लोमड़ी की कहानी बच्चों को उसकी चतुराई और चालाकी के कारण पसंद आती हैं। अक्सर लोमड़ी अपनी चालाकी के कारण अपने आप को हर मुश्किल से निकल लेती हैं। इसतरह से देखा जाए तो लोमड़ी की कहानी बच्चों को काफी अच्छी लगती हैं। कहानीज़ोन के इस लेख में आज लोमड़ी की चतुराई भरी कहानी सुनाने जा रहे हैं जोकि इस प्रकार से हैं।
1. लोमड़ी की चतुराई:

कालू नाम का एक कौवा था। वह अपने आप को बहुत बुद्धिमान समझता था। वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझता था। उसकी चापलूसी से पूरे जंगल के पक्षी परेशान रहते थे। एक बार कालू आसमान से उड़ते-उड़ते नीचे देखा कि एक बच्चा रोटी लिया हुआ हैं। वह झट से नीचे आया और बच्चे के हाथ से रोटी छीनकर उड़ गया।
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कौवा उड़ते-उड़ते किसी जंगल में एक पेड़ पर जाकर बैठा। कालू रोटी को देखकर बहुत खुश था। उसने सोचा आज तो मैं पेट भरकर भोजन करूंगा। तभी कही से एक लोमड़ी भागते हुए आई। कालू को रोटी लिए देख उसके मुँह में पानी आ गया। वह रोटी खाने की जतन करने लगी। लोमड़ी ने कहा, “कालू भैय्या नमस्ते मैं आपको कब से खोज रही हूँ।”
मैंने सुना हैं कि आप गाना बहुत अच्छा गाते हैं। पूरे जंगल में सभी जानवर और पक्षी आपकी तारीफ कर रहे हैं। मुझे भी एक गाना सुना दो प्लीज। लोमड़ी की बात सुनकर कालू कौवा अभिमान से भर गया। उसने लोमड़ी को गाना सुनाने के लिए जैसे ही मुँह खोला रोटी नीचे जा गिरी। लोमड़ी रोटी लेकर भाग गई। कौव समझ गया की लोमड़ी ने मुझे मूर्ख बना दिया।
कहानी से सीख:
वाह-वाही के चक्कर में अपना संयम नहीं खोना चाहिए।
2. शेर और लोमड़ी की कहानी:

किसी जंगल में एक बूढ़ा शेर और उसका दोस्त चूहा रहते थे। बूढ़ा शेर अब अपना शिकार करने में असमर्थ था। उसे कुछ खाए हुए कई दिन हो चुके थे। एक दिन वह किसी पेड के नीचे बैठा था। तभी उसका दोस्त चूहा आया उसने पूछा, “क्या हुआ महाराज आज बहुत थके हुए नजर आ रहे हो।”
शेर ने अपनी पूरी कहानी चूहे को बता दी। चूहा ने कहा, “महाराज जीने के लिए शिकार करना पड़ेगा।” बैठे-बैठे भोजन तो लोग अपने बच्चे को नहीं देते हैं। शेर ने कहा, “मेरे दोस्त आज के खाने का इंतजाम कर दो, कल से मैं खुद शिकार करूंगा।” चूहे ने कहा, “ठीक हैं तुम ऐसा लेट जाओ, जैसा कि मर गए हो।” उसने अपना पूरा प्लान शेर को बता दिया।
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चूहा शेर के लिए शिकार खोजने जा रहा था, तभी उसे सामने से एक लोमड़ी आती दिखाई दी। चूहा लोमड़ी के पास गया और उसे रोते हुए कहानी बताई की उसका दोस्त शेरसिंह मर गया। चूहा लोमड़ी को लेकर शेरसिंह के पास जा रहा था। लोमड़ी भी कम चालाक नहीं थी। उसने शेर को देख कुछ दूर पहले रुक गई।
उसने तेज आवाज में बोली शेर तो जींद हैं। चूहे ने कहा, “नहीं-नहीं मेरा दोस्त मर चुका हैं, पास आकर देख लो। फिर लोमड़ी ने तेज आवाज में बोली, “मरे हुए शेर के पूछ हिलते रहते हैं। लेकिन तुम्हारे दोस्त के पूछ नहीं हिल रहे हैं। लोमड़ी की बात सुनकर शेर धीरे-धीरे अपनी पूँछ हिलाने लगा।
लोमड़ी ने कहा, आज मैंने पहली बार देखा की किसी मरे हुए जानवर के पूछ हिलते हैं। लोमड़ी ने चूहे से कहा, “जा-जा किसी और को मूर्ख बनाना, मैं चली वह तेज रफ्तार में जंगल को भाग गई।”
कहानी से सीख
सोच समझकर फैसला लेने पर बड़ी से बड़ी मुश्किल का हल निकल जाता हैं।
3. चतुर लोमड़ी और मूर्ख बकरी:

एक लोमड़ी किसी जंगल से अंगूर खाकर उछल-कूद करती चली आ रही थी। अचानक उसका पैर फिसला और वह एक खाई में जा गिरी। लोमड़ी खाई से निकलने का बहुत प्रयास की लेकिन वह खाई से बाहर नहीं निकल पाई। वह मायूस होकर उसी खाई में खड़ी थी। उसे अपनी तरफ एक बकरी आती हुई दिखाई दी।
बकरी गर्मी के कारण तरबतर थी। लोमड़ी ने तेज आवाज में बोली, “अरे ओ बहन कहाँ जा रही हो। आओ पानी की ठंडक ले लो गर्मी बहुत हैं। बकरी ने खाई के ऊपर से देखी तो लोमड़ी पानी में उलट-पलट करके अपने आप को भिगो रही थी। उसे देख बकरी ने बिना सोचे समझे खाई में छलांग लगा दी।
लोमड़ी खाई में बकरी को देख उसके ऊपर चढ़कर खाई से बाहर निकल गई। लोमड़ी ने कहा, मूर्ख बहन खाई में कौन नहाता हैं। अब तुम खाई में रहो, मैं चली। बकरी समझ गई कि लोमड़ी ने मुझे फंसा दिया।
कहानी से सीख:
किसी के लालच में आने से पहले यह जरूर सोचे की वह आपको फ़ायदा क्यों पहुंचना चाहता हैं। इसमें जरुर उसका लाभ होगा।
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