिन उसे कुछ भी हाथ नहीं लगा। वह फिर से मायूस होकर घर बैठ गया। उसकी पत्नी ने कहा, “आपने इतनी मेहनत करके खेत को उपजाऊ बना दिया हैं। क्यों न इसमें बीज डाल दो। पत्नी के कहने पर हरी ने अपने खेत में बीज डाल दिया। इस बार बारिश भी अच्छी हो गई।
कुछ ही दिनों में उसकी फसल लहलहाने लगी। फसल तैयार होने पर उसे बहुत सारे अनाज प्राप्त हुए। उस दिन हरी समझ गया कि फकीर बाबा हमें किस सोने की पोटली की बात कर रहे थे। उस दिन से हरी अपने खेतों में अथाह मेहनत करने लगा। जिससे वह बहुत सारे अनाज पैदा करने लगा।
3. लालच की कीमत:

एक बार की बात हैं। रहबरपुर नाम का एक गाँव था। उस गाँव के सभी लोग किसान थे। वे अपने खेतों में अच्छी फसल उगाते थे। इस बार सभी ने गेंहू की फसल लगाई थी। फसल लगभग तैयार हो चुकी थी। एक दिन उस गाँव में शहर से एक मुनीम आया। वह गाँव वालों को खेत में ही लगे फसल को बेचने के लिए कहने लगा।
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उसने उन्हें प्रलोभन देते हुए कहा- “अगर तुम लोग खड़ी हुई फसल को खेत में ही बेच दोगे तो तुम्हें कई तरह के फ़ायदे होंगे। जैसे- तुम्हें फसल काटने और उसे बाजार जाकर बेचने की जरूरत नहीं पेड़ेगी। इसके बदले में हम तुम्हें अभी पैसे दे देंगे। अगर कोई नुकसान होता हैं तो वह हम पर आएगा। इस तरह से वह बहला-फुसला कर उसने सभी गाँव वालों से खेत में लगी फसल को खरीद लिया।
जबकि उसी गाँव में सोहन नाम का एक व्यक्ति था। उसने अपनी फसल उस व्यापारी को देने से मना कर दिया। वह फसल को खुद काटकर बाजार में बेचने गया तो गाँव वालों से उसे दुगुने पैसे मिले। उसने गाँव आकर यह बात सबको बता दी। अब गाँव वालों को अपने किए पर पछतावा होने लगा। गाँव वालों ने कहा- “हमने लालच के चक्कर में अपना कितना बड़ा नुकसान कर लिया।”
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